ED Raid in Bengal: बंगाल चुनाव के बीच ईडी का बड़ा एक्शन, अवैध कॉल सेंटर मामले में छापेमारी

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बिगुल बजते ही प्रवर्तन निदेशालय ने एक साथ 10 ठिकानों पर धावा बोल दिया है। अवैध कॉल सेंटर के जरिए विदेशी नागरिकों और आम लोगों को ठगने वाले गिरोह के खिलाफ यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। क्या इन ठिकानों से मिला पैसा चुनाव में इस्तेमाल होना था?

ED Raid in Bengal

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 16, 2026

ED Raid in Bengal: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों की तारीखों के आधिकारिक ऐलान के साथ ही राज्य का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। एक तरफ राजनीतिक दल अपनी बिसात बिछाने में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ केंद्रीय जांच एजेंसियां भी पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रही हैं। सोमवार सुबह प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में एक साथ बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। यह छापेमारी अवैध कॉल सेंटरों के माध्यम से किए जा रहे वित्तीय घोटालों और मनी लॉन्ड्रिंग के संदेह में की गई है। अधिकारियों का मानना है कि इन ठिकानों से महत्वपूर्ण साक्ष्य हाथ लग सकते हैं जो बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश करेंगे।

चार जिलों के 10 ठिकानों पर ईडी का कड़ा पहरा

जांच से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों ने पुष्टि की है कि ईडी की टीमों ने सोमवार तड़के पश्चिम बंगाल के चार प्रमुख जिलों में कम से कम 10 स्थानों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस सर्च ऑपरेशन के केंद्र में सिलीगुड़ी, हावड़ा, बिधाननगर और दुर्गापुर जैसे शहर रहे। प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी भारी सुरक्षा बलों के साथ संदिग्धों के ठिकानों पर पहुंचे और गहन तलाशी शुरू की। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत की जा रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य अवैध रूप से जुटाए गए धन के स्रोतों और उसके उपयोग का पता लगाना है।

अवैध कॉल सेंटर नेटवर्क और वित्तीय अनियमितताएं

ईडी की यह जांच एक संगठित कॉल सेंटर नेटवर्क से जुड़ी है, जिस पर संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और धोखाधड़ी वाली गतिविधियों के आरोप हैं। जांच एजेंसी को इन सेंटरों के माध्यम से करोड़ों रुपये की हेराफेरी और संदिग्ध निवेश की जानकारी मिली थी। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इन अवैध कॉल सेंटरों का सीधा संबंध किसी राजनीतिक दल की फंडिंग या चुनाव में मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए किए जाने वाले प्रलोभनों से है या नहीं। एजेंसी के अधिकारी फिलहाल डेटा और दस्तावेजों के विश्लेषण में जुटे हैं ताकि धन के वास्तविक प्रवाह को समझा जा सके।

संदेह के घेरे में कई बड़े नाम और डिजिटल साक्ष्य

सूत्रों के अनुसार, जिन लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की गई है, उनमें सम्राट घोष, सुभाजीत चक्रवर्ती और सुराश्री कर जैसे नाम शामिल हैं। इन व्यक्तियों पर कॉल सेंटर सिंडिकेट के साथ मिलकर साजिश रचने और वित्तीय धांधली करने का संदेह है। जांच के दौरान अधिकारियों ने बड़ी मात्रा में डिजिटल उपकरण, लैपटॉप, मोबाइल फोन और महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं। इन उपकरणों की फॉरेंसिक जांच से इस पूरे नेटवर्क के पीछे छिपे असली मास्टरमाइंड और उनके अंतरराष्ट्रीय संपर्कों का खुलासा होने की संभावना जताई जा रही है।

बंगाल में दो चरणों में मतदान और चुनावी गणित

गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने रविवार को ही पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों की घोषणा की है। बंगाल में लोकतंत्र का यह पर्व दो चरणों में आयोजित किया जाएगा, जिसके लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल की तारीखें तय की गई हैं। मतों की गिनती 4 मई को होगी। ऐसे संवेदनशील समय में ईडी की यह बड़ी कार्रवाई राज्य में चर्चा का विषय बनी हुई है। विपक्षी दल जहां इसे राजनीतिक दबाव के तौर पर देख रहे हैं, वहीं जांच एजेंसी इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ एक नियमित कानूनी प्रक्रिया बता रही है।

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