Delhi News: पश्चिमी दिल्ली का विकासपुरी इलाका शनिवार की आधी रात को एक भयावह त्रासदी का गवाह बना। यहां जनकपुरी मछली बाजार के पास खड़ी एक निजी बस में अचानक आग लग जाने से उसके कंडक्टर की दर्दनाक मृत्यु हो गई। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है और सार्वजनिक वाहनों में सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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दमकल विभाग को मिली घटना की सूचना और राहत कार्य
बताते चले कि, दिल्ली अग्निशमन सेवा (DFS) के अनुसार, यह हृदयविदारक घटना शनिवार और रविवार की दरम्यानी रात को हुई। दमकल विभाग के नियंत्रण कक्ष को देर रात 12:33 बजे जनकपुरी मछली बाजार क्षेत्र से बस में आग लगने की कॉल प्राप्त हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने तुरंत तीन फायर टेंडर घटनास्थल की ओर रवाना किए। जब दमकलकर्मी मौके पर पहुंचे, तो आग की लपटें इतनी ऊंची थी कि पूरी बस आग का गोला बन चुकी थी।
कंडक्टर सुनील शर्मा का शव बरामद और शिनाख्त
आपको बता दे कि, आग बुझाने के अभियान के दौरान दमकलकर्मियों को बस के भीतर से एक जला हुआ शव मिला। मृतक की पहचान 25 वर्षीय सुनील शर्मा के रूप में हुई है, जो उसी बस में कंडक्टर के रूप में कार्यरत था। चश्मदीदों के अनुसार, आग इतनी तेजी से फैली कि अंदर सो रहे सुनील को बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिला। वह बस के भीतर ही फंस गया और जिंदा जल गया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
अगरबत्ती से आग लगने की प्रारंभिक आशंका
दिल्ली पुलिस की शुरुआती जांच में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि आशंका जताई जा रही है कि आग बस के भीतर जल रही अगरबत्ती की वजह से लगी हो सकती है। संभवतः कंडक्टर ने सोने से पहले अगरबत्ती जलाई होगी, जिसकी चिंगारी ने धीरे-धीरे बस की सीटों और अन्य ज्वलनशील सामग्री को अपनी चपेट में ले लिया। हालांकि, पुलिस और फॉरेंसिक टीमें अभी भी आग लगने के सटीक कारणों की बारीकी से जांच कर रही हैं।
चश्मदीदों का बयान और वायरल हुआ दर्दनाक वीडियो
हादसे के समय आसपास मौजूद लोगों ने बताया कि उन्होंने आधी रात को अचानक बस से धुआं और तेज लपटें निकलती देखी। स्थानीय निवासियों ने तुरंत पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचित किया। इस दर्दनाक हादसे का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें बस धू-धू कर जलती नजर आ रही है। आग पर पूरी तरह काबू पाने में दमकल विभाग को एक घंटे से अधिक का समय लगा, लेकिन तब तक बस लोहे के कंकाल में तब्दील हो चुकी थी और सुनील की जान जा चुकी थी।
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