Form-7 Rules : मतदाता सूची से नाम हटाना अब आसान नहीं? चुनाव आयोग ने तय की आवेदन सीमा

मतदाता सूची में नाम हटाने की आपत्तियों को लेकर चुनाव आयोग ने नए नियम तय किए हैं। अब एक मतदाता पूरी दावे-आपत्ति अवधि में अधिकतम 10 फॉर्म-7 और नियमित अपडेट के दौरान महीने में पांच आवेदन दे सकेगा। जानिए सत्यापन, सुनवाई और झूठी शिकायतों पर कार्रवाई से जुड़े अहम प्रावधान।

Form-7 Rules

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अक्टूबर 10, 2026

Form-7 Rules : मतदाता सूची में नाम हटाने या किसी नाम को शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने के लिए चुनाव आयोग ने नया निर्देश जारी किया है। 9 अक्टूबर 2026 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को भेजे गए पत्र के मुताबिक, एक मतदाता पूरी दावे-आपत्ति अवधि में अधिकतम 10 फॉर्म-7 आवेदन दे सकेगा। यह सीमा ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों माध्यमों से किए जाने वाले आवेदनों पर लागू होगी।

नियमित अपडेट के दौरान हर महीने पांच आवेदन

चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के लगातार अपडेट की प्रक्रिया के लिए भी सीमा निर्धारित की है। इस दौरान कोई व्यक्ति एक महीने में अधिकतम पांच फॉर्म-7 आवेदन दाखिल कर सकेगा। आयोग का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य बिना पर्याप्त आधार के बड़ी संख्या में आपत्तियां दर्ज कराने की प्रवृत्ति पर रोक लगाना और चुनाव अधिकारियों के काम को व्यवस्थित करना है।

Form-7 Rules
Form-7 Rules

क्या है फॉर्म-7 और इसका इस्तेमाल?

फॉर्म-7 का उपयोग मतदाता सूची में किसी नाम को शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराने या किसी मतदाता का नाम हटाने की मांग करने के लिए किया जाता है। आयोग के निर्देश के अनुसार, आवेदन करने वाले व्यक्ति का नाम संबंधित निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में पहले से दर्ज होना चाहिए। इस फॉर्म के जरिए उठाई गई आपत्ति की जांच निर्धारित प्रक्रिया के तहत की जाती है।

ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदनों के लिए स्पष्ट नियम

आयोग के मुताबिक, ऑनलाइन माध्यम से एक बार में दाखिल किए जाने वाले आवेदनों की संख्या पहले से सीमित थी, लेकिन कागजी फॉर्म जमा करने की संख्या पर स्पष्ट सीमा नहीं थी। बड़ी संख्या में आपत्तियां मिलने से चुनाव अधिकारियों और संबंधित मतदाताओं को परेशानी हो रही थी। अब ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों माध्यमों के लिए अधिकतम संख्या तय कर दी गई है।

राजनीतिक दलों के बूथ एजेंटों के लिए अलग प्रावधान

विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के दौरान मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों के लिए अलग व्यवस्था है। उपलब्ध निर्देशों के अनुसार, मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित होने से पहले वे बूथ लेवल ऑफिसर को प्रतिदिन अधिकतम 50 फॉर्म दे सकते हैं। मसौदा सूची जारी होने के बाद यह संख्या प्रतिदिन 10 फॉर्म निर्धारित है।

फॉर्म में सही जानकारी और मूल हस्ताक्षर अनिवार्य

निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को यह सुनिश्चित करना होगा कि फॉर्म-7 में आवश्यक विवरण भरे गए हों और आवेदक ने निर्धारित स्थान पर अपने मूल हस्ताक्षर किए हों। हस्ताक्षर की मुहर को मूल हस्ताक्षर का विकल्प नहीं माना जाएगा। अधिकारियों को मतदाता सूची में उपलब्ध विवरण के आधार पर आवेदक की पहचान और आवेदन की प्रामाणिकता भी जांचनी होगी।

पांच से अधिक आपत्तियों पर व्यक्तिगत सत्यापन

निर्देशों में कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति पांच से अधिक मामलों में आपत्ति दर्ज कराता है, तो निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को व्यक्तिगत सत्यापन करना होगा। बड़ी संख्या में सामूहिक रूप से या डाक के जरिए भेजे गए दावों और आपत्तियों की भी निर्धारित नियमों के अनुसार जांच की जाएगी।

सुनवाई का मौका और झूठी शिकायत पर कार्रवाई

यदि किसी आपत्ति का निपटारा शुरुआती स्तर पर नहीं होता, तो संबंधित अधिकारी को आवेदक को नोटिस देकर उसकी सुनवाई करनी होगी। जिस मतदाता के नाम पर आपत्ति दर्ज हुई है, उसे भी आदेश पारित करने से पहले अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। शिकायत झूठी या जानबूझकर गलत जानकारी पर आधारित पाए जाने पर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत कार्रवाई हो सकती है।

राज्यों को निर्देशों का प्रचार करने को कहा

चुनाव आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों से निर्देशों को ईआरओ, एईआरओ और जमीनी स्तर के अन्य चुनाव अधिकारियों तक पहुंचाने को कहा है। नए प्रावधानों का उद्देश्य वास्तविक आपत्तियों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना और मतदाता सूची की प्रक्रिया में अनावश्यक बाधाओं को कम करना है।

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