Deepfake पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त, रामदेव के नाम पर भ्रामक दवा बेचने वाले विज्ञापनों पर एक्शन

दिल्ली हाई कोर्ट ने योग गुरु स्वामी रामदेव के 'पर्सनैलिटी राइट्स' की रक्षा करते हुए उनकी आवाज, छवि और नाम के अनधिकृत उपयोग पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने AI से बने डीपफेक वीडियो और भ्रामक विज्ञापनों को हटाने के लिए 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया है, ताकि जनता को गुमराह होने से बचाया जा सके।

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

फ़रवरी 25, 2026

दिल्ली हाई कोर्ट ने योग गुरु स्वामी रामदेव के पक्ष में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए उनकी ‘पर्सनैलिटी राइट्स’ (व्यक्तित्व अधिकारों) की रक्षा के लिए अंतरिम आदेश जारी किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना अनुमति के AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) द्वारा निर्मित डीपफेक वीडियो, उनकी आवाज और उनके भगवा पहनावे का व्यावसायिक लाभ के लिए उपयोग करना पूरी तरह गैर-कानूनी है। जस्टिस ज्योति सिंह ने माना कि इससे न केवल एक सार्वजनिक हस्ती की छवि धूमिल होती है, बल्कि जनता के स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ हो सकता है।

 

व्यक्तित्व और पब्लिसिटी अधिकारों का उल्लंघन

बताते चले कि, अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि स्वामी रामदेव आयुर्वेद और योग के क्षेत्र में एक वैश्विक चेहरा हैं। उनकी पहचान के खास तत्व जैसे कि उनका शारीरिक रूप, विशिष्ट आवाज, भगवा वस्त्र और बोलने की शैली उनसे अभिन्न रूप से जुड़े हुए हैं। कोर्ट ने माना कि दशकों की मेहनत से उन्होंने जो ‘गुडविल’ और जनता का भरोसा कमाया है, उसका उपयोग कोई भी अनजान डिजिटल प्लेटफॉर्म या संस्था उनकी बिना सहमति (Non-consensual use) के नहीं कर सकती। यह सीधे तौर पर उनके पब्लिसिटी अधिकारों का हनन है।

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर ‘फेक कंटेंट’ का बड़ा जाल

सुनवाई में यह तथ्य सामने आया कि सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स वेबसाइटों पर स्वामी रामदेव के डीपफेक वीडियो (AI-generated Deepfakes) और बदली हुई तस्वीरों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। इन भ्रामक विज्ञापनों में उन्हें उन दवाओं और उपभोक्ता वस्तुओं (FMCG) का समर्थन करते हुए दिखाया गया है, जिनसे उनका कोई लेना-देना नहीं है। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि यह कंटेंट केवल व्यावसायिक फायदे और ऑनलाइन एंगेजमेंट (Online Engagement) बढ़ाने के लिए उनकी प्रतिष्ठा का दुरुपयोग करने के उद्देश्य से बनाया गया है।

भ्रामक मेडिकल सलाह के विरुद्ध कोर्ट की सख्ती

जस्टिस ज्योति सिंह ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि कुछ वीडियो में रामदेव को गलत मेडिकल सलाह (Misleading Medical Advice) देते हुए दिखाया गया है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि आम जनता इन ‘मैनिपुलेटेड’ वीडियो पर भरोसा करके स्वास्थ्य संबंधी निर्णय लेती है, तो यह सार्वजनिक स्वास्थ्य (Public Health) के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। मीम्स और बार-बार रीपोस्ट किए जाने वाले कंटेंट के जरिए उनकी सार्वजनिक छवि को जानबूझकर खराब करने की कोशिश की जा रही है।

फ्री स्पीच बनाम कॉपीराइट उल्लंघन

मामले के दौरान इंटरनेट इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म्स ने तर्क दिया कि कुछ पोस्ट ‘फ्री स्पीच’ के तहत पैरोडी या सटायर (व्यंग्य) का हिस्सा हैं। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी पब्लिक फिगर (Public Figure) की पर्सनैलिटी का व्यावसायिक लाभ के लिए अनधिकृत उपयोग ‘पासिंग ऑफ’ और कॉपीराइट उल्लंघन (Copyright Infringement) की श्रेणी में आता है। कोर्ट ने कहा कि पैरोडी के दावों की भविष्य में गहन जांच की जाएगी, लेकिन फिलहाल अंतरिम सुरक्षा देना आवश्यक है।

72 घंटों में URL हटाने और कंटेंट ब्लॉक करने का निर्देश

अदालत ने तत्काल प्रभाव से प्रतिवादियों को रामदेव की इमेज, नाम या आवाज का इस्तेमाल करने से रोक दिया है। इसके साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और संबंधित अथॉरिटीज को निर्देश दिया गया है कि वे अगले 72 घंटों के भीतर विवादित वीडियो, ई-कॉमर्स लिंक और विशिष्ट URL (Specific URLs) को हटाएं या ब्लॉक करें। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि बिना अनुमति के उनकी पहचान का इस्तेमाल कर सामान बेचना या विज्ञापन करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।