Ethanol Petrol: पेट्रोल में इथेनॉल कितना खतरनाक? जानिए पूरी रिपोर्ट

पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है। सरकार इसे पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद बता रही है, जबकि वाहन मालिक माइलेज और इंजन नुकसान को लेकर चिंतित हैं। आखिर E20 ईंधन कितना सुरक्षित है और क्या यह आपकी गाड़ी को नुकसान पहुंचा सकता है, जानिए पूरी रिपोर्ट।

पेट्रोल में इथेनॉल कितना खतरनाक?

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

जुलाई 3, 2026

Ethanol Petrol: देश में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के हालिया बयान के बाद वाहन मालिकों के बीच कई सवाल उठने लगे हैं। मंत्री ने कहा कि E20 पेट्रोल के उपयोग से माइलेज में हल्की कमी आ सकती है, लेकिन इससे विदेशी मुद्रा की बचत, किसानों को लाभ और पर्यावरण संरक्षण जैसे बड़े फायदे भी मिलते हैं। हालांकि, इस बयान के बाद सोशल मीडिया और ऑटोमोबाइल से जुड़े मंचों पर लोगों ने इंजन की सुरक्षा, माइलेज और बीमा कवरेज को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त करनी शुरू कर दीं।

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क्या है E20 पेट्रोल?

E20 ऐसा ईंधन है जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल मिलाया जाता है। इथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। सरकार का लक्ष्य देशभर में E20 ईंधन को व्यापक रूप से लागू करना है ताकि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हो और पर्यावरण को होने वाले नुकसान में भी कमी आए। सरकार का मानना है कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से विदेशी मुद्रा की बचत होगी, किसानों की आय बढ़ेगी और कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिलेगी।

माइलेज पर कितना असर पड़ सकता है?

E20 पेट्रोल को लेकर सबसे बड़ी चिंता माइलेज को लेकर है। विशेषज्ञों के अनुसार इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता सामान्य पेट्रोल की तुलना में कम होती है। ऐसे में वाहन समान दूरी तय करने के लिए अधिक ईंधन की खपत कर सकता है। कई अध्ययनों में बताया गया है कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने पर माइलेज में कुछ प्रतिशत तक कमी आ सकती है। हालांकि यह अंतर वाहन के मॉडल, इंजन तकनीक और ड्राइविंग स्टाइल पर भी निर्भर करता है।

क्या इंजन को हो सकता है नुकसान?

पुरानी गाड़ियों के मालिकों की सबसे बड़ी चिंता इंजन और फ्यूल सिस्टम की सुरक्षा को लेकर है। विशेषज्ञों के अनुसार इथेनॉल में नमी को आकर्षित करने की क्षमता होती है। लंबे समय तक ईंधन टैंक में रहने पर यह पानी के साथ मिलकर कुछ परिस्थितियों में जंग और फ्यूल सिस्टम से जुड़ी समस्याएं पैदा कर सकता है। इसके अलावा पुरानी गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाले कुछ रबर और प्लास्टिक के पार्ट्स इथेनॉल के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं। यदि वाहन E20 के अनुरूप तैयार नहीं है तो समय के साथ फ्यूल लाइन, सील और अन्य हिस्सों में खराबी आने की आशंका बढ़ सकती है।

क्या बीमा इंजन की ऐसी खराबी को कवर करता है?

वाहन बीमा को लेकर भी लोगों के मन में कई सवाल हैं। सामान्य मोटर इंश्योरेंस पॉलिसियां सड़क दुर्घटना, चोरी और प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कवर करती हैं। वहीं सामान्य मैकेनिकल खराबी या धीरे-धीरे होने वाले इंजन डैमेज को अधिकांश स्टैंडर्ड पॉलिसियों में शामिल नहीं किया जाता। ऐसे में यदि किसी वाहन में ईंधन से जुड़ी तकनीकी समस्या उत्पन्न होती है, तो उसका बीमा दावा संबंधित पॉलिसी की शर्तों पर निर्भर करेगा। वाहन मालिकों को अपनी इंश्योरेंस पॉलिसी की शर्तों को ध्यान से पढ़ना चाहिए।

नई गाड़ियों के लिए क्या है स्थिति?

ऑटोमोबाइल कंपनियों का कहना है कि नई पीढ़ी की अधिकांश BS6 स्टेज-2 और E20-रेडी गाड़ियां इस ईंधन को ध्यान में रखकर तैयार की गई हैं। इनमें ऐसे मैटेरियल और तकनीक का इस्तेमाल किया गया है जो इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के साथ बेहतर तरीके से काम कर सकें। इसलिए नई गाड़ियों के मालिकों को आमतौर पर E20 पेट्रोल को लेकर अधिक चिंता करने की आवश्यकता नहीं होती, जबकि पुरानी गाड़ियों के लिए निर्माता की सलाह का पालन करना जरूरी है।

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वाहन मालिक क्या सावधानी बरतें?

यदि आपकी गाड़ी E20 के लिए उपयुक्त है तो समय-समय पर सर्विसिंग कराना, फ्यूल सिस्टम की जांच करवाना और निर्माता द्वारा सुझाए गए रखरखाव के नियमों का पालन करना फायदेमंद रहेगा। वहीं पुरानी गाड़ियों के मालिकों को वाहन निर्माता या अधिकृत सर्विस सेंटर से यह जानकारी लेनी चाहिए कि उनका वाहन E20 ईंधन के लिए उपयुक्त है या नहीं।