Crude Oil Shock: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में खलबली मचा दी है। सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 7 फीसदी का जबरदस्त उछाल देखा गया, जिससे दाम पिछले 15 महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद भड़की हिंसा और टैंकरों पर हुए हमलों ने शिपमेंट में बड़ी रुकावट पैदा कर दी है। इसके परिणामस्वरूप, खाड़ी देशों का कच्चा तेल 82 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गया है, जबकि अमेरिकी कच्चे तेल की कीमतें भी 75 डॉलर के आसपास मंडरा रही हैं।
हमलों की नई लहर और होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी
शनिवार को ईरान पर हुए हमलों के बाद रविवार को इजरायल ने तेहरान पर हवाई हमलों की एक और लहर शुरू की। इसके जवाब में ईरान ने भी मिसाइलें दागीं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता और बढ़ गई है। शिपिंग सूत्रों के अनुसार, इन हमलों में खाड़ी तट पर कम से कम तीन तेल टैंकरों को निशाना बनाया गया, जिसमें एक नाविक की मौत हो गई। सबसे चिंताजनक बात यह है कि ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग, होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) से नेविगेशन बंद करने का एलान किया है। इस नाकेबंदी ने एशियाई देशों और रिफाइनरियों की नींद उड़ा दी है।
बाजार विशेषज्ञों की राय: क्या तेल 100 डॉलर तक जाएगा?
एएनजेड (ANZ) के विश्लेषक डेनियल हाइन्स के अनुसार, टैंकरों पर हमलों ने तेल की आपूर्ति श्रृंखला पर गंभीर खतरा पैदा कर दिया है। सिटी (Citi) के विश्लेषकों का अनुमान है कि तनाव जारी रहने पर इस हफ्ते ब्रेंट क्रूड 80 से 90 डॉलर के बीच रह सकता है। वहीं, ओपेक प्लस (OPEC+) देशों ने रविवार को उत्पादन में प्रति दिन 206,000 बैरल की बढ़ोतरी करने पर सहमति जताई है। हालांकि, आरबीसी कैपिटल की विश्लेषक हेलिमा क्रॉफ्ट का मानना है कि यदि प्रमुख समुद्री रास्ते बंद रहते हैं, तो अतिरिक्त उत्पादन का लाभ मिलना मुश्किल होगा। वर्तमान में लगभग 200 से ज्यादा जहाज समुद्र में लंगर डाले हुए हैं।
वैश्विक तेल भंडार और आईईए (IEA) की सतर्कता
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के निदेशक फातिह बिरोल ने कहा है कि एजेंसी मध्य पूर्व की घटनाओं पर सक्रिय रूप से नजर रख रही है। गोल्डमैन सैक्स के विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर वर्तमान में 7.827 मिलियन बैरल तेल का स्टॉक मौजूद है। यह स्टॉक दुनिया की 74 दिनों की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। संकट गहराने की स्थिति में विकसित देश अपने स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) से तेल जारी कर सकते हैं, जिससे बाजार में कीमतों को संतुलित करने में मदद मिल सकती है।
क्या भारत में महंगे होंगे पेट्रोल और डीजल?
भारतीय उपभोक्ताओं के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या देश में ईंधन की कीमतें बढ़ेंगी? विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार नहीं जाता, तब तक भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़े बदलाव के आसार कम हैं। इसका मुख्य कारण भारत के पास मौजूद पर्याप्त तेल भंडार और रूस से तेल आयात का विकल्प है। हालांकि, यदि कीमतें 100 डॉलर का स्तर पार करती हैं, तो पेट्रोल और डीजल के दाम में 3 से 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी देखी जा सकती है। फिलहाल सरकार स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है।










