Ganga Dusshera 2026: कब है गंगा दशहरा? एक क्लिक में जानें दिन तारीख और मुहूर्त

हिंदू धर्म में गंगा दशहरा को बेहद पवित्र पर्व माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। हर वर्ष ज्येष्ठ शुक्ल दशमी तिथि को यह पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है।

Ganga Dusshera 2026

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मई 7, 2026

Ganga Dusshera 2026: सनातन धर्म में कई सारे व्रत त्योहार पड़ते हैं, और सभी का अपना महत्व भी होता है। लेकिन गंगा दशहरा पर्व को बेहद ही खास माना गया है, जो कि ज्येष्ठ माह में पड़ती है। यह पावन पर्व मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण की समृति में मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान, पूजा पाठ और दान करने से सभी तरह के पापों का नाश हो जाता है और जीवन में सुख समृद्धि आती है। पंचांग के अनुसार हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा का त्योहार मनाया जाता है। ऐसे में हम आपको अपने इस लेख द्वारा बता रहे हैं कि इस बार गंगा दशहरा का त्योहार कब मनाया जाएगा।

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गंगा दशहरा की तारीख

Ganga Dusshera 2026
कब है गंगा दशहरा?

पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि की शुरुआत 25 मई को सुबह 4 बजकर 28 मिनट से हो रही है और इस तिथि का समापन 26 मई को सुबह 5 बजकर 11 मिनट पर हो जाएगा। किसी भी व्रत और त्योहार का निर्धारण उदया तिथि के आधार पर किया जाता है। इसी कारण गंगा दशहरा का पर्व 25 मई दिन सोमवार को मनाया जाएगा।

स्नान दान का शुभ मुहूर्त

आपको बता दें कि गंगा दशहरे के दिन ब्रह्म मुहूर्त और सूर्योदय के बाद का समय बेहद ही शुभ है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने और सूर्यदेव को जल अर्पित करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। अगर नदी में स्नान करना संभव न हो, तो घर में स्नान के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करना शुभ रहेगा। इस दिन जरूरतमंद लोगों को जल, फल, वस्त्र और अन्न का दान करना पुण्यदायी माना जाता है। गर्मी के मौसम में शीतल जल, छाता और पंखा दान करने का महत्व बताया गया है।

पूजा की सरल विधि

गंगा दशहरा के पावन दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें इसके बाद साफ वस्त्र धारण करें। फिर पूजा स्थल पर मां गंगा की प्रतिमा स्थापित करें। मां गंगा को पुष्प, दीपक, धूप और गंगाजल अर्पित करें। पूजा के दौरान “ॐ गंगे नमः” और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। साथ ही गंगा चालीसा या गंगा स्तोत्र का पाठ करने से विशेष लाभ मिलता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा का भी विशेष महत्व होता है, क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां गंगा भगवान शिव की जटाओं से होकर पृथ्वी पर आई थीं।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां पौराणिक कथाओं,धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। खबर में दी जानकारी पर विश्वास व्यक्ति की अपनी सूझ-बूझ और विवेक पर निर्भर करता है। प्राइम टीवी इंडिया इस पर दावा नहीं करता है ना ही किसी बात पर सत्यता का प्रमाण देता है।