ग्राहक को मिला इंसाफ, पार्सल खोने पर DTDC एक्सप्रेस पर लगा जुर्माना

जालंधर. पार्सल गुम होने के मामले में उपभोक्ता को आखिरकार न्याय मिल ही गया। उपभोक्ता फोरम में दायर एक केस में फैसला उपभोक्ता के पक्ष में सुनाया, जिसके बाद डी.टी.डी.सी. एक्सप्रैस कंपनी को उपभोक्ता को कुल 28,915 रुपए का भुगतान करना पड़ा। यह राशि कंपनी ने ड्राफ्ट के माध्यम से अदा की है। प्रीत नगर, सोढल रोड निवासी रजत शर्मा ने बताया कि 22 अक्तूबर 2022 को उन्हें एक पार्सल डिलीवर किया जाना था। लेकिन निर्धारित तिथि पर पार्सल उन्हें प्राप्त नहीं हुआ। इसके बाद जब उन्होंने कंपनी से संपर्क किया, तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उपभोक्ता का आरोप

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Published On :

मई 6, 2026

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जालंधर.

पार्सल गुम होने के मामले में उपभोक्ता को आखिरकार न्याय मिल ही गया। उपभोक्ता फोरम में दायर एक केस में फैसला उपभोक्ता के पक्ष में सुनाया, जिसके बाद डी.टी.डी.सी. एक्सप्रैस कंपनी को उपभोक्ता को कुल 28,915 रुपए का भुगतान करना पड़ा। यह राशि कंपनी ने ड्राफ्ट के माध्यम से अदा की है।

प्रीत नगर, सोढल रोड निवासी रजत शर्मा ने बताया कि 22 अक्तूबर 2022 को उन्हें एक पार्सल डिलीवर किया जाना था। लेकिन निर्धारित तिथि पर पार्सल उन्हें प्राप्त नहीं हुआ। इसके बाद जब उन्होंने कंपनी से संपर्क किया, तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उपभोक्ता का आरोप है कि कंपनी की लापरवाही के चलते उनका पार्सल रास्ते में ही गुम हो गया।

कंपनी अपनी जिम्मेदारी निभाने में रही असफल 
रजत शर्मा ने कई बार डी.टी.डी.सी. एक्सप्रैस के अधिकारियों से संपर्क कर पार्सल की जानकारी लेने की कोशिश की, लेकिन उन्हें हर बार टालमटोल का सामना करना पड़ा। लगातार निराशा हाथ लगने के बाद उन्होंने उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया और न्याय की मांग की। फोरम में सुनवाई के दौरान उपभोक्ता द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और तथ्यों को ध्यान में रखते हुए यह स्पष्ट हुआ कि कंपनी जिम्मेदारी निभाने में असफल रही है। फोरम ने इसे सेवा में कमी मानते हुए कंपनी को उपभोक्ता को मुआवजा देने का आदेश दिया।

कंपनी ने ड्राफ्ट के जरिए किया भुगतान
फोरम के आदेश के बाद कंपनी ने उपभोक्ता को 28,915 का ड्राफ्ट भेजकर भुगतान कर दिया। इस मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि यदि उपभोक्ता अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें और सही मंच का सहारा लें, तो उन्हें न्याय अवश्य मिल सकता है। साथ ही, यह फैसला कुरियर कंपनियों के लिए भी एक चेतावनी है कि वे अपनी सेवाओं में पारदर्शिता और जिम्मेदारी बनाए रखें, अन्यथा उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

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