Faridabad Suicide Case : हरियाणा के फरीदाबाद जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। दयालपुर गांव में एक पिता ने न केवल अपने मासूम बेटे की जीवनलीला समाप्त कर दी, बल्कि खुद भी मौत को गले लगा लिया। इस दोहरी मौत की खबर फैलते ही पूरे इलाके में सन्नाटा पसर गया है। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर जांच शुरू कर दी है, लेकिन इस घटना ने समाज के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले और दुखद हैं।
मासूम को सीने से बांधकर लगा ली फांसी
पुलिस के अनुसार, यह घटना जितनी क्रूर है, उतनी ही विचलित करने वाली भी। 32 वर्षीय सागर ने अपने 6 साल के बेटे लक्षित की पहले गला घोंटकर हत्या की। इसके बाद उसने जो किया, उसने पुलिसकर्मियों के भी रोंगटे खड़े कर दिए। सागर ने अपने मृत बेटे के शव को एक कपड़े की मदद से अपने सीने से बांधा और फिर खुद भी फांसी के फंदे पर झूल गया। जब पड़ोसियों ने घर में संदिग्ध हलचल देखी और पुलिस को सूचित किया, तब इस खौफनाक मंजर का खुलासा हुआ।
नशे की लत और आर्थिक तंगी ने उजाड़ा घर
सागर की इस आत्मघाती कदम के पीछे की कहानी बेहद दर्दनाक है। बताया जा रहा है कि सागर लंबे समय से आर्थिक तंगी और भारी कर्ज से जूझ रहा था। उसे शराब पीने और जुआ खेलने की बुरी लत लग चुकी थी, जिसके कारण घर में अक्सर विवाद होता था। आर्थिक तंगी और पति की आदतों से परेशान होकर उसकी पत्नी अपने 6 साल के बेटे लक्षित को लेकर पास के ही एक दूसरे गांव में अपने मायके रहने चली गई थी। सागर घर में बिल्कुल अकेला रह गया था और इसी अकेलेपन ने उसके भीतर नकारात्मकता भर दी थी।
साजिश के तहत बेटे को लाया था साथ
घटना वाली रात सागर पास के गांव में अपनी ससुराल गया और बहाने से अपने बेटे लक्षित को साथ ले आया। उसे लगा होगा कि शायद बेटे के साथ रहने से उसका मन बहल जाए, लेकिन अवसाद और नशे की लत ने उसे अपराध की ओर धकेल दिया। रात के सन्नाटे में उसने पहले अपने जिगर के टुकड़े की जान ली और फिर खुद भी सुसाइड कर लिया। पुलिस का मानना है कि उसने यह सब योजनाबद्ध तरीके से किया क्योंकि वह अपनी परिस्थितियों से पूरी तरह टूट चुका था।
जांच में जुटी पुलिस और सामाजिक सरोकार
फरीदाबाद पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और परिजनों को सूचना दे दी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे हर पहलू से मामले की तफ्तीश कर रहे हैं। हालांकि, इस घटना ने एक बार फिर मानसिक स्वास्थ्य और नशे के दुष्प्रभावों पर बहस छेड़ दी है। जीवन की परेशानियों से भागकर मौत का रास्ता चुनना किसी समस्या का समाधान नहीं है। प्रकृति द्वारा दिया गया यह जीवन अनमोल है, जिसे नफरत या हताशा की भेंट नहीं चढ़ाया जाना चाहिए। समाज को ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें समय पर मदद पहुँचानी होगी ताकि दयालपुर जैसी वारदातों की पुनरावृत्ति न हो।
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