8वें वेतन आयोग में सालाना इंक्रीमेंट दोगुना होने की चर्चा, कर्मचारियों की सैलरी पर क्या होगा असर?

नई दिल्ली केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी को लेकर 8वें वेतन आयोग से कई बड़ी उम्मीदें हैं। कोई बेसिक सैलरी बढ़ाने की मांग कर रहा है, तो कोई महंगाई के हिसाब से सालाना इंक्रीमेंट बढ़ाने की। इसी बीच हर साल मिलने वाले इंक्रीमेंट को 3% से बढ़ाकर 6% करने की मांग भी चर्चा में है। अगर ये मांग मान ली जाती है, तो लंबे समय तक नौकरी करने वाले कर्मचारियों की सैलरी और रिटायरमेंट फंड पर इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है। आइए समझते हैं पूरा हिसाब… 8वें वेतन आयोग को लेकर क्या चल रहा है? 8वें केंद्रीय वेतन

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Published On :

अक्टूबर 23, 2026

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नई दिल्ली

केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी को लेकर 8वें वेतन आयोग से कई बड़ी उम्मीदें हैं। कोई बेसिक सैलरी बढ़ाने की मांग कर रहा है, तो कोई महंगाई के हिसाब से सालाना इंक्रीमेंट बढ़ाने की। इसी बीच हर साल मिलने वाले इंक्रीमेंट को 3% से बढ़ाकर 6% करने की मांग भी चर्चा में है। अगर ये मांग मान ली जाती है, तो लंबे समय तक नौकरी करने वाले कर्मचारियों की सैलरी और रिटायरमेंट फंड पर इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है। आइए समझते हैं पूरा हिसाब…

8वें वेतन आयोग को लेकर क्या चल रहा है?
8वें केंद्रीय वेतन आयोग की प्रक्रिया अभी जारी है। आयोग 22 और 23 अक्टूबर 2026 को मुंबई में केंद्रीय कर्मचारियों के संगठनों, यूनियनों और दूसरे संबंधित पक्षों से बातचीत कर रहा है। इससे पहले आयोग ने अक्टूबर में बेंगलुरु में भी बैठक की थी। इन बैठकों का मकसद कर्मचारियों की मांगों और सुझावों को समझना है। कर्मचारी संगठनों ने वेतन, भत्तों, पेंशन और सालाना इंक्रीमेंट जैसे मुद्दों पर अपनी मांगें रखी हैं।

हर साल 3% से 6% इंक्रीमेंट की मांग क्यों?
अभी 7वें वेतन आयोग के तहत सामान्य सालाना इंक्रीमेंट की दर 3% है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि महंगाई और रोजमर्रा के खर्चों को देखते हुए इस दर को बढ़ाने पर विचार होना चाहिए। NC-JCM के स्टाफ साइड ने 6% सालाना इंक्रीमेंट की मांग रखी है। भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ (BPMS) ने भी इस दर को बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। इन संगठनों का तर्क है कि इससे कर्मचारियों की कमाई में समय के साथ बेहतर बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, 6% इंक्रीमेंट की मांग मानी जाएगी या नहीं, यह आयोग की सिफारिशों और सरकार के फैसले पर निर्भर करेगा।

3% और 6% इंक्रीमेंट में कितना होगा अंतर?
मान लीजिए किसी केंद्रीय कर्मचारी की मौजूदा बेसिक सैलरी ₹50,000 है। अगर हर साल बेसिक सैलरी में 3% की जगह 6% की बढ़ोतरी हो, तो करीब 20 साल की नौकरी में बड़ा अंतर देखने को मिल सकता है।

नौकरी का समयसालाना 3% इंक्रीमेंटसालाना 6% इंक्रीमेंट
शुरुआत में₹50,000₹50,000
5 साल बादकरीब ₹57,964करीब ₹66,911
10 साल बादकरीब ₹67,196करीब ₹89,542
15 साल बादकरीब ₹77,898करीब ₹1,19,828
20 साल बादकरीब ₹90,306करीब ₹1,60,357

कितना अंतर बनता है? 

इसमें 20 साल बाद दोनों स्थितियों के बीच बेसिक सैलरी का अंतर करीब ₹70,051 महीना बनता है। ये अंतर इसलिए बढ़ता है, क्योंकि हर साल होने वाली बढ़ोतरी आगे की बढ़ोतरी के लिए भी आधार बनती है। यानी एक साल का इंक्रीमेंट सिर्फ उसी साल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आगे के सालों की बेसिक सैलरी पर भी असर डाल सकता है। इस बात का ध्यान रखें कि ये गणित 6% इंक्रीमेंट की मांग को मंजूर मानकर नहीं बनाया गया है। यह सिर्फ 3% और 6% की लगातार सालाना बढ़ोतरी के बीच संभावित अंतर समझाने के लिए है। सरकारी वेतन मैट्रिक्स में वास्तविक सैलरी की गणना अलग नियमों के अनुसार हो सकती है। 

बेसिक सैलरी बढ़ने से दूसरे फायदे भी बदल सकते हैं?

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महंगाई भत्ता (DA): DA की गणना बेसिक पे के प्रतिशत के आधार पर होती है। अगर बेसिक पे बढ़ता है और DA की लागू दर समान रहती है, तो DA की रकम भी बढ़ सकती है।

मकान किराया भत्ता (HRA): HRA की रकम लागू नियमों और शहर की कैटेगरी के आधार पर तय होती है। अगर HRA बेसिक पे के प्रतिशत के हिसाब से मिलता है, तो बेसिक बढ़ने पर इसकी रकम भी बढ़ सकती है।

पेंशन और ग्रेच्युटी: रिटायरमेंट से जुड़े कुछ लाभ अंतिम सैलरी और सर्विस से जुड़े नियमों पर निर्भर करते हैं। इसलिए बेसिक पे में बदलाव का असर इन पर भी पड़ सकता है।

लीव एनकैशमेंट: बची हुई छुट्टियों के बदले मिलने वाली रकम पर भी लागू सेवा नियमों और सैलरी के जुड़े हिस्सों का असर पड़ सकता है। 

8वें वेतन आयोग से बेसिक सैलरी पर क्या उम्मीदें हैं?

सालाना इंक्रीमेंट के अलावा कर्मचारी संगठनों ने न्यूनतम बेसिक सैलरी और फिटमेंट फैक्टर में बदलाव की मांग भी रखी है। NC-JCM के स्टाफ साइड ने न्यूनतम बेसिक पे ₹69,000 और 3.833 फिटमेंट फैक्टर का प्रस्ताव दिया है। वहीं BPMS ने न्यूनतम बेसिक पे ₹72,000 और 4 फिटमेंट फैक्टर की मांग की है। आयोग इन सुझावों और दूसरे मुद्दों पर विचार करने के बाद अपनी सिफारिशें देगा। इसके बाद सरकार तय करेगी कि किन सिफारिशों को स्वीकार करना है और उन्हें किस तरह लागू करना है। 

कब तक आ सकता है 8वें वेतन आयोग का फैसला?

8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को हुआ था। आयोग को गठन की तारीख से 18 महीने के भीतर अपनी सिफारिशें देनी हैं। इस हिसाब से रिपोर्ट की समय-सीमा मई 2027 के आसपास बनती है। इसके बाद सरकार इस पर फैसला करेगी और लागू करने पर विचार कर सकती है।