छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में हाथियों का उत्पात, 14 किसानों की फसलें बर्बाद

रायगढ़. धरमजयगढ़ वनमंडल में हाथियों के दल ने 14 किसानों की धान की खड़ी फसल रौंद दी. वन विभाग के मुताबिक जिले में इस समय 85 हाथी मौजूद हैं. फसल पकने के मौसम में किसान रात-रात भर खेतों की रखवाली कर रहे हैं. हाथी रात में गांवों की ओर आते हैं और खेतों में घुस जाते हैं. किसान सुबह पहुंचते हैं तो पूरे साल की मेहनत जमीन पर बिखरी मिलती है. गांव में मुनादी होती है, पर खेत और घर, दोनों के पास हाथियों का आना डर पैदा करता है. वन विभाग के जून से अगस्त के आंकड़ों में धरमजयगढ़

Wrriten By :

Editor

Published On :

अक्टूबर 20, 2026

Advertisements
728x90-Kanya-Sumangla-Mission-Shakti-Digital

रायगढ़.

धरमजयगढ़ वनमंडल में हाथियों के दल ने 14 किसानों की धान की खड़ी फसल रौंद दी. वन विभाग के मुताबिक जिले में इस समय 85 हाथी मौजूद हैं. फसल पकने के मौसम में किसान रात-रात भर खेतों की रखवाली कर रहे हैं.

हाथी रात में गांवों की ओर आते हैं और खेतों में घुस जाते हैं. किसान सुबह पहुंचते हैं तो पूरे साल की मेहनत जमीन पर बिखरी मिलती है. गांव में मुनादी होती है, पर खेत और घर, दोनों के पास हाथियों का आना डर पैदा करता है. वन विभाग के जून से अगस्त के आंकड़ों में धरमजयगढ़ वनमंडल में 332 फसल हानि केस दर्ज हुए. इन पर 32.82 लाख रुपए बांटे गए, यानी औसतन करीब 9,900 रुपए प्रति केस. वन्यजीव प्रेमी और किसानों की हमेशा मांग रही है कि मुआवजा असली नुकसान के बराबर हो और  मौत पर 10 लाख रुपए मिले. यह मुद्दा हाईकोर्ट तक भी पहुंचा था.

जुलाई में धरमजयगढ़ वनमंडल के कापू और छाल क्षेत्र में हाथियों के हमलों में दो लोगों की जान गई. राज्य में पांच साल में 330 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. मृतक परिवारों को तत्काल 25,000 रुपए दिए जाते हैं, बाकी 5.75 लाख रुपए कागजी कार्रवाई के बाद मिलते हैं. लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि मुआवजे से उनका भय खत्म नहीं हो रहा.