France Protest: फ्रांस में महंगाई के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन, पेरिस में आगजनी और लूटपाट से तनाव

फ्रांस में महंगाई और बढ़ते खर्च के खिलाफ प्रदर्शन हिंसक हो गया। पेरिस समेत कई शहरों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प, आगजनी और लूटपाट की खबरें सामने आई हैं।

France Protest

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अक्टूबर 18, 2026

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France Protest: यूरोपीय देश फ्रांस इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट और महंगाई के भारी दबाव का सामना कर रहा है। देश में बढ़ती महंगाई और जीवनयापन के लगातार महंगे होते खर्च के खिलाफ नागरिकों का गुस्सा आखिरकार सड़कों पर फूट पड़ा। फ्रांस की राजधानी पेरिस समेत देश के कई प्रमुख शहरों में हुए इन विरोध प्रदर्शनों के दौरान स्थिति उस समय बेकाबू हो गई जब पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच भीषण झड़पें शुरू हो गईं। इन प्रदर्शनों ने उग्र रूप ले लिया, जिसके चलते कई स्थानों पर आगजनी, दुकानों में लूटपाट और सार्वजनिक संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आई हैं। हालात को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों को कड़े कदम उठाने पड़े।

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पेरिस और अन्य शहरों में व्यापक हिंसा और तोड़फोड़

France Protest
फ्रांस में महंगाई के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन

प्रदर्शनों के दौरान राजधानी पेरिस में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए, जहां कुछ नकाबपोश उपद्रवियों और पुलिस के बीच तीखा टकराव देखने को मिला। प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों पर पथराव किया और पटाखे चलाए, जिससे कई इलाकों में अफरा-तफरी मच गई। राजधानी में कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया।

हिंसा की यह आग सिर्फ पेरिस तक सीमित नहीं रही, बल्कि फ्रांस के अन्य बड़े शहरों में भी फैल गई। ल्योन शहर में एक टूरिस्ट ऑफिस को आग के हवाले कर दिया गया, जबकि मार्सिले और लिले में सरकारी इमारतों को तथा बोर्डो में पुलिस परिसर को निशाना बनाकर तोड़फोड़ की गई। लिमोज में टाउन हॉल पर हमला कर वहां आगजनी की सूचना मिली। इसके अलावा, लिले के एक एप्पल स्टोर में लूटपाट होने का दावा भी किया गया है। पेरिस के मशहूर शैंप्स-एलिसीज इलाके में, जहां कई महंगे और लग्जरी ब्रांड्स के स्टोर हैं, प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने आगे बढ़ने की कोशिश की, जिन्हें खदेड़ने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया।

प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव, गिरफ्तारियां

प्रदर्शन में शामिल लोगों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। फ्रांस के गृह मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पूरे देश में लगभग 5.5 लाख लोग इस प्रदर्शन में शामिल हुए, जबकि सीजीटी (CGT) यूनियन ने इस संख्या को बढ़ाकर लगभग 8 लाख बताया है। कानून व्यवस्था बनाए रखने और हिंसा रोकने के लिए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए देश भर से करीब 400 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों को गंभीर चोटें भी आईं।

राष्ट्रपति मैक्रों की कड़ी चेतावनी और प्रदर्शन की असल वजह

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फ्रांस में महंगाई के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन

इस पूरी हिंसा पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोशल मीडिया के जरिए चेतावनी दी है कि सरकारी कार्यालयों, दुकानों में तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाओं में शामिल उपद्रवियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने भी इन हिंसक वारदातों की कड़ी निंदा की है।

इस बड़े जन-आंदोलन के पीछे मुख्य रूप से बढ़ती महंगाई, जीवनयापन की ऊंची लागत और सरकारी नीतियों से उपजी नाराजगी है। साल 2018 में फ्रांस में शुरू हुए चर्चित ‘येलो वेस्ट्स’ आंदोलन की तर्ज पर ही सोशल मीडिया के माध्यम से इस प्रदर्शन का आह्वान किया गया था, जिसमें ट्रेड यूनियनों और छात्रों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। हाई स्कूल के छात्र भी शिक्षा व्यवस्था, शिक्षकों की कमी और विश्वविद्यालय में दाखिले की समस्याओं को लेकर इस दबाव का हिस्सा बन गए हैं। सरकार के सामने अब इन गंभीर आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों का समाधान करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

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