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आखिरकार मिल गया न्याय

आखिरकार मिल गया न्याय

अक्सर सुना होगा सबने मामला आपस में सुलझा लो वरना कोर्ट कचहरी करते-करते बीत जाएगी जिंदगी! न्याय की उम्मीद में घीस जाएंगे जूते सच और झूठ की दलीलों में फस कर रह जाएंगी जिंदगी। सिर्फ सुना ही नहीं देखा भी होगा सबने न्याय के लिए भटकते लोगों को ज्यादा दूर नहीं जाइये अपने करीब ही देखिए किस तरह कानपुर में लड़की के साथ दुष्कर्म के बाद उसको 10वीं मंजिल से नीचे फेक दिया गया था। 

इस हादसे में घर की बेटी की तो  मौत हो गई जिसके बाद न्याय की आस में भटक रहा है पीड़ित परिवार एक ऐसी ही घटना सोनभद्र के विंढमगंज थाना क्षेत्र के एक गांव में हुई। जहां 10जनवरी 2013 को एक दलित युवती ने थाने में तहरीर देकर आरोप लगाया कि उसकी सात वर्षीय बेटी सुबर घर से खेलने के लिए निकली थी, लेकिन जब वो काफी देर बाद घर नहीं लौटी तो उसकी खोजबीन की गई जिसके दौरान पता चला कि हैंड पंप पर विंधमगंज थाना के हरपुरा गांव निवासी शहजाद उनकी बेटी से कुछ बात कर रहा था, जिसके महज़ थोड़ी देर बाद ही बेटी की नग्न लाश अरहर के खेत में मिली जिसे देखने पर लग रहा था कि उसके साथ दुष्कर्म करने के बाद उसी के कपड़े से गला दबाकर उसकी हत्या कर दी गई हो। 

बच्ची की मौत से परिजनों में मातम छा गया लेकिन फिर शुरु हुई न्याय की लड़ाई लगातार कोर्ट में लंबी लड़ाई लड़ने के बाद आखिरकार साढ़े आठ साल बाद मृतका और उसके परिजनों को मिल ही गया न्याय। इस मामले में अपर सत्र न्यायाधीश सोनभद्र पंकज श्रीवास्तव की अदालत ने सुनवाई करते हुए दोषी को शहजाद ने फांसी और दो लाख रुपए अर्थ दंड की सजा सुनाई है और अर्थ दंड नहीं देने पर आरोपी को एक साल की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। 


 


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