Dussehra 2026: दशहरे पर कब करें पूजा? नोट करें शुभ मुहूर्त और संपूर्ण विधि

सनातन धर्म में विजयादशमी यानी दशहरा का पर्व विशेष महत्व रखता है, जो हर साल आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन दोपहर के समय पूजा करने की परंपरा है।

Dussehra 2026

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अक्टूबर 19, 2026

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Dussehra 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को विजयदशमी या दशहरा का पावन पर्व अत्यंत उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह पर्व अधर्म पर धर्म की, असत्य पर सत्य की और बुरााई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी शुभ दिन पर भगवान श्री राम ने लंकापति रावण का वध किया था तथा मां दुर्गा ने महिषासुर का संहार किया था। दशहरा के दिन अपराह्न (दोपहर) के समय शमी पूजा, अपराजिता पूजा, सीमा उल्लंघन और आयुध पूजा (शस्त्र पूजन) करने की प्राचीन परंपरा है।

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दशहरे पर कब करें पूजा?

विशेष रूप से ध्यान देने योग्य बात यह है कि दशहरा का यह पवित्र दिन वर्ष के उन साढ़े तीन ‘अबूझ मुहूर्तों’ में शामिल है, जब किसी भी नए कार्य की शुरुआत, गृह प्रवेश, व्यापार आरंभ या अन्य मांगलिक अनुष्ठान बिना किसी पंचांग या शुभ मुहूर्त को विचारे संपन्न किए जा सकते हैं। इस दिन दोपहर के समय विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के पश्चात शाम के वक्त बुराई के प्रतीक रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया जाता है।

दशहरा पूजा के शुभ मुहूर्त

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दशहरे पर कब करें पूजा?

पंचांगीय गणना के अनुसार, इस वर्ष दशहरा पर्व के लिए पूजा और अनुष्ठान के विशेष मुहूर्त इस प्रकार हैं:

विजय मुहूर्त: दोपहर 01:59 बजे से दोपहर 02:45 बजे तक

अपराह्न पूजा का समय: दोपहर 01:14 बजे से दोपहर 03:30 बजे तक

दशमी तिथि का आरंभ: 20 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:50 बजे

दशमी तिथि की समाप्ति: 21 अक्टूबर 2026 को दोपहर 02:11 बजे

श्रवण नक्षत्र का आरंभ: 19 अक्टूबर 2026 को दोपहर 03:38 बजे

श्रवण नक्षत्र की समाप्ति: 20 अक्टूबर 2026 को शाम 06:02 बजे

प्रमुख शहरों के अनुसार विजय और अपराह्न पूजा का समय

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दशहरे पर कब करें पूजा?

देश के विभिन्न महानगरों और प्रमुख शहरों में दशहरा पूजा के लिए निर्धारित समय सारणी इस प्रकार है:

नई दिल्ली: विजय मुहूर्त – 01:59 PM से 02:45 PM | अपराह्न पूजा – 01:14 PM से 03:30 PM

लखनऊ: विजय मुहूर्त – 01:45 PM से 02:31 PM | अपराह्न पूजा – 12:59 PM से 03:16 PM

नोएडा: विजय मुहूर्त – 01:59 PM से 02:44 PM | अपराह्न पूजा – 01:14 PM से 03:30 PM

गुरुग्राम: विजय मुहूर्त – 02:00 PM से 02:46 PM | अपराह्न पूजा – 01:15 PM से 03:31 PM

पटना: विजय मुहूर्त – 01:29 PM से 02:14 PM | अपराह्न पूजा – 12:43 PM से 03:00 PM

जयपुर: विजय मुहूर्त – 02:06 PM से 02:51 PM | अपराह्न पूजा – 01:20 PM से 03:37 PM

मुंबई: विजय मुहूर्त – 02:19 PM से 03:06 PM | अपराह्न पूजा – 01:33 PM से 03:53 PM

कोलकाता: विजय मुहूर्त – 01:17 PM से 02:03 PM | अपराह्न पूजा – 12:30 PM से 02:49 PM

चंडीगढ़: विजय मुहूर्त – 02:00 PM से 02:46 PM | अपराह्न पूजा – 01:15 PM से 03:31 PM

दशहरा और अपराजिता पूजा की सरल विधि

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दशहरे पर कब करें पूजा?

दशहरा के दिन घर या मंदिर में पूजा-अर्चना करने के लिए सबसे पहले भगवान श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण जी और संकटमोचन हनुमान जी की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद मां दुर्गा का भी विधिपूर्वक ध्यान करें। देवी-देवताओं को रोली, चंदन, अक्षत (चावल), ताजे पुष्प और नैवेद्य अर्पित करें। इसके बाद हवन और आरती संपन्न करें तथा उपस्थित जनों में प्रसाद वितरित करें।

दशहरा के दिन विशेष रूप से अपराजिता पूजा की जाती है, जिसके लिए साफ स्थान पर चंदन के लेप से अष्टदल चक्र बनाया जाता है। परिवार की सुख-समृद्धि और विजय प्राप्ति का संकल्प लेते हुए, अष्टदल के मध्य में ‘अपराजिताय नमः’ मंत्र से देवी अपराजिता का, दाईं ओर ‘क्रियाशक्त्यै नमः’ से मां जया का और बाईं ओर ‘उमायै नमः’ मंत्र से मां विजया का आह्वान किया जाता है। अंत में पूरी श्रद्धा से पूजन करने के बाद ‘हारेण तु विचित्रेण भास्वत्कनकमेखला। अपराजिता भद्ररता करोतु विजयं मम।’ मंत्र का उच्चारण करते हुए पूजा का विसर्जन करें और शाम को पारंपरिक रूप से रावण दहन का उत्सव मनाएं।

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