वन्यजीव संरक्षण, जल सुरक्षा और हरित भविष्य की आधारशिला हैं वन: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण, वन संवर्धन और वन्यजीव संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सतत विकास के लक्ष्य की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। वन केवल हरियाली के स्रोत नहीं हैं, बल्कि वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास, जल संरक्षण का आधार और भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य धरोहर हैं। इसी संकल्प को साकार करते हुए दक्षिण पन्ना वनमंडल ने वन क्षेत्रों को स्वच्छ एवं प्लास्टिक मुक्त बनाने की दिशा में एक अभिनव पहल करते हुए वर्ष 2025 के विभिन्न पौधारोपण स्थलों से 11 हजार 260 किलोग्राम प्लास्टिक कचरे का संग्रहण

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Published On :

जून 14, 2026

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भोपाल. 
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण, वन संवर्धन और वन्यजीव संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सतत विकास के लक्ष्य की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। वन केवल हरियाली के स्रोत नहीं हैं, बल्कि वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास, जल संरक्षण का आधार और भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य धरोहर हैं। इसी संकल्प को साकार करते हुए दक्षिण पन्ना वनमंडल ने वन क्षेत्रों को स्वच्छ एवं प्लास्टिक मुक्त बनाने की दिशा में एक अभिनव पहल करते हुए वर्ष 2025 के विभिन्न पौधारोपण स्थलों से 11 हजार 260 किलोग्राम प्लास्टिक कचरे का संग्रहण कर उसका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया है।

इस पहल से पौधारोपण स्थलों को प्लास्टिक मुक्त बनाने में सफलता मिली है, साथ ही 68 हजार किलोग्राम कार्बन-डाइ-ऑक्साइड के बराबर ग्रीन-हाउस गैसों के उत्सर्जन की रोकथाम भी हुई है। इतना ही नहीं, प्लास्टिक कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन से स्थानीय वन समितियों को लगभग 56 हजार 300 रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हुई।

वन विभाग द्वारा वर्ष-2025 के विभिन्न पौधरोपण स्थलों पर रोपण कार्य पूरा होने के बाद शेष बचे प्लास्टिक पॉलीबैगों के संग्रहण के लिए विशेष अभियान चलाया गया। स्थानीय वन समितियों और वनकर्मियों के सहयोग से व्यापक स्तर पर प्लास्टिक कचरे का संग्रहण किया गया। इसके उपरांत संग्रहित सामग्री को साफ कर उसमें मिश्रित मिट्टी, पत्थर तथा अन्य अशुद्धियों को पृथक किया गया, जिससे उसका सुरक्षित एवं वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके।

संग्रहित प्लास्टिक कचरे को ऊर्जा पुनर्प्राप्ति (एनर्जी रिकवरी) के लिए अमानगंज स्थित जेके सीमेंट संयंत्र को विक्रय किया गया। सीमेंट संयंत्रों में उपलब्ध आधुनिक प्रदूषण नियंत्रण प्रणालियां तथा इलेक्ट्रो स्टैटिक प्रीसिपिटेटर (ईएसपी) जैसी उन्नत तकनीकों के कारण इस प्रकार के अपशिष्ट का निस्तारण सुरक्षित एवं पर्यावरण-अनुकूल तरीके से किया जा सकता है। यह व्यवस्था खुले में प्लास्टिक जलाने अथवा अवैज्ञानिक तरीके से फेंकने की तुलना में अधिक प्रभावी और सुरक्षित मानी जाती है।

वन विभाग के अनुसार पौधरोपण के बाद पॉलीबैग्स् को वन क्षेत्रों में छोड़ देना, गड्ढों में दबा देना अथवा खुले में जला देना पर्यावरण और वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकता है। समय के साथ यह प्लास्टिक सूक्ष्म कणों में परिवर्तित होकर माइक्रोप्लास्टिक का रूप ले लेता है, जो मिट्टी की गुणवत्ता, जल स्रोतों, जैव-विविधता तथा मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। ऐसे में प्लास्टिक कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।

अभियान की विशेष उपलब्धि यह है कि अपशिष्ट समझी जाने वाली सामग्री को उपयोगी संसाधन में परिवर्तित किया गया है। इस प्रक्रिया से प्राप्त आय का उपयोग वन समितियों द्वारा स्थानीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण, वन संवर्धन, सामुदायिक विकास तथा जन-जागरूकता संबंधी गतिविधियों में किया जाएगा। इससे वन संरक्षण के प्रयासों में जनभागीदारी को भी और अधिक मजबूती मिलेगी।

दक्षिण पन्ना वनमंडल की यह पहल जन-सहभागिता, स्वच्छता और वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह दर्शाती है कि सामूहिक प्रयासों एवं नवाचार आधारित कार्यप्रणाली के माध्यम से न केवल वन क्षेत्रों को स्वच्छ, सुरक्षित और प्लास्टिक मुक्त बनाया जा सकता है, बल्कि स्थानीय समुदायों को आर्थिक लाभ पहुंचाते हुए पर्यावरण संरक्षण, जलवायु संतुलन तथा वन्यजीव संवर्धन के लक्ष्यों को भी प्रभावी ढंग से प्राप्त किया जा सकता है।

 

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