
Uttarakhand News: उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले सीएम धामी ने शिक्षा को लेकर राज्य में कई बड़े कदम उठाए हैं। अग्निवीर समेत पुलिस भर्ती में भर्ती बढ़ाने को लेकर भी बात कही है। इसी बीच शिक्षा को लेकर उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की असली पहचान उसकी डिग्री, नौकरी के पैकेज या पद से नहीं, बल्कि उसके संस्कार और व्यवहार से बनती है। उन्होंने युवाओं से शिक्षा के साथ विनम्रता, सम्मान और सीखने की भावना बनाए रखने की अपील की।
मुख्यमंत्री गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को देहरादून स्थित यूपीईएस के 24वें दीक्षा समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान कीं और जीवन में सफलता हासिल करने के लिए निरंतर सीखते रहने का संदेश दिया।
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डिग्री मिलने के बाद शुरू होती है जिंदगी की असली परीक्षा
मुख्यमंत्री धामी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय से डिग्री हासिल करना जीवन का अंतिम पड़ाव नहीं है। इसके बाद वास्तविक जीवन की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। नौकरी, कार्यक्षेत्र और सामाजिक जीवन में युवाओं को कई तरह की परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता और असफलता दोनों मिलती हैं, लेकिन असफलता को निराशा का कारण बनाने के बजाय उससे सीखने की कोशिश करनी चाहिए। उनके मुताबिक, अनुभव व्यक्ति को बेहतर निर्णय लेने और आगे बढ़ने की क्षमता प्रदान करते हैं।
विनम्रता और संस्कारों को बताया सफलता का आधार

सीएम धामी ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना या अच्छी नौकरी पाना नहीं होना चाहिए। शिक्षा व्यक्ति के विचारों, व्यवहार और व्यक्तित्व को भी बेहतर बनाती है। उनके अनुसार, ज्ञान के साथ विनम्रता विकसित होना जरूरी है, क्योंकि विनम्रता दूसरों के प्रति सम्मान का भाव पैदा करती है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति की सामाजिक पहचान उसके आचरण और संस्कारों से बनती है। इसलिए विद्यार्थियों को अपनी उपलब्धियों पर गर्व करने के साथ दूसरों के अनुभवों और विचारों का सम्मान भी करना चाहिए।
जीवनभर विद्यार्थी बने रहने की दी सीख

मुख्यमंत्री ने युवाओं को सलाह दी कि सीखने की प्रक्रिया कभी बंद नहीं करनी चाहिए। कोई भी व्यक्ति पूरी तरह परिपूर्ण नहीं होता और हर दिन कुछ नया सीखने का अवसर देता है। उन्होंने कहा कि बदलते समय में ज्ञान और कौशल को लगातार बेहतर बनाना जरूरी है। युवाओं को अपने अनुभवों से सीखने के साथ समाज और आसपास के लोगों से भी सकारात्मक बातें ग्रहण करनी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को सफलता मिलने पर विनम्र बने रहने और कठिन परिस्थितियों में धैर्य के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
विकसित भारत के लक्ष्य में युवाओं की अहम भूमिका
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि इस लक्ष्य को पूरा करने में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने कहा कि देश के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को अपनी शिक्षा, कौशल और क्षमताओं का उपयोग राष्ट्र निर्माण में करना चाहिए। युवाओं की मेहनत, नवाचार और जिम्मेदारी देश की प्रगति में योगदान दे सकती है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने व्यक्तिगत करियर के साथ समाज और देश के विकास के लिए भी काम करने का आह्वान किया।
वैश्विक परिस्थितियों के बीच जागरूक रहने की अपील

सीएम धामी ने कहा कि मौजूदा दौर में वैश्विक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। ऐसे समय में युवाओं को जागरूक, सतर्क और जिम्मेदार बने रहने की जरूरत है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने आसपास हो रहे बदलावों को समझने और सोच-समझकर निर्णय लेने की सलाह दी। मुख्यमंत्री के संदेश का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि शिक्षा का वास्तविक महत्व तभी है, जब उसका उपयोग व्यक्ति के चरित्र निर्माण, समाज के प्रति जिम्मेदारी और देश की उन्नति में हो। दीक्षांत समारोह में उनका संबोधन विद्यार्थियों को शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ मानवीय मूल्यों को भी महत्व देने की सीख देने पर केंद्रित रहा।
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