SIR voter List Revision : CEC के कामकाज पर सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग का जवाब, याचिका और आरोपों का किया विरोध

CEC के कामकाज को लेकर उठे सवालों पर चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा है। आयोग ने याचिका का विरोध करते हुए SIR, फॉर्म-6 और मतदाता सुनवाई पर सफाई दी। हलफनामे में फाइलों की मंजूरी और अधिकारियों के अधिकारों को लेकर क्या कहा गया? जानिए पूरी खबर।

SIR voter List Revision

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अक्टूबर 26, 2026

Advertisements
728x90-Pension-Mission-Shakti-Digital

SIR voter List Revision :  मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के कामकाज को चुनौती देने वाली याचिका पर भारतीय चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया है। आयोग ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह पूरी तरह एक समाचार रिपोर्ट पर आधारित है। आयोग ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने या उनके कामकाज पर रोक लगाने की मांग पर भी आपत्ति जताई है। दाखिल हलफनामे में आयोग ने अपनी कार्यप्रणाली और निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें रखी हैं।

तीनों सदस्यों की सहमति से दाखिल किया गया हलफनामा

चुनाव आयोग के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामा तीनों सदस्यों की सहमति से प्रस्तुत किया गया है। आयोग ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) से जुड़े सभी आदेश सर्वसम्मति से पारित किए गए थे। हलफनामे में यह भी स्पष्ट किया गया कि किसी फाइल पर मुख्य चुनाव आयुक्त या चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज टिप्पणी अथवा सुझाव को अपने आप आयोग का अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता।

फाइलों पर मंजूरी की प्रक्रिया का किया उल्लेख

आयोग ने अपने जवाब में बताया कि सामान्य प्रक्रिया के तहत फाइल पहले एक चुनाव आयुक्त, फिर दूसरे चुनाव आयुक्त और उसके बाद मुख्य चुनाव आयुक्त के पास जाती है। कुछ मामलों में समय की कमी होने पर इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से मंजूरी ली जाती है और बाद में उसे संबंधित फाइल पर दर्ज किया जाता है। आयोग ने कहा कि यदि कोई अधिकारी अपने निर्धारित अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर आदेश जारी करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

28 जुलाई के आदेश और चुनाव आयुक्तों की आपत्ति का जिक्र

हलफनामे के मुताबिक, कामकाज के बंटवारे से संबंधित 28 जुलाई का आदेश प्रतिनियुक्ति पर आए एक अतिरिक्त सचिव ने जारी किया था। इसके अगले दिन दोनों चुनाव आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा। आयोग ने बताया कि 30 जुलाई को दोनों चुनाव आयुक्तों के संयुक्त निर्देश के बाद यह आदेश लागू नहीं हुआ। इस घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए आयोग ने अपने प्रशासनिक फैसलों और अधिकारों से जुड़ी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की।

728x90-Pension-Mission-Shakti-Digital

फॉर्म-6 और SIR घोषणा पत्र को अलग बताया

चुनाव आयोग ने कहा कि फॉर्म-6 में कोई संशोधन नहीं किया गया है और उसमें बदलाव करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। आयोग के अनुसार, एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं से लिया जाने वाला घोषणा पत्र फॉर्म-6 से अलग दस्तावेज है। हलफनामे में बताया गया कि ऑनलाइन उपलब्ध फॉर्म देखकर यह भ्रम हो सकता था कि फॉर्म-6 में बदलाव किया गया है। इसी वजह से 21 अक्टूबर से ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में भी फॉर्म-6 और घोषणा पत्र को अलग-अलग कर दिया गया, ताकि कागजी आवेदन की तरह दोनों दस्तावेजों की पहचान स्पष्ट रहे।

मतदाताओं के दस्तावेज और सुनवाई को लेकर स्पष्टीकरण

आयोग ने कहा कि जिन मतदाताओं के नाम पुराने रिकॉर्ड से नहीं जुड़ पाए हैं, उन्हें हर मामले में सुनवाई के लिए बुलाना जरूरी नहीं है। बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) ऐसे मतदाताओं के घर जाकर आवश्यक दस्तावेज जुटाएंगे। सुनवाई विशेष परिस्थितियों में होगी और जहां संभव होगा, उसे ऑनलाइन आयोजित किया जाएगा। आयोग के मुताबिक, किसी मतदाता का नाम जोड़ने या हटाने का निर्णय निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) के आदेश के बिना नहीं किया जा सकता।

विशेषज्ञ समिति और विस्तृत जवाब के लिए समय की मांग

हलफनामे में यह भी बताया गया कि नियमों के अनुपालन की जांच के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) के विशेषज्ञों वाली समिति बनाई गई है। आयोग ने दावा किया कि किसी आंतरिक नोट या फाइल को मीडिया में जारी नहीं किया गया और न ही उसे जारी करने की अनुमति दी गई। साथ ही, आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि यह उसका संक्षिप्त जवाब है और विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय दिया जाए।

Read More :  औरंगाबाद में कृषि कॉलेज बनाने की तैयारी तेज, जमीन सत्यापन अंतिम चरण में; छात्रों को मिलेगा बड़ा फायदा