आरक्षण पर दोगलापन? योगी के मंत्री संजय निषाद का UGC पर हमला

लखनऊ यूपी की योगी सरकार में मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद ने UGC (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) से जुड़े विरोध प्रदर्शन पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि देश में कोई भी कानून अचानक नहीं आ जाता है। इसके पीछे एक लंबी और संवैधानिक प्रक्रिया होती है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि जनरल कैटेगरी को 10 प्रतिशत आरक्षण मिला तब विरोध नहीं हुआ। मंत्री संजय निषाद ने कहा कि किसी भी कानून के निर्माण से पहले संबंधित आयोगों का गठन किया जाता है, उनकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार होती है और विशेषज्ञों की

Wrriten By :

Editor

Published On :

जनवरी 27, 2026

Advertisements
728x90 Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital.jpg

लखनऊ
यूपी की योगी सरकार में मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद ने UGC (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) से जुड़े विरोध प्रदर्शन पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि देश में कोई भी कानून अचानक नहीं आ जाता है। इसके पीछे एक लंबी और संवैधानिक प्रक्रिया होती है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि जनरल कैटेगरी को 10 प्रतिशत आरक्षण मिला तब विरोध नहीं हुआ।

मंत्री संजय निषाद ने कहा कि किसी भी कानून के निर्माण से पहले संबंधित आयोगों का गठन किया जाता है, उनकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार होती है और विशेषज्ञों की राय ली जाती है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों और संवैधानिक प्रावधानों का भी पूरा ध्यान रखा जाता है।

UGC को लेकर हो रहे विरोध पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री ने कहा कि हर फैसले का उद्देश्य समाज के व्यापक हित को ध्यान में रखकर किया जाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब आयोग की रिपोर्ट के आधार पर जनरल कैटेगरी के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला लिया गया था, तब देश में इसका व्यापक विरोध नहीं हुआ। उस समय भी संवैधानिक प्रक्रिया के तहत निर्णय लिया गया था, जिसे सभी ने स्वीकार किया।

संजय निषाद ने कहा कि सरकार की मंशा किसी वर्ग के साथ अन्याय करने की नहीं होती, बल्कि सभी को समान अवसर देने की होती है। उन्होंने अपील की कि किसी भी मुद्दे पर विरोध करने से पहले तथ्यों और प्रक्रिया को समझना जरूरी है। मंत्री ने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति का अधिकार सभी को है, लेकिन संवाद और संवैधानिक मर्यादाओं के दायरे में रहकर ही अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार द्वारा लिए गए फैसले देश के शिक्षा तंत्र और समाज के भविष्य को मजबूत करने की दिशा में होंगे।

 

Leave a Comment

2