Bengal Election: CEC ज्ञानेश कुमार से भिड़े यूपी के IAS अधिकारी, तुरंत हुई कार्रवाई, सीनियर ऑब्जर्वर पद से हटाए गए

पश्चिम बंगाल चुनाव के बीच निर्वाचन आयोग की एक बैठक में बड़ा विवाद हो गया। कूच बिहार दक्षिण के पर्यवेक्षक अनुराग यादव और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बीच तीखी बहस हुई। कार्य में लापरवाही और मतदान केंद्रों की सही जानकारी न होने के कारण आयोग ने यादव को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया है।

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अप्रैल 9, 2026

Bengal Election: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मुहाने पर खड़े कोलकाता में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब निर्वाचन आयोग की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक रणक्षेत्र में तब्दील हो गई। चुनाव की तैयारियों का जायजा लेने के दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और उत्तर प्रदेश कैडर के एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के बीच सीधी भिड़ंत हो गई। इस अनुशासनहीनता और कार्य में लापरवाही को देखते हुए आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है।

CEC और पर्यवेक्षक के बीच तीखी नोकझोंक

चुनावों की तैयारियों को लेकर आयोजित एक ऑनलाइन समीक्षा बैठक उस समय विवादों में घिर गई, जब कूच बिहार दक्षिण के सामान्य पर्यवेक्षक अनुराग यादव और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बीच सीधा टकराव हो गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, सीईसी द्वारा की गई कुछ टिप्पणियों पर अनुराग यादव ने कड़ा ऐतराज जताया। माहौल तब और बिगड़ गया जब ज्ञानेश कुमार ने अधिकारी को ‘घर वापस जाने’ के लिए कह दिया। 25 साल की सेवा का हवाला देते हुए अनुराग यादव ने पलटवार किया और कहा कि उनके साथ इस तरह का बर्ताव स्वीकार्य नहीं है। इस अभूतपूर्व विरोध और तल्ख बहस के कारण मीटिंग में कुछ देर के लिए सन्नाटा पसर गया।

सीनियर ऑब्जर्वर पर क्यों गिरी गाज?

अनुराग यादव, जो उत्तर प्रदेश सरकार में प्रमुख सचिव रैंक के अधिकारी हैं, उन्हें इस बहस के कुछ ही समय बाद पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी से बर्खास्त कर दिया गया। हालांकि, आयोग के सूत्रों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल बहस के कारण नहीं की गई है। चुनाव आयोग के अनुसार, इस कठोर कदम के पीछे पेशेवर अक्षमता और कर्तव्यों में लापरवाही मुख्य कारण है। आयोग का मानना है कि चुनाव जैसे संवेदनशील समय में किसी भी अधिकारी की ओर से अनुशासनहीनता और काम के प्रति ढिलाई को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।

क्यों उठे अधिकारी की कार्यप्रणाली पर सवाल?

विवाद की असली जड़ उस समय शुरू हुई जब बैठक के दौरान अनुराग यादव से उनके आवंटित निर्वाचन क्षेत्र में मतदान केंद्रों (Polling Stations) की कुल संख्या पूछी गई। हैरानी की बात यह रही कि कई दिनों तक ग्राउंड पर रहने के बावजूद वह इस बुनियादी जानकारी का सही जवाब नहीं दे सके। चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एक पर्यवेक्षक ‘आयोग की आंख और कान’ होता है। यदि कोई सीनियर अधिकारी अपने क्षेत्र के बूथों और चुनावी आंकड़ों की पुष्टि नहीं कर पाता, तो यह पूरी निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।

बंगाल में चुनाव की तारीखें और प्रशासनिक चुनौतियां

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि, पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को होने वाले मतदान और 4 मई को आने वाले परिणामों के मद्देनजर आयोग अपनी तैयारियों में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता। इस कार्रवाई के जरिए निर्वाचन सदन ने सभी चुनावी अधिकारियों और एडमिनिस्ट्रेटिव ऑब्जर्वर्स को स्पष्ट संदेश दिया है कि जमीनी हकीकत से अनभिज्ञता और अनुशासनहीनता की स्थिति में सख्त एक्शन लिया जाएगा। फिलहाल, कूच बिहार दक्षिण के लिए नए पर्यवेक्षक की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है ताकि चुनाव कार्य में कोई बाधा न आए।

दिल्ली से बंगाल तक राजनीतिक हलचल

इस घटना ने न केवल प्रशासनिक गलियारों में बल्कि राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज कर दी है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त को सीधे चुनौती देने और फिर पद से हटाए जाने का मामला अब चर्चा का विषय बना हुआ है। जहां एक ओर इसे ‘आत्मसम्मान की लड़ाई’ के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर चुनाव आयोग इसे चुनावी पारदर्शिता और दक्षता से जोड़कर देख रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि उत्तर प्रदेश सरकार अपने इस वरिष्ठ अधिकारी पर क्या रुख अपनाती है।