ED Action on Jaypee Group: रियल एस्टेट सेक्टर की दिग्गज कंपनी जेपी ग्रुप (Jaypee Group) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के मामले में एक बड़ा कदम उठाते हुए समूह की लगभग 400 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (Attach) कर लिया है। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत की गई है।
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किन संपत्तियों पर हुई कार्रवाई?

ईडी के दिल्ली जोनल ऑफिस द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, कुर्क की गई संपत्तियां मुख्य रूप से जयप्रकाश सेवा संस्थान (JSS) और पेज 3 बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ी हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड (JIL) और जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) ने ‘जेपी विस्टाउन’ और ‘जेपी ग्रीन्स’ जैसी हाउसिंग परियोजनाओं के नाम पर फंड का बड़े पैमाने पर डायवर्जन किया है।
धोखाधड़ी का मामला
ईडी की इस जांच की नींव दिल्ली और उत्तर प्रदेश पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दर्ज की गई कई एफआईआर (FIR) पर टिकी है। घर खरीदारों की शिकायतों के बाद जेपी ग्रुप के प्रमोटरों और निदेशकों, विशेष रूप से मनोज गौर, पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और विश्वासघात के गंभीर आरोप लगे।
आरोपों का मुख्य बिंदु
खरीदारों से फ्लैट निर्माण के नाम पर भारी भरकम राशि वसूली गई। उस पैसे को प्रोजेक्ट पूरा करने के बजाय ग्रुप की अन्य सहायक कंपनियों में डायवर्ट कर दिया गया। इसके परिणामस्वरूप हजारों प्रोजेक्ट्स अधूरे रह गए और मध्यम वर्गीय परिवारों की जीवन भर की कमाई फंस गई।
जांच में चौंकाने वाले खुलासे

ईडी की गहन जांच में यह सामने आया कि जयप्रकाश एसोसिएट्स और जेपी इंफ्राटेक ने 25,000 से अधिक घर खरीदारों से लगभग 14,599 करोड़ रुपये एकत्र किए थे। नियमों को ताक पर रखकर इस फंड का एक बड़ा हिस्सा निर्माण कार्य के बजाय जेपी हेल्थकेयर लिमिटेड, जेपी स्पोर्ट्स इंटरनेशनल और जेपी सेवा संस्थान जैसी कंपनियों को ट्रांसफर कर दिया गया।
जांच में यह भी पाया गया कि मनोज गौर, जो जेपी सेवा संस्थान के मैनेजिंग ट्रस्टी हैं, इस फंड डायवर्जन के मुख्य लाभार्थी थे। इसके अलावा, संपत्तियों को ‘पेज 3 बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड’ जैसी बाहरी कंपनियों को ट्रांसफर करने के भी प्रमाण मिले हैं, जिस पर हनी कटियाल का नियंत्रण बताया जा रहा है।
छापेमारी और दस्तावेजी सबूत
इससे पहले 23 मई, 2025 को ईडी ने दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और मुंबई सहित 15 ठिकानों पर सघन छापेमारी की थी। इस दौरान भारी मात्रा में डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय दस्तावेज जब्त किए गए थे, जिन्होंने मनी लॉन्ड्रिंग के इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया। वर्तमान कार्रवाई उसी जांच का अगला चरण है, जिससे जेपी ग्रुप के प्रमोटरों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
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