MP में ड्रोन का तेजी से विकास, मगर लोगों की दिलचस्पी नहीं; भारत की वैश्विक हिस्सेदारी सिर्फ 2%

भोपाल  मध्यप्रदेश को 'ड्रोन हब' बनाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने 'एमपी ड्रोन संवर्धन एवं उपयोग नीति-2025' लागू कर भारी-भरकम सब्सिडी के द्वार तो खोल दिए हैं, लेकिन जमीन पर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। केन्द्र सरकार की एक रिपोर्ट के अनुसार देश के शीर्ष राज्यों के मुकाबले मध्यप्रदेश में ड्रोन रजिस्ट्रेशन की रफ्तार बेहद सुस्त है। जहां महाराष्ट्र 8,210 ड्रोन के साथ देश में टॉप पर है, वहीं मध्यप्रदेश में यह संख्या महज 480 पर सिमटी हुई है। नीति में 'बम्पर ऑफर', पर रुझान कम राज्य सरकार ने अपनी नई पॉलिसी में

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Published On :

फ़रवरी 13, 2026

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भोपाल 

मध्यप्रदेश को 'ड्रोन हब' बनाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने 'एमपी ड्रोन संवर्धन एवं उपयोग नीति-2025' लागू कर भारी-भरकम सब्सिडी के द्वार तो खोल दिए हैं, लेकिन जमीन पर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।

केन्द्र सरकार की एक रिपोर्ट के अनुसार देश के शीर्ष राज्यों के मुकाबले मध्यप्रदेश में ड्रोन रजिस्ट्रेशन की रफ्तार बेहद सुस्त है। जहां महाराष्ट्र 8,210 ड्रोन के साथ देश में टॉप पर है, वहीं मध्यप्रदेश में यह संख्या महज 480 पर सिमटी हुई है।

नीति में 'बम्पर ऑफर', पर रुझान कम

राज्य सरकार ने अपनी नई पॉलिसी में निवेशकों के लिए रेड कार्पेट बिछाया है। नीति के तहत ड्रोन निर्माण के लिए 40% तक की कैपिटल सब्सिडी (अधिकतम 30 करोड़ रुपए तक) और रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) के लिए 2 करोड़ रुपए तक के अनुदान का प्रावधान किया गया है। इसके बावजूद, पंजीकरण के मामले में मध्यप्रदेश देशभर में 13वें स्थान पर पिछड़ गया है। यहां तक कि हरियाणा (2,179) और आंध्र प्रदेश (1,876) जैसे राज्य भी हमसे कहीं आगे निकल चुके हैं।

महाराष्ट्र और तमिलनाडु से कोसों पीछे हम

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में कुल 38,475 ड्रोन रजिस्टर्ड हैं। इसमें मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी 2% भी नहीं है।

महाराष्ट्र: 8,210 (नंबर 1)

तमिलनाडु: 5,878 (नंबर 2)

तेलंगाना: 3,657 (नंबर 3)

मध्य प्रदेश: 480 (नंबर 13)

किसानों और युवाओं के लिए बड़े वादे, पर रजिस्ट्रेशन का 'पेच'

सरकार का दावा है कि ड्रोन नीति से कृषि क्षेत्र में क्रांति आएगी और 8,000 नए रोजगार पैदा होंगे। 'नमो ड्रोन दीदी' और 'सीखो-कमाओ योजना' के जरिए ट्रेनिंग भी दी जा रही है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया और रिमोट पायलट लाइसेंस को लेकर जागरूकता की कमी के कारण लोग आधिकारिक पंजीकरण (UIN) कराने से कतरा रहे हैं।

ड्रोन पॉलिसी 2025 की 3 बड़ी बातें:

भारी सब्सिडी: नए निवेश पर 40% सब्सिडी और लीज रेंट पर 25% की छूट।

पेटेंट में मदद: घरेलू पेटेंट के लिए 5 लाख और अंतरराष्ट्रीय पेटेंट के लिए 10 लाख रुपए तक की सहायता।

ट्रेनिंग इंसेंटिव: ड्रोन ट्रेनिंग लेने वाले युवाओं को 8,000 रुपए प्रति माह का स्टाइपेंड।

वजन के आधार पर होता है ड्रोन का रजिस्ट्रेशन

'ड्रोन नियम 2021' के तहत भारत में ड्रोन का वर्गीकरण और पंजीकरण उनके वजन (Weight) के आधार पर किया जाता है। क्या अन्य प्रकार के ड्रोन भी रजिस्टर्ड होते हैं? इसके संबंध में जानकारी नीचे दी गई है:

सैन्य ड्रोन (Military Drones): ड्रोन नियम 2021 स्पष्ट रूप से उन ड्रोन पर लागू नहीं होते जो भारत की नौसेना, थल सेना या वायु सेना के स्वामित्व में हैं या उनके द्वारा उपयोग किए जाते हैं। इनके लिए सैन्य प्रोटोकॉल के तहत अलग व्यवस्था होती है।

शोध और विकास (R&D): अनुसंधान, विकास और परीक्षण के उद्देश्य से उपयोग किए जाने वाले ड्रोन को 'टाइप सर्टिफिकेट', 'विशिष्ट पहचान संख्या' (UIN) और 'रिमोट पायलट लाइसेंस' की आवश्यकता से छूट दी गई है, बशर्ते वे निर्धारित ग्रीन जोन में संचालित हों।

प्रतिबंधित वस्तुएं: ड्रोन नियमों के तहत हथियारों, गोला-बारूद या किसी भी प्रकार के खतरनाक सामान की ढुलाई पर पूरी तरह प्रतिबंध है।

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