G7 Summit 2026: फ्रांस में आयोजित हो रहे 52वें जी7 शिखर सम्मेलन के मंच पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच एक बेहद महत्वपूर्ण मुलाकात हुई है. दोनों वैश्विक नेता लगभग 16 महीनों के लंबे अंतराल के बाद एक-दूसरे के आमने-सामने आए हैं. इस बहुपक्षीय अंतरराष्ट्रीय महाधिवेशन के इतर पीएम मोदी कनाडा, यूनाइटेड किंगडम (यूके) और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रप्रमुखों के साथ भी बेहद अहम द्विपक्षीय वार्ताएं करने वाले हैं. हालांकि, मोदी-ट्रंप की यह मुलाकात एक ऐसे नाजुक समय में हो रही है, जब ओमान तट के पास अमेरिकी नौसेना (US Navy) द्वारा भारतीय नाविकों पर किए गए जानलेवा हमले का बेहद संवेदनशील मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मीडिया और राजनयिक गलियारों में पूरी तरह गरमाया हुआ है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारतीय नागरिकों की हत्या
इस कूटनीतिक मुलाकात के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या पीएम मोदी जी-7 के इस वैश्विक मंच पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान मारे गए तीन निर्दोष भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा ट्रंप के सामने उठाएंगे? इस दुखद घटना पर भारत से माफी मांगने या संवेदना जताने के बजाय अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक बेहद कड़ा और विवादित बयान जारी किया है. रुबियो ने कहा कि इस अशांत क्षेत्र में सुरक्षा बनाए रखने के लिए तैनात अमेरिकी सेना के सभी आदेशों का वाणिज्यिक जहाजों को तत्काल पालन करना चाहिए. अमेरिकी प्रशासन के इस तल्ख और गैर-जिम्मेदाराना रवैये को लेकर पूरे भारत में भारी आक्रोश और गहरा गुस्सा देखा जा रहा है.
व्हाइट हाउस द्वारा मोदी-ट्रंप द्विपक्षीय बैठक की पुष्टि
इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात को लेकर व्हाइट हाउस ने पहले ही आधिकारिक बयान जारी कर दिया था. अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप फ्रांस में जी7 समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित दुनिया के अन्य प्रमुख नेताओं के साथ द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकें करेंगे. अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि 17 जून को होने वाली इस विशेष बैठक में दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्ष प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (India-US Trade Agreement) को लेकर जारी बातचीत की प्रगति और कूटनीतिक विकास की गहन समीक्षा करेंगे. इस रणनीतिक संवाद के तुरंत बाद दोनों नेता अन्य जी7 देशों के सहयोगियों और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ एक विशेष वर्किंग लंच का हिस्सा बनेंगे.
मध्य पूर्व संकट पर डोनाल्ड ट्रंप के बयानों से यूरोपीय देशों में नाराजगी
मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में जारी भारी सैन्य और राजनीतिक तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अपने ही सहयोगी देशों को लेकर की गई तीखी टिप्पणियों से यूरोपीय देशों के नेता काफी नाराज और असहज हैं. यही वजह है कि इस वर्ष फरवरी से जारी भारी टकराव के बाद हुए अमेरिका-ईरान शांति समझौते (US-Iran Peace Deal) के बावजूद कूटनीतिक दूरियां साफ नजर आ रही हैं. दरअसल, ट्रंप इस बात से बेहद खफा हैं कि ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल के सैन्य संघर्ष में उनके पुराने यूरोपीय साथियों ने शामिल होने की इच्छा नहीं जताई. इस वैचारिक मतभेद ने ट्रंप के उन वैश्विक नेताओं के साथ भी संबंध बिगाड़ दिए हैं, जिनके साथ उनके रिश्ते पहले काफी सम्मानजनक और दोस्ताना हुआ करते थे.
इमैनुएल मैक्रों और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच बदलते निजी समीकरण पर पूरी दुनिया की नजरें
इस साल के जी7 शिखर सम्मेलन के मेजबान और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ भी डोनाल्ड ट्रंप के समीकरण अब पहले जैसे नहीं रहे. हालांकि ट्रंप राष्ट्रपति मैक्रों को सबसे लंबे समय से जानते हैं, लेकिन हाल के दिनों में ट्रंप द्वारा मैक्रों की निजी जिंदगी और उनकी शादी को लेकर की गई बेहद व्यक्तिगत टिप्पणियों ने दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों में खटास पैदा कर दी है. इन बयानों के बाद से फ्रांसीसी राष्ट्रपति अपने अमेरिकी समकक्ष के प्रति काफी नाराज और सख्त दिखाई दे रहे हैं. ऐसे तनावपूर्ण और बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच, जी7 समिट के मंच पर अमेरिकी राष्ट्रपति के प्रति दुनिया के अन्य ताकतवर देशों का रुख कैसा रहता है, इस पर पूरी दुनिया के नीति-निर्माताओं की निगाहें टिकी हुई हैं.










