Defection Row: अमन अरोड़ा बोले- नेताओं का जाना ‘पुरानी बात’, पार्टी मजबूत

जालंधर. कैबिनेट मंत्री अमन अरोरा जालंधर में आम आदमी पार्टी का बैठक में पहुंचे। आम आदमी पार्टी के कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा राघव चड्ढा और संदीप पाठक पार्टी के लिए 24 घंटे पुरानी बात हो चुकी है। पार्टी एकजुट है और जालंधर में आयोजित की मीटिंग पार्टी ऑब्जर्वर के संबंध में को लेकर है। पार्टी इस संबंध में चिंतित नहीं के कोई राघव चड्ढा और संदीप पाठक के साथ जाने वाले हैं। अमन अरोडा में इस मीटिंग को रूटीन बताया और उन्होंने कहा ये एक बड़ी मीटिंग है इसलिए मीडिया में चर्चा का केंद्र है। कुछ दिन पहले

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Published On :

अप्रैल 29, 2026

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जालंधर.

कैबिनेट मंत्री अमन अरोरा जालंधर में आम आदमी पार्टी का बैठक में पहुंचे। आम आदमी पार्टी के कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा राघव चड्ढा और संदीप पाठक पार्टी के लिए 24 घंटे पुरानी बात हो चुकी है। पार्टी एकजुट है और जालंधर में आयोजित की मीटिंग पार्टी ऑब्जर्वर के संबंध में को लेकर है।

पार्टी इस संबंध में चिंतित नहीं के कोई राघव चड्ढा और संदीप पाठक के साथ जाने वाले हैं। अमन अरोडा में इस मीटिंग को रूटीन बताया और उन्होंने कहा ये एक बड़ी मीटिंग है इसलिए मीडिया में चर्चा का केंद्र है। कुछ दिन पहले राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने साथ-साथ छह और सासंदों के आप छोड़क बीजेपी में शामिल होने की बात कही थी। आम आदमी पार्टी के लिए यह बड़ी झटका था। राघव चड्ढा के साथ अशोक मित्तल, संदीप पाठक, स्वाति मालिवाल, हर भजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता आदि बीजेपी में शामिल हो गए थे।

कुछ दिन पहले बीजेपी में शामिल हुए थे सांसद राघव
कुछ दिन पहले एक वीडियो शेयर करते हुए राघव चड्ढा ने आरोप लगाया था कि पार्टी का माहौल टॉक्सिक हो गया था और अब भी वे जनहित के मुद्दे उठाते रहेंगे। अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया। जिसमें उन्होंने कहा कि पॉलिटिक्स में आने से पहले मैं सीए था, मेरे सामने एक बेहतर करियर था, उसे छोड़कर मैं राजनीति में आया। अपना करियर को बनाने के लिए राजनीति में नहीं आया। एक पॉलिटिकल पार्टी का फाउंडिंग मेंबर बना, जिस पार्टी को मैंने अपने प्राइम यूथ के 15 साल दिए।

पिछले कुछ सालों से मैं यह महसूस कर रहा था कि शायद मैं एक गलत पार्टी में एक सही आदमी हूं। इसी के चलते मेरे सामने सिर्फ तीन विकल्प थे; पहला विकल्प कि मैं राजनीति ही छोड़ दूं। दूसरा विकल्प कि मैं इसी पार्टी में रहूं और चीजें ठीक करने की कोशिश करूं, जो कि हुआ नहीं।

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