Diwali Crackers Ban: पटाखों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, न पूरी रोक न 24 घंटे की छूट

दिवाली से पहले पटाखों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। कोर्ट ने संकेत दिया कि न तो पूर्ण प्रतिबंध होगा और न ही 24 घंटे आतिशबाजी की अनुमति मिलेगी। पटाखों के प्रकार और इस्तेमाल के समय पर CPCB की रिपोर्ट के बाद स्थिति स्पष्ट होगी। अब सबकी नजर अगले आदेश पर है।

Diwali Crackers Ban

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

सितम्बर 30, 2026

Diwali Crackers Ban : दिवाली से पहले पटाखों के इस्तेमाल और प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। अदालत ने संकेत दिया कि वह इस मामले में ऐसा संतुलित रास्ता निकालना चाहती है, जिसमें पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य के साथ धार्मिक एवं सांस्कृतिक भावनाओं का भी ध्यान रखा जा सके। कोर्ट ने कहा कि पूरे देश में पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने से कुछ लोगों की भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं।

पूरे देश में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध के पक्ष में नहीं कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह देशभर में पटाखों पर पूरी तरह रोक लगाने के पक्ष में नहीं है। हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि लोगों को 24 घंटे पटाखे चलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। लगातार पटाखे जलने से होने वाला शोर और वायु प्रदूषण बुजुर्गों, बच्चों तथा बीमार लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। ऐसे में इस्तेमाल को नियंत्रित करना जरूरी माना जा रहा है।

पटाखे चलाने के लिए तय किया जा सकता है समय

अदालत ने संकेत दिया कि पटाखे जलाने के लिए निश्चित समय निर्धारित किया जा सकता है। इसके अलावा यह भी तय किया जाएगा कि किस प्रकार के पटाखों को इस्तेमाल करने की अनुमति होगी। इस तरह कोर्ट का संभावित दृष्टिकोण पूर्ण प्रतिबंध और बिना किसी नियंत्रण के इस्तेमाल के बीच संतुलन बनाने पर केंद्रित दिखाई दे रहा है। अंतिम नियम अगली सुनवाई में सामने आने की उम्मीद है।

बेरियम और पटाखों के शोर की होगी जांच

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी CPCB और केंद्र सरकार को पटाखों से जुड़े तकनीकी पहलुओं की संयुक्त जांच करने को कहा है। इसमें खास तौर पर पटाखों में इस्तेमाल होने वाले बेरियम और उनके शोर के स्तर यानी डेसिबल की जांच शामिल है। इन परीक्षणों के आधार पर यह समझने में मदद मिल सकती है कि किन पटाखों से स्वास्थ्य और पर्यावरण पर अपेक्षाकृत कम असर पड़ता है।

15 अक्टूबर को फिर होगी मामले की सुनवाई

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 15 अक्टूबर की तारीख तय की है। अब अदालत के सामने संबंधित एजेंसियों की जांच और रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी। इसके बाद पटाखों के इस्तेमाल, समय और अनुमत प्रकार को लेकर आगे की दिशा स्पष्ट हो सकती है। दिवाली नजदीक होने के कारण दिल्ली-एनसीआर समेत देश के कई हिस्सों में लोगों की नजर इस सुनवाई पर बनी हुई है।

दिवाली के आसपास प्रदूषण क्यों बनता है बड़ा मुद्दा

दिवाली के समय पटाखों से होने वाला वायु और ध्वनि प्रदूषण हर साल चर्चा का विषय बनता है। खासतौर पर दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों के दौरान हवा की गुणवत्ता पहले से प्रभावित रहती है। ऐसे में दिवाली पर आतिशबाजी होने के बाद प्रदूषण का स्तर और बढ़ने की आशंका रहती है। इसी वजह से पटाखों के इस्तेमाल को लेकर नियम और प्रतिबंधों पर अदालतों में लगातार सुनवाई होती रही है।

ग्रीन क्रैकर्स को लेकर पहले भी बने हैं नियम

पिछले वर्षों में पटाखों के इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए ग्रीन क्रैकर्स और निर्धारित समय जैसी व्यवस्थाओं पर जोर दिया गया है। वर्ष 2025 में भी ग्रीन क्रैकर्स की सीमित बिक्री और इस्तेमाल की अनुमति से जुड़े नियम लागू किए गए थे। मौजूदा मामले में भी अदालत के सामने स्वास्थ्य, पर्यावरण, धार्मिक परंपराओं और पटाखा उद्योग से जुड़े लोगों की आजीविका के बीच संतुलन का सवाल है।

2024 में प्रतिबंध के बावजूद आतिशबाजी पर उठे सवाल

वर्ष 2024 में भी दिल्ली में पटाखों पर प्रतिबंध के बावजूद आतिशबाजी होने का मामला सामने आया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से जवाब मांगा था कि प्रतिबंध लागू होने के बावजूद बड़े स्तर पर आतिशबाजी कैसे हुई। अदालत ने इस मामले में पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए थे और दिल्ली पुलिस कमिश्नर को नोटिस जारी किया था। अब 15 अक्टूबर की सुनवाई में पटाखों को लेकर आगे की व्यवस्था स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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