Ethiopia Eritrea war 2026: इथोपिया और इरिट्रिया के बीच युद्ध का खतरा, अफ्रीका में छिड़ सकता है नया महासंग्राम

हॉर्न ऑफ अफ्रीका में शांति समझौता टूटने की कगार पर है। इथियोपियाई प्रधानमंत्री अबिय अहमद ने इरिट्रिया पर अपनी संप्रभुता के उल्लंघन का आरोप लगाया है, वहीं इरिट्रिया ने युद्ध की तैयारी तेज कर दी है। सीमाओं पर टैंकों और मिसाइलों की तैनाती के बीच, क्या यह विवाद अफ्रीका को तबाह कर देगा?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 18, 2026

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Ethiopia Eritrea war 2026: दुनिया अभी रूस-यूक्रेन और मध्य पूर्व के विनाशकारी संघर्षों की आग से पूरी तरह उबर भी नहीं पाई थी कि अब अफ्रीकी महाद्वीप से युद्ध की एक और डरावनी तस्वीर सामने आ रही है। अफ्रीकी देश इथोपिया और उसके पड़ोसी मुल्क इरिट्रिया के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। ताजा खुफिया रिपोर्टों और जमीनी हालात के अनुसार, इथोपिया ने इरिट्रिया के साथ युद्ध की पूरी तैयारी कर ली है। सीमावर्ती इलाकों में इथोपियाई सैनिकों की भारी लामबंदी और सैन्य साजो-सामान की हलचल ने पूरे क्षेत्र में अस्थिरता और तबाही का खौफ पैदा कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि हॉर्न ऑफ अफ्रीका में यह नई सैन्य हलचल वैश्विक शांति के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकती है।

तनाव की जड़: आंतरिक विद्रोह और हथियारों की सप्लाई

इथोपिया की इस आक्रामक सैन्य लामबंदी के पीछे सबसे बड़ा कारण उसकी आंतरिक सुरक्षा और पड़ोसी देश का हस्तक्षेप बताया जा रहा है। इथोपिया की सरकार ने आधिकारिक तौर पर इरिट्रिया पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इथोपिया का दावा है कि इरिट्रिया उसके देश के बागियों, विशेष रूप से ‘तिग्ने विद्रोहियों’ (Tigray Rebels) को आधुनिक हथियारों और रसद की सप्लाई कर रहा है। सरकार का तर्क है कि इन विद्रोहियों को इरिट्रिया की सेना से मिल रही निरंतर मदद के कारण ही इथोपिया के भीतर हिंसा और अराजकता का माहौल बना हुआ है। अब इथोपिया ने मन बना लिया है कि वह अपनी पश्चिमी सीमा पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित करने और इरिट्रिया को ‘सबक सिखाने’ के लिए सैन्य बल का प्रयोग करेगा।

रक्त रंजित इतिहास और गृहयुद्ध का कड़वा सच

इथोपिया और इरिट्रिया के बीच का इतिहास संघर्षों और लाशों से भरा रहा है। गौरतलब है कि इरिट्रिया कभी इथोपिया का ही हिस्सा था, जो 1993 में एक लंबी लड़ाई के बाद स्वतंत्र देश बना। इसके महज पांच साल बाद, 1998 में दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को लेकर एक भीषण युद्ध छिड़ा जो दो सालों तक चला। उस खूनी संघर्ष में करीब 1 लाख लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। हालिया इतिहास भी कुछ कम दर्दनाक नहीं है; 2020 से 2022 के बीच इथोपिया के गृहयुद्ध में इरिट्रिया समर्थित लड़ाकों ने भारी तबाही मचाई थी, जिसमें अनुमानित 6 लाख लोगों की मौत हुई थी। हालांकि बीच में युद्धविराम हुआ, लेकिन शांति की वह कोशिश अब पूरी तरह विफल नजर आ रही है।

राजनयिकों की चिंता और वैश्विक समुदाय की खामोशी

जैसे-जैसे सीमा पर टैंकों और सैनिकों की संख्या बढ़ रही है, अंतरराष्ट्रीय राजनयिकों की धड़कनें तेज हो गई हैं। समाचार एजेंसी एएफपी (AFP) के अनुसार, पश्चिमी देशों के दूतावास इस स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए हैं। एक वरिष्ठ राजनयिक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस बार घेराबंदी बहुत बड़ी है; एक तरफ इथोपिया की संगठित नियमित सेना है, तो दूसरी तरफ इरिट्रिया द्वारा प्रशिक्षित और हथियारों से लैस तिग्ने लड़ाके मुस्तैद हैं। जानकारों का मानना है कि यह स्थिति किसी भी क्षण एक पूर्ण युद्ध में तब्दील हो सकती है, क्योंकि दोनों पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

धार्मिक और सांस्कृतिक समीकरणों के बीच फंसी शांति

सांस्कृतिक और जनसांख्यिकीय दृष्टिकोण से देखें तो इथोपिया और इरिट्रिया दोनों ही ईसाई बहुल राष्ट्र हैं, जहाँ मुस्लिम समुदाय एक अल्पसंख्यक आबादी के रूप में रहता है। सांस्कृतिक समानताओं के बावजूद, राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं और क्षेत्रीय वर्चस्व की जंग ने इन देशों को विनाश के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या संयुक्त राष्ट्र और अफ्रीकी संघ जैसे संगठन इस संभावित नरसंहार को रोकने के लिए समय रहते हस्तक्षेप करेंगे, या फिर अफ्रीका का यह हिस्सा एक बार फिर बारूद के ढेर में तब्दील हो जाएगा।

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