FCRA Bill 2026: FCRA बिल को लेकर सरकार का बड़ा फैसला, अब JPC करेगी मंथन

विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर हो रहे व्यापक विरोध के बीच केंद्र सरकार ने इस विधेयक को विस्तृत समीक्षा और मंथन के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने का निर्णय लिया है।

FCRA Bill 2026

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अगस्त 11, 2026

FCRA Bill 2026: केंद्र सरकार ने भारी विरोध और विपक्ष के दबाव के बीच विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) संशोधन विधेयक, 2026 को संसद की संयुक्त संसदीय समिति (JPC – Joint Parliamentary Committee) के पास भेजने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सूत्रों के अनुसार, राज्यसभा बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस (TMC) जैसी विपक्षी पार्टियों द्वारा विधेयक को पूरी तरह वापस लेने की मांग और राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है।

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राज्यों से लेकर पूर्वोत्तर तक FCRA बिल का व्यापक विरोध

विदेशी फंड से जुड़े इस नए विधेयक के प्रावधानों को लेकर विपक्षी दलों, सामाजिक संगठनों और मुख्य रूप से ईसाई समुदाय में गहरा असंतोष देखा जा रहा है।

तमिलनाडु विधानसभा में प्रस्ताव पास: तमिलनाडु विधानसभा ने इस विधेयक के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से इसे वापस लेने का आग्रह किया है। प्रस्ताव में कहा गया है कि इन बदलावों से अल्पसंख्यक समुदायों द्वारा संचालित शैक्षणिक, स्वास्थ्य और समाज कल्याण संस्थानों की स्वायत्तता प्रभावित होगी।

मिजोरम में सड़कों पर उतरे हजारों लोग: आइजोल में ‘काउंसिल ऑफ चर्चेज इन मिजोरम’ (CCM) के आह्वान पर हजारों लोगों ने विशाल रैली निकाली। इसमें प्रेस्बिटेरियन और बैपटिस्ट चर्च जैसे बड़े धार्मिक संगठन शामिल हुए।

नागालैंड सीएम की अमित शाह को चिट्ठी: नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर प्रस्तावित संशोधनों पर पुनर्विचार की अपील की। रियो ने कहा कि इससे चर्चों और धर्मार्थ संगठनों पर अत्यधिक प्रशासनिक बोझ पड़ेगा, जिससे स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाएं बाधित होंगी।

जानिए क्या हैं FCRA संशोधनों पर मुख्य विवाद

सरकार ने इस वर्ष 25 मार्च 2026 को इस बिल को लोकसभा में पेश किया था और जून 2026 में नए नियमों की अधिसूचना जारी की थी:

संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण: यदि किसी संगठन का FCRA लाइसेंस रद्द, निलंबित या समय पर रिन्यू नहीं होता है, तो उसकी संपत्ति ‘डिजिग्नेटेड अथॉरिटी’ (Designated Authority) के अधीन चली जाएगी।

धर्म-प्रचार पर रोक: नए नियमों में धार्मिक और चैरिटेबल गतिविधियों की अनुमति तो दी गई है, लेकिन विदेशी फंड का उपयोग धर्म-प्रचार में करने को FCRA पंजीकरण के मापदंडों से बाहर रखा गया है।

उत्तरदायित्व का विस्तार: नए प्रावधानों के तहत किसी गड़बड़ी की स्थिति में प्रत्यक्ष प्रबंधकों के साथ-साथ संस्था के निदेशकों और ट्रस्टियों को भी जवाबदेह बनाया गया है।

JPC में भेजे जाने के क्या हैं मायने?

संसद के मानसून सत्र में लगातार हो रहे हंगामे और विभिन्न हितधारकों के विरोध के चलते सरकार ने इस बिल को फिलहाल टालने और JPC को सौंपने का विचार किया है। संयुक्त संसदीय समिति (JPC) में लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों के सत्तापक्ष और विपक्ष के सदस्य शामिल होंगे।

यह समिति विधेयक के हर एक प्रावधान की गहन समीक्षा करेगी और विभिन्न हितधारकों तथा नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के सुझावों को सुनकर अपनी विस्तृत रिपोर्ट संसद में प्रस्तुत करेगी।

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