बिजली संकट से परेशान ग्रामीण सड़क पर उतरे, सीहोर में विरोध प्रदर्शन से यातायात प्रभावित

अमलाहा. बीते 15 दिनों से लगातार रात्रि में की जा रही बिजली कटौती से परेशान ग्रामीणों का गुस्सा आखिरकार सड़क पर फूट पड़ा। बड़ी संख्या में ग्रामीणजन अमलाहा डीसी पहुंचे, जहां उन्होंने चक्का जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि रात में बार-बार बिजली काटे जाने से आमजन, किसान और व्यापारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विद्युत विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी ग्रामीणों ने विद्युत विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा और तत्काल रात्रिकालीन बिजली कटौती बंद करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी

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Published On :

मई 24, 2026

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अमलाहा.

बीते 15 दिनों से लगातार रात्रि में की जा रही बिजली कटौती से परेशान ग्रामीणों का गुस्सा आखिरकार सड़क पर फूट पड़ा। बड़ी संख्या में ग्रामीणजन अमलाहा डीसी पहुंचे, जहां उन्होंने चक्का जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि रात में बार-बार बिजली काटे जाने से आमजन, किसान और व्यापारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

विद्युत विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी
ग्रामीणों ने विद्युत विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा और तत्काल रात्रिकालीन बिजली कटौती बंद करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि आगामी 72 घंटे के भीतर व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो समस्त ग्रामवासी उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

समाजसेवी एम.एस. मेवाड़ा के नेतृत्व में नई और पुरानी चंदेरी के ग्रामीणों ने यह अनोखा प्रदर्शन किया। हाथों में मशालें थामे लोगों ने बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और पटाखे फोड़कर अपना विरोध जताया। ग्रामीणों का कहना है कि भीषण गर्मी के बीच रात में 2 से 3 घंटे तक लगातार दो से तीन बार बिजली काटी जा रही है। पेयजल संकट और मच्छरों का बढ़ा प्रकोप रात के समय बिजली गुल रहने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा पैदा हो गया है। इसके अलावा, बिजली के अभाव में पानी की मोटरें नहीं चल पा रही हैं। इस कारण गांवों में पेयजल का गहरा संकट उत्पन्न हो गया है, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

शहरों को 24 घंटे बिजली, गांवों में अंधेरा प्रदर्शन कर रहे किसानों ने आरोप लगाया कि प्रशासन शहरों को 24 घंटे बिजली देकर 'वीआईपी ट्रीटमेंट' दे रहा है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों को अंधेरे में रखा जा रहा है। ग्रामीणों की मांग है कि यदि प्रदेश में बिजली का कोई बड़ा संकट है, तो सरकार को औद्योगिक क्षेत्रों और फैक्ट्रियों की बिजली काटनी चाहिए। बिजली संकट का खामियाजा गरीब किसानों और ग्रामीणों को नहीं भुगतना चाहिए। सीएम से हस्तक्षेप की मांग, आंदोलन की चेतावनी ग्रामीणों ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री से इस मामले में सीधे हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि रात्रिकालीन बिजली कटौती तुरंत बंद करने के सख्त निर्देश जारी किए जाएं। यदि बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में उग्र आंदोलन और चक्काजाम किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

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