Fuel Export Duty Cut: केंद्र सरकार ने देश से निर्यात किए जाने वाले पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी हवाई ईंधन पर लगने वाले एक्सपोर्ट ड्यूटी (निर्यात शुल्क) में बड़ी कटौती की है। यह निर्णय आज, 1 जून 2026 से प्रभावी हो गया है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति और भू-राजनीतिक तनावों के बीच सरकार का यह कदम तेल रिफाइनिंग कंपनियों के लिए राहत भरा माना जा रहा है।
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निर्यात शुल्क में कटौती
सरकार ने ईंधन निर्यात पर लगने वाली स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) में तीनों श्रेणियों में बदलाव किए हैं। नए नोटिफिकेशन के अनुसार, कटौती का विवरण इस प्रकार है—
पेट्रोल: पेट्रोल के निर्यात पर ड्यूटी को 3 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 1.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, यानी इसमें 50% की सीधी कटौती की गई है।
डीजल: डीजल पर लगने वाले टैक्स को 16.5 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 13.5 रुपये प्रति लीटर किया गया है।
हवाई ईंधन (ATF): सबसे बड़ी कटौती एटीएफ पर देखने को मिली है, जिसे 16 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 9.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।
यह नई दरें आगामी 15 दिनों के पाक्षिक (Fortnightly) रिव्यू तक लागू रहेंगी।
सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?
भारत सरकार ने मार्च 2026 में पहली बार ईंधन निर्यात पर ड्यूटी लगाने का निर्णय तब लिया था जब अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक तेल बाजार में भारी अनिश्चितता और सप्लाई चेन में बाधाएं उत्पन्न हो गई थीं। उस समय सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि भारतीय रिफाइनरियां अधिक मुनाफे के लालच में सारा ईंधन विदेशों में न भेज दें और देश के भीतर ईंधन की कोई कमी न हो। अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिरता और सुधार के संकेतों को देखते हुए, सरकार ने इस टैक्स में ढील दी है।
क्या आम जनता को पेट्रोल-डीजल सस्ता मिलेगा?
अगर आप यह सोच रहे हैं कि इस कटौती से पेट्रोल पंपों पर तेल सस्ता हो जाएगा, तो इसका उत्तर ‘नहीं’ है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत के भीतर बेचे जाने वाले घरेलू पेट्रोल-डीजल की एक्साइज ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया गया है। अतः, आम उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों पर इस फैसले का कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा। पेट्रोल-डीजल की कीमतें अब भी वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और तेल विपणन कंपनियों (OMCs) की नीतियों पर ही निर्भर करेंगी।
तेल कंपनियों के लिए क्या हैं इसके मायने?
एक्सपोर्ट ड्यूटी में कटौती का सीधा लाभ भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों (जैसे रिलायंस और नायरा एनर्जी) को मिलेगा। विदेशों में ईंधन निर्यात करने की उनकी लागत कम होगी, जिससे उनका प्रॉफिट मार्जिन बढ़ने की उम्मीद है। चूँकि यह एक अस्थाई व्यवस्था है, इसलिए सरकार हर 15 दिन में वैश्विक बाजार की स्थितियों की समीक्षा करती है। यदि भविष्य में तेल बाजार में फिर से उतार-चढ़ाव आता है, तो सरकार कीमतों की समीक्षा करके टैक्स को दोबारा संशोधित कर सकती है। संक्षेप में, यह राहत आम आदमी के लिए नहीं बल्कि तेल निर्यातकों के लिए है, ताकि वैश्विक बाजार में भारतीय तेल कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मकता बनी रहे।
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