FSSAI Crackdown: Dabur के बाद Zandu समेत इन कंपनियों पर शिकंजा, ‘100%’ दावों पर सख्ती

'100 प्रतिशत शुद्ध', '100 प्रतिशत नैचुरल' और ऐसे ही दावों पर अब FSSAI ने सख्त रुख अपना लिया है। डाबर के बाद जांडू समेत कई कंपनियां जांच के दायरे में आ गई हैं। सवाल यह है कि आखिर इन दावों में क्या खामी मिली और उपभोक्ताओं पर इसका क्या असर पड़ेगा।

FSSAI Crackdown

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 19, 2026

FSSAI Crackdown : फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी FSSAI ने खाद्य और पेय पदार्थों की पैकेजिंग, लेबल और विज्ञापनों में किए जाने वाले ‘100%’ दावों को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। कंपनियां अपने उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए ‘100% Pure’, ‘100% Natural’ और इसी तरह के दावों का इस्तेमाल करती हैं। खाद्य नियामक का मानना है कि इस तरह की भाषा कई बार उपभोक्ताओं के बीच गलत धारणा पैदा कर सकती है और हर उत्पाद के लिए ऐसे दावों को पूरी तरह वैज्ञानिक या निर्धारित मानकों के आधार पर साबित करना आसान नहीं होता।

ग्राहकों को भ्रमित कर सकते हैं ऐसे दावे

FSSAI के अनुसार, किसी खाद्य उत्पाद पर ‘100% प्योर’ या ‘100% नैचुरल’ लिखा होने से उपभोक्ता यह मान सकता है कि उत्पाद में किसी भी तरह की मिलावट नहीं है या उसकी सामग्री पूरी तरह प्राकृतिक है। हालांकि, किसी उत्पाद की पूरी तरह शुद्ध या प्राकृतिक होने की ऐसी व्यापक पुष्टि अलग-अलग परिस्थितियों में जटिल हो सकती है। इसलिए खाद्य कंपनियों को अपने दावों की भाषा में स्पष्टता और प्रमाणिकता बनाए रखने की जरूरत है।

पांच कंपनियों ने हटाए ‘100%’ वाले दावे

FSSAI की कार्रवाई और निर्देशों के बाद पांच कंपनियों ने अपने उत्पादों और प्रचार सामग्री से ऐसे ‘100%’ दावे हटाने पर सहमति जताई है। इनमें BONN BISCUITS, Zandu Honey, AMWAY INDIA और JUZA FOODS समेत पांच कंपनियां शामिल हैं। खाद्य नियामक लगातार कंपनियों की पैकेजिंग, लेबलिंग और विज्ञापन सामग्री की निगरानी कर रहा है, ताकि उपभोक्ताओं तक सही और सत्यापित जानकारी पहुंच सके।

पैकेजिंग और विज्ञापनों पर भी नजर

खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण का कहना है कि कंपनियों द्वारा उत्पादों से संबंधित किए जाने वाले दावे स्पष्ट, सटीक और जांच के आधार पर साबित किए जा सकने वाले होने चाहिए। किसी खाद्य वस्तु की गुणवत्ता या विशेषता को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने वाली भाषा उपभोक्ताओं के निर्णय को प्रभावित कर सकती है। इसी वजह से पैकेट पर लिखे दावों के साथ-साथ विज्ञापनों और अन्य प्रचार सामग्री पर भी निगरानी रखी जा रही है।

‘100% Natural’ और ‘100% Pure’ पर क्यों आपत्ति?

FSSAI की चिंता मुख्य रूप से इस बात को लेकर है कि ‘100%’ जैसी भाषा किसी उत्पाद को पूरी तरह शुद्ध, प्राकृतिक या किसी भी बाहरी तत्व से मुक्त होने का संकेत दे सकती है। अगर कंपनी ऐसे दावे को निर्धारित मानकों और प्रमाणों के जरिए साबित नहीं कर पाती, तो यह उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाला संदेश बन सकता है। नियामक चाहता है कि कंपनियां ऐसी शब्दावली का इस्तेमाल करें, जिससे ग्राहक को उत्पाद की वास्तविक प्रकृति के बारे में स्पष्ट जानकारी मिले।

Dabur India पर भी हो चुकी है कार्रवाई

‘100%’ दावों को लेकर Dabur India भी FSSAI की कार्रवाई का सामना कर चुकी है। प्राधिकरण ने कंपनी को कुछ खाद्य उत्पादों की बिक्री रोकने का निर्देश दिया था। इनमें शहद, एप्पल साइडर विनेगर, वर्जिन नारियल तेल, तिल का तेल, गाय का घी, नारियल पानी और नारियल दूध जैसे उत्पाद शामिल थे। इन उत्पादों में से कुछ की पैकेजिंग या प्रचार सामग्री पर ‘100% Natural’, ‘100% Pure’ और ‘100% Purity Guaranteed’ जैसे दावे किए गए थे।

कई तरह के दावों पर उठे सवाल

Dabur के कुछ उत्पादों से संबंधित सामग्री में ‘100% Organic’ और ‘100% Tender Coconut Water’ जैसे दावे भी किए गए थे। FSSAI की कार्रवाई के बाद खाद्य उद्योग में पैकेजिंग और विज्ञापन में इस्तेमाल होने वाली भाषा को लेकर चर्चा तेज हुई है। कंपनियों के लिए अब यह जरूरी हो गया है कि वे उत्पाद की विशेषताओं को बताते समय ऐसे दावों से बचें, जिन्हें पूरी तरह प्रमाणित करना मुश्किल हो सकता है।

उपभोक्ता हित को बताया जा रहा मुख्य उद्देश्य

FSSAI की सख्ती का प्रमुख उद्देश्य खाद्य उत्पाद खरीदने वाले उपभोक्ताओं को स्पष्ट और विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध कराना है। नियामक का जोर इस बात पर है कि विज्ञापनों और पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले दावे वास्तविक तथ्यों और निर्धारित खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुरूप हों। आने वाले समय में खाद्य कंपनियों की लेबलिंग और मार्केटिंग भाषा पर निगरानी और बढ़ सकती है।

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