Gold Silver Price: सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय और वैश्विक बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी दर्ज की गई है। इस दौरान निवेशक वैश्विक ब्याज दरों की उम्मीदों, बॉन्ड यील्ड, अमेरिकी डॉलर के उतार-चढ़ाव और चल रहे जियोपॉलिटिकल जोखिमों पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं। कीमती धातुओं के बाजार में यह उछाल कई महत्वपूर्ण वैश्विक कारकों का परिणाम है, जो निवेशकों और विश्लेषकों दोनों का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं।
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COMEX पर सोने और चांदी का हाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार (COMEX) पर सोना $4,451.30 प्रति औंस पर ट्रेड करता नजर आया, जो इसके पिछले बंद भाव $4,440 प्रति औंस से करीब $14 या 0.32% अधिक है। सत्र के दौरान सोने ने $4,473.20 प्रति औंस के उच्चतम और $4,422.30 प्रति औंस के निचले स्तर को छुआ।
दूसरी ओर, चांदी में सोने के मुकाबले कहीं अधिक तेजी देखने को मिली। COMEX पर चांदी $65.845 प्रति औंस पर पहुंच गई, जो पिछले बंद भाव $65.060 प्रति औंस से $0.737 या 1.13% ज्यादा है। कारोबार के दौरान चांदी की कीमतें $64.850 से $66.395 प्रति औंस के दायरे में झूलती नजर आईं।
सोने की कीमतों में बदलाव के मुख्य कारण
हाल के हफ़्तों में अमेरिका से आए कमजोर आर्थिक आंकड़ों और कम बॉन्ड यील्ड ने सोने की कीमतों को मजबूत सहारा दिया है। बाजार अमेरिका की आगामी मॉनेटरी पॉलिसी, डॉलर के उतार-चढ़ाव और वैश्विक स्तर पर राजनीतिक-आर्थिक घटनाक्रमों का बारीकी से आकलन कर रहा है।
इसके अलावा, ईरान संघर्ष और होर्मुज़ जलडमरूमध्य से तेल की सप्लाई में संभावित रुकावटों के कारण महंगाई (Inflation) का जोखिम लगातार बना हुआ है। तेल की ऊंची कीमतें वैश्विक स्तर पर महंगाई का दबाव बढ़ा सकती हैं, जिससे सेंट्रल बैंकों के लिए फैसले लेना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। टाटा म्यूचुअल फंड ने अपने अगस्त 2026 के ‘हाउस व्यू’ में बताया है कि ब्याज दरों और डॉलर के रुख को देखते हुए निकट भविष्य में कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, हालांकि सोने पर उनका नजरिया मध्यम से लंबी अवधि के लिए सकारात्मक बना हुआ है।
चांदी की कीमतों में तेजी की वजह
कीमती धातुओं में आई आम तेजी का फायदा चांदी को भी मिला है, लेकिन इसकी मांग का पैटर्न सोने से काफी अलग है क्योंकि इसमें औद्योगिक (Industrial) इस्तेमाल बहुत अधिक होता है।
टाटा म्यूचुअल फंड के अनुसार, चांदी का निकट भविष्य वैश्विक आर्थिक स्थितियों और औद्योगिक मांग की चाल पर निर्भर करेगा। सोलर इंस्टॉलेशन में बदलाव और सप्लाई की तंगी में ढील के कारण कुछ समय के लिए कीमतों में ठहराव या उतार-चढ़ाव आ सकता है। हालांकि, इलेक्ट्रॉनिक्स, एआई-संबंधित हार्डवेयर, रिन्यूएबल एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और सोलर पावर सेक्टर में इसकी मांग से लंबी अवधि में चांदी को बड़ा फायदा मिलने की पूरी उम्मीद है।
निवेशकों के लिए जरूरी सुझाव और रणनीतियां
विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को निवेश से पहले वैश्विक और घरेलू दोनों पहलुओं को समझना चाहिए।
सोने के लिए संकेतक: अमेरिकी ब्याज दरें, बॉन्ड यील्ड, डॉलर की मजबूती और जियोपॉलिटिकल जोखिम। कमजोर डॉलर और कम यील्ड सोने को निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक बनाते हैं।
चांदी में जोखिम: इंडस्ट्रियल डिमांड की बड़ी भूमिका होने के कारण चांदी में सोने की तुलना में ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
एलोकेशन स्ट्रैटेजी: टाटा म्यूचुअल फंड ने लंबी अवधि के निवेशकों को धीरे-धीरे (स्टैगर्ड तरीके से) निवेश करने की सलाह दी है। पोर्टफोलियो के लिए 70:30 के गोल्ड-टू-सिल्वर एलोकेशन को एक बेहतरीन रणनीतिक ढांचा बताया गया है।
साथ ही, निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि वैश्विक कीमतें घरेलू स्तर पर मुद्रा (करेंसी) के उतार-चढ़ाव, आयात लागत, टैक्स और स्थानीय बाजार की मांग के आधार पर भिन्न हो सकती हैं।
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