US Iran Conflict: ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक और सैन्य तनाव एक बार फिर अपने चरम पर पहुँच गया है। ईरान के भीतर बढ़ते आंतरिक विद्रोह और वहां की सरकार द्वारा प्रदर्शनकारियों पर की गई हिंसक कार्रवाई ने इस आग में घी डालने का काम किया है। जहाँ एक ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के शासन तंत्र को बदलने की वकालत कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ईरान ने भी अब अपने तेवर कड़े कर लिए हैं। दोनों देशों के बीच की यह तल्खी अब सीधे तौर पर धमकियों में बदल गई है, जिससे वैश्विक राजनीति में अस्थिरता का खतरा बढ़ गया है।
ईरानी सेना की खौफनाक चेतावनी: ‘हम वो हाथ काट देंगे’
ईरान के सशस्त्र बलों के प्रवक्ता जनरल अबुलफजल शेखरची ने मंगलवार को वाशिंगटन को एक स्पष्ट और बेहद कड़ी चेतावनी जारी की। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका ने ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ किसी भी तरह की सैन्य या कूटनीतिक कार्रवाई करने की जुर्रत की, तो उसके परिणाम भयानक होंगे। शेखरची ने कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा, “ट्रंप अच्छी तरह जानते हैं कि यदि हमारे नेता की ओर कोई भी हाथ बढ़ाया गया, तो हम न केवल उस हाथ को काट देंगे, बल्कि उनकी पूरी दुनिया को आग लगा देंगे।” यह बयान ईरान की उस मानसिकता को दर्शाता है जिसमें वे अपने सर्वोच्च नेता की सुरक्षा को राष्ट्रीय गरिमा का विषय मानते हैं।
डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा रुख: खामेनेई को बताया ‘बीमार व्यक्ति’
तनाव की इस नई लहर की शुरुआत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस हालिया बयान से हुई जो उन्होंने ‘पॉलिटिको’ को दिए एक साक्षात्कार में दिया था। ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की कड़ी आलोचना करते हुए उन्हें एक ‘बीमार व्यक्ति’ करार दिया। ट्रंप ने कहा कि खामेनेई को अपने नागरिकों की हत्या करना तुरंत बंद करना चाहिए और देश की अर्थव्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए। इतना ही नहीं, ट्रंप ने खामेनेई के लगभग 40 साल पुराने शासन को समाप्त करने का आह्वान करते हुए कहा कि ईरान के लिए अब नया नेतृत्व तलाशने का समय आ चुका है। ट्रंप के इस रुख ने ईरानी प्रशासन को बुरी तरह उकसा दिया है।
ईरान में प्रदर्शन और खूनी हिंसा का तांडव
ईरान में तनाव की जड़ें वहां की खराब अर्थव्यवस्था और नागरिक अधिकारों के हनन से जुड़ी हैं। 28 दिसंबर से शुरू हुए देशव्यापी प्रदर्शनों ने ईरान को हिलाकर रख दिया है। इन प्रदर्शनों को कुचलने के लिए ईरानी सुरक्षा बलों ने जो कार्रवाई की, उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘क्रूर’ माना जा रहा है। अमेरिकी मानवाधिकार एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, इस हिंसा में अब तक 4,029 लोगों की जान जा चुकी है। मृतकों के आंकड़ों में 3,786 आम प्रदर्शनकारी और 180 सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। इसके अलावा, प्रदर्शनों को दबाने के अभियान के तहत लगभग 24,669 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिसने मानवाधिकारों के उल्लंघन पर वैश्विक बहस छेड़ दी है।
वैश्विक कूटनीति और भविष्य की अनिश्चितता
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता यह टकराव केवल दो देशों तक सीमित नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति और बिगड़ती है, तो पूरे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध के बादल मंडरा सकते हैं। जहाँ ट्रंप ईरान पर अधिकतम आर्थिक दबाव की नीति अपना रहे हैं, वहीं ईरान अपनी सैन्य क्षमता और ‘प्रॉक्सी वॉर’ के दम पर अमेरिका को चुनौती देने की कोशिश कर रहा है। आने वाले दिन इस लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होंगे कि क्या वैश्विक शक्तियां हस्तक्षेप करके इस तनाव को कम कर पाती हैं या यह विवाद एक बड़े सशस्त्र संघर्ष का रूप ले लेता है।
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