Gangaur Vrat 2026: पति की लंबी उम्र के लिए इस मुहूर्त में करें पूजा, जानें पूरी डिटेल्स

हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित गणगौर व्रत रखा जाता है। यहां जानें 2026 में यह व्रत 20 मार्च या 21 मार्च में से किस दिन रखा जाएगा, साथ ही पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि भी।

Gangaur Vrat 2026

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मार्च 8, 2026

Gangaur Vrat 2026: सनातन धर्म में गणगौर व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। खासकर राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश और उत्तर भारत के कई हिस्सों में यह पर्व बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करके सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तप और गणगौर व्रत रखा था। उनकी भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपने जीवनसाथी के रूप में स्वीकार किया। तभी से यह परंपरा चली आ रही है और महिलाएं माता पार्वती की तरह अटूट प्रेम और सौभाग्य की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं।

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गणगौर व्रत का धार्मिक महत्व

Gangaur Vrat 2026
पति की लंबी उम्र के लिए इस मुहूर्त में करें पूजा

‘गणगौर’ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है – ‘गण’ और ‘गौर’। यहां ‘गण’ का संबंध भगवान शिव से माना जाता है, जबकि ‘गौर’ का अर्थ माता पार्वती से है। इस वजह से यह पर्व शिव-पार्वती के पवित्र प्रेम और वैवाहिक जीवन का प्रतीक माना जाता है।

मान्यता है कि जो महिलाएं सच्चे मन और श्रद्धा के साथ गणगौर व्रत रखती हैं, उन्हें माता पार्वती और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन के लिए यह व्रत रखती हैं। वहीं अविवाहित कन्याएं अच्छे और योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति की कामना से यह व्रत करती हैं।

कब रखा जाएगा गणगौर व्रत

द्रिक पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 21 मार्च की सुबह 2 बजकर 30 मिनट से शुरू होगी और उसी दिन रात 11 बजकर 56 मिनट तक रहेगी। ऐसे में इस वर्ष गणगौर व्रत 21 मार्च 2026, शनिवार के दिन रखा जाएगा।

इस दिन महिलाएं सुबह से व्रत रखकर शिव-पार्वती की पूजा करती हैं और पूरे दिन श्रद्धा के साथ नियमों का पालन करती हैं। शाम के समय भी दोबारा पूजा की जाती है और व्रत कथा सुनी जाती है।

गणगौर व्रत का शुभ मुहूर्त

इस दिन पूजा के लिए कई शुभ मुहूर्त माने जाते हैं।

सूर्योदय: सुबह 06:24 बजे

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:49 से 05:36 बजे तक

अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:04 से 12:52 बजे तक

सायं संध्या मुहूर्त: शाम 06:32 से 07:43 बजे तक

इन शुभ समयों में पूजा करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और भगवान शिव तथा माता पार्वती की कृपा प्राप्त होती है।

गणगौर व्रत की पूजा विधि

गणगौर व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे तथा पवित्र वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के मंदिर या पूजा स्थल पर एक चौकी रखें और उस पर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं। इसके ऊपर एक थाली रखें और उसमें मिट्टी से भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा बनाएं। इसके बाद हाथ जोड़कर व्रत का संकल्प लें। देवी-देवताओं की प्रतिमा को सुंदर वस्त्रों और आभूषणों से सजाएं। फिर पास में एक कलश स्थापित करें और विधि-विधान से गौरी-शंकर की पूजा करें। पूजा के दौरान फूल, फल, अक्षत, मिठाई और धूप-दीप अर्पित करें। इसके बाद मंत्रों का जाप करें और आरती उतारें।

शाम के समय एक बार फिर से गण और गौर की पूजा की जाती है। इसके बाद गणगौर व्रत की कथा सुनी जाती है। पूजा संपन्न होने के बाद मिट्टी की प्रतिमा को किसी पवित्र नदी या जल में विसर्जित किया जाता है। अंत में जल ग्रहण करके व्रत का पारण किया जाता है। गणगौर का यह पावन पर्व महिलाओं के लिए आस्था, प्रेम और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां पौराणिक कथाओं,धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। खबर में दी जानकारी पर विश्वास व्यक्ति की अपनी सूझ-बूझ और विवेक पर निर्भर करता है। प्राइम टीवी इंडिया इस पर दावा नहीं करता है ना ही किसी बात पर सत्यता का प्रमाण देता है।