Donald Trump Tariff Claim: डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा, टैरिफ से अमेरिका कमाएगा 600 अरब डॉलर

ट्रंप का 'टैरिफ धमाका': क्या 600 अरब डॉलर से अमेरिका बनेगा दुनिया का सबसे अमीर देश? राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दुनिया भर के देशों पर लगाए गए भारी टैरिफ का बचाव करते हुए दावा किया है कि अमेरिका को इससे 600 अरब डॉलर से अधिक की आय होने वाली है। जबकि कोर्ट में इस पर कानूनी जंग जारी है, ट्रंप का यह आत्मविश्वास क्या चीन और भारत जैसे देशों की मुश्किलें और बढ़ा देगा?

Donald Trump Tariff

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 6, 2026

 Donald Trump Tariff Claim:  संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को धार देते हुए एक बड़ा दावा किया है। ट्रंप के अनुसार, उनकी सरकार द्वारा विदेशी वस्तुओं पर लगाए गए नए टैरिफ (आयात शुल्क) के माध्यम से अमेरिका को 600 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की भारी-भरकम कमाई होने वाली है। उन्होंने विश्वास जताया है कि आने वाले समय में यह राजस्व का आंकड़ा और भी तेजी से बढ़ेगा। ट्रंप का मानना है कि यह नीति न केवल देश के खजाने को भरेगी, बल्कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था की नींव को भी अभूतपूर्व मजबूती प्रदान करेगी।

Donald Trump Tariff Claim:  आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर मजबूती

अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर किए गए एक पोस्ट में राष्ट्रपति ट्रंप ने तर्क दिया कि इन टैरिफों के लागू होने से अमेरिका आज आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा, दोनों ही मोर्चों पर पहले से कहीं अधिक सशक्त स्थिति में है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विदेशी उत्पादों पर निर्भरता कम करने और घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए यह कदम अनिवार्य था। ट्रंप के मुताबिक, इन कठोर व्यापारिक निर्णयों की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका का दबदबा और सम्मान बढ़ा है, जिससे अन्य देश अब अमेरिका के साथ व्यापारिक शर्तों पर अधिक गंभीरता से बातचीत कर रहे हैं।

Donald Trump Tariff Claim:  मीडिया और न्यायपालिका पर ट्रंप का प्रहार

हमेशा की तरह ट्रंप ने मुख्यधारा की मीडिया को ‘फेक न्यूज’ करार देते हुए उन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि मीडिया इस ऐतिहासिक राजस्व की सच्चाई को जनता के सामने लाने से कतरा रहा है क्योंकि वे देश के हितों के खिलाफ हैं। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि मीडिया और कुछ विरोधी समूह अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट में चल रहे टैरिफ संबंधी कानूनी मामलों में हस्तक्षेप करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने इस अदालती फैसले को अमेरिकी इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में से एक बताया और उम्मीद जताई कि न्यायपालिका राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखेगी।

दूसरे कार्यकाल की शुरुआत और वैश्विक टैरिफ युद्ध

अपने दूसरे कार्यकाल की शपथ लेने के कुछ ही महीनों के भीतर, राष्ट्रपति ट्रंप ने दुनिया के तमाम देशों से आने वाले आयात पर नई और भारी टैरिफ पॉलिसी लागू कर दी थी। उनका मुख्य तर्क यह रहा है कि पिछले कई दशकों से दुनिया के विभिन्न देश अमेरिका के साथ “अनुचित व्यापारिक व्यवहार” (Unfair Trade Practices) कर रहे हैं। ट्रंप का कहना है कि जहां विदेशी कंपनियां अमेरिका में कम शुल्क पर माल बेचती हैं, वहीं कई देश अमेरिकी उत्पादों पर अत्यधिक शुल्क वसूलते हैं। इस असंतुलन को खत्म करने के लिए उन्होंने ‘जैसे को तैसा’ की नीति अपनाई है।

भारत पर 50% टैरिफ का बोझ और रूस का एंगल

इस नई नीति की तपिश भारत तक भी पहुँची है। ट्रंप प्रशासन ने भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक का भारी टैरिफ लगा दिया है। इसमें एक बड़ा हिस्सा रूस से रियायती दरों पर कच्चे तेल की खरीद से जुड़ा है। अमेरिका ने भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने पर नाराजगी जताते हुए 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क भी थोप दिया है। हालांकि, कूटनीतिक स्तर पर भारत ने इन कदमों पर अपनी चिंता जताई है, लेकिन ट्रंप प्रशासन फिलहाल अपने रुख पर अडिग नजर आ रहा है।

कड़े टैरिफ के बावजूद भारत की मजबूत जीडीपी ग्रोथ

अमेरिका द्वारा लगाए गए इन प्रतिबंधात्मक शुल्कों के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सुखद संदेश सामने आया है। हाल ही में जारी जीडीपी (GDP) विकास दर के आंकड़े यह स्पष्ट करते हैं कि भारत की आर्थिक तरक्की की रफ्तार पर इन बाहरी झटकों का कोई खास नकारात्मक असर नहीं पड़ा है। भारतीय बाजार की आंतरिक मजबूती और घरेलू मांग ने अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को काफी हद तक बेअसर कर दिया है। विशेषज्ञ इसे भारत की आर्थिक परिपक्वता के रूप में देख रहे हैं, जो वैश्विक व्यापारिक अनिश्चितताओं के बीच भी अपनी गति बनाए रखने में सक्षम है।

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