Goa Civic Elections 2026 : गोवा में लंबित नगर निकाय चुनावों को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य की 11 नगर परिषदों में चुनाव प्रक्रिया को तय संवैधानिक समयसीमा के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकार अपनी राजनीतिक सुविधा के अनुसार स्थानीय निकाय चुनावों की तारीख तय नहीं कर सकती। संविधान में नगर निकायों के कार्यकाल और चुनाव को लेकर स्पष्ट प्रावधान हैं, इसलिए नई कानूनी या चुनावी प्रक्रिया को चुनाव टालने का आधार नहीं बनाया जा सकता।
डिवीजन बेंच ने सुनाया महत्वपूर्ण फैसला
मामले की सुनवाई बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ की डिवीजन बेंच ने की। इसमें जस्टिस वाल्मीकि मेनेजेस और जस्टिस हितेन वेणुगावकर शामिल थे। अदालत ने यह टिप्पणी निमेसिया फलेरो बनाम गोवा सरकार एवं अन्य मामले की सुनवाई के दौरान की। हालांकि, कोर्ट ने गोवा म्यूनिसिपैलिटीज (अमेंडमेंट) ऑर्डिनेंस, 2026 की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा।
वार्ड परिसीमन और आरक्षण के नियम बदले गए
इस अध्यादेश को चुनौती देते हुए कई याचिकाएं हाईकोर्ट में दाखिल की गई थीं। याचिकाकर्ताओं ने वार्ड परिसीमन और आरक्षण से जुड़े नियमों में किए गए बदलाव पर सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि नगर परिषदों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद नई वैधानिक व्यवस्था लागू करने की प्रक्रिया चुनाव में देरी का कारण बन रही है। अदालत ने कानून में संशोधन के अधिकार को स्वीकार किया, लेकिन कहा कि इसका इस्तेमाल चुनाव टालने के लिए नहीं किया जा सकता।
पांच साल की संवैधानिक अवधि का मामला
याचिकाकर्ताओं ने संविधान के अनुच्छेद 243U का हवाला देते हुए कहा कि स्थानीय निकायों का पांच साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद समय पर चुनाव कराया जाना जरूरी है। हाईकोर्ट ने भी माना कि विधायिका को नगर निकायों से संबंधित कानूनों में बदलाव करने का अधिकार है, लेकिन नई प्रक्रिया शुरू होने के नाम पर चुनाव की संवैधानिक समयसीमा को अनिश्चितकाल तक आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।
राजनीतिक सुविधा के आधार पर तारीख तय नहीं होगी
अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी सरकार के पास ऐसे चुनाव की तारीख अपनी राजनीतिक सुविधा के अनुसार निर्धारित करने का संवैधानिक अधिकार नहीं है, जिसका कार्यकाल संविधान द्वारा निर्धारित है। कोर्ट के मुताबिक, नए नियम या चुनावी व्यवस्था लागू होने का अर्थ यह नहीं है कि चुनाव अपने आप आगे बढ़ जाएंगे। संबंधित अधिकारियों को कानूनी प्रक्रियाओं को जल्द से जल्द पूरा करना होगा।
9 सितंबर तक जारी करनी होगी परिसीमन अधिसूचना
हाईकोर्ट ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर समयबद्ध निर्देश भी जारी किए हैं। अदालत ने कहा कि अंतिम परिसीमन अधिसूचना 9 सितंबर तक जारी की जाए। इसके बाद आरक्षण से संबंधित अधिसूचनाएं जारी करनी होंगी। कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि चुनाव प्रक्रिया के सभी चरणों को न्यूनतम वैध समय में पूरा किया जाए, ताकि नगर परिषदों में लोकतांत्रिक व्यवस्था जल्द बहाल हो सके।
मार्च से मई के बीच खत्म हुआ कार्यकाल
गोवा की कई नगर परिषदों का पांच वर्षीय कार्यकाल इस वर्ष मार्च से मई के बीच समाप्त हो चुका है। कार्यकाल खत्म होने के बाद नगर निकायों के संचालन के लिए प्रशासकों की नियुक्ति की गई। अदालत ने कहा कि स्थानीय निकायों का लोकतांत्रिक नवीनीकरण अनिश्चित अवधि तक टाला नहीं जा सकता। जनता द्वारा चुनी गई संस्थाओं की जगह लंबे समय तक प्रशासकीय व्यवस्था बनाए रखना संवैधानिक भावना के अनुरूप नहीं है।
राज्य निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता पर भी टिप्पणी
हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग की भूमिका और उसकी संस्थागत स्वतंत्रता पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि आयोग की स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं है कि वह लागू और वैध कानूनों की अनदेखी कर सकता है। सभी संबंधित संस्थाओं को अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के बीच संतुलन रखते हुए संवैधानिक व्यवस्था के मुताबिक चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ानी होगी।
चुनावी कैलेंडर अनिश्चितकाल तक नहीं खिंचेगा
अदालत ने कहा कि किसी अन्य सरकारी संस्था या प्राधिकरण की धीमी गति को चुनावी प्रक्रिया में अनिश्चित देरी का आधार नहीं बनाया जा सकता। परिसीमन, आरक्षण और अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं को इस तरह पूरा किया जाना चाहिए कि चुनावी कैलेंडर संविधान की भावना के अनुरूप रहे। कोर्ट ने दोहराया कि समय पर चुनाव कराना लोकतांत्रिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण शर्त है।
11 नगर परिषदों के चुनाव का रास्ता साफ
हाईकोर्ट के आदेश के बाद गोवा की 11 नगर परिषदों के आगामी चुनाव को लेकर तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट हो गई है। अब राज्य सरकार, संबंधित विभागों और राज्य निर्वाचन आयोग को परिसीमन, आरक्षण और चुनाव से जुड़ी अन्य प्रक्रियाएं तेजी से पूरी करनी होंगी। अदालत ने संकेत दिया है कि संवैधानिक समयसीमा से विचलन केवल उतनी अवधि तक ही स्वीकार्य हो सकता है, जितना कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के लिए वास्तव में जरूरी हो।
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