
Crude Oil Price Crash : वैश्विक बाजार में मंगलवार, 3 नवंबर को कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड करीब 8 फीसदी तक टूटकर 104.50 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) की कीमत भी गिरकर 96.11 डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गई। तेल की कीमतों में आई इस गिरावट के पीछे ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत आगे बढ़ने की उम्मीद को अहम वजह माना जा रहा है। निवेशकों को आशंका है कि अगर दोनों देशों के बीच समझौता होता है तो वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति सामान्य हो सकती है।
कतर की मध्यस्थता से बातचीत आगे बढ़ने की उम्मीद
ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच तनाव कम करने के लिए कतर की मध्यस्थता में राजनयिक प्रयास जारी हैं। इन प्रयासों से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के दोबारा खुलने की उम्मीदें बढ़ी हैं। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके रास्ते बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और ऊर्जा उत्पाद दुनिया के अलग-अलग बाजारों तक पहुंचते हैं। यदि यहां आवाजाही सामान्य होती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की उपलब्धता बेहतर हो सकती है। इसी संभावना के चलते निवेशकों ने कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के संकेत देखे हैं।
खामेनेई ने शांति वार्ता के लिए दिए विशेष अधिकार
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने सरकार को शांति वार्ता आगे बढ़ाने के लिए विशेष अधिकार दिए हैं। दूसरी तरफ अमेरिका की ओर से भी बातचीत में सकारात्मक बदलाव के संकेत बताए जा रहे हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की भूमिका को लेकर भी चर्चा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत को सकारात्मक बताया है। हालांकि, उन्होंने यह चेतावनी भी दी है कि अगर कोई समझौता नहीं होता तो 3 नवंबर के अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के बाद ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य हमले दोबारा किए जा सकते हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलने से सामान्य हो सकती है तेल आपूर्ति
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में शामिल है। फारस की खाड़ी से निकलने वाले तेल और गैस के बड़े हिस्से की आपूर्ति इसी रास्ते से होती है। क्षेत्र में तनाव बढ़ने पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है और वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। इसके उलट, रास्ता खुलने और समुद्री परिवहन सामान्य होने की उम्मीद से कीमतों पर दबाव बनता है। फिलहाल बाजार की नजरें कतर की मध्यस्थता में चल रही बातचीत और ईरान-अमेरिका के अगले कदमों पर टिकी हैं।
केशम द्वीप पर अमेरिकी हमले से बढ़ा तनाव
हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट के लंबे समय तक बने रहने को लेकर अनिश्चितता है। खबर के मुताबिक, अमेरिका ने मंगलवार को ईरान के केशम द्वीप और उसके आसपास के ठिकानों पर हमले किए हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के लिए मतदान जारी है। हमले के बाद ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और पलटवार की चेतावनी दी है। इससे क्षेत्र में तनाव फिर बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है।
क्या फिर महंगा होगा कच्चा तेल?
अमेरिका के ताजा हमले और ईरान की जवाबी कार्रवाई की धमकी से बाजार में अनिश्चितता बढ़ सकती है। यदि सैन्य तनाव तेज होता है या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही बाधित होती है तो तेल की कीमतों में दोबारा उछाल आ सकता है। फिलहाल कच्चे तेल का बाजार कूटनीतिक बातचीत और सैन्य घटनाक्रम, दोनों पर प्रतिक्रिया दे रहा है। आने वाले दिनों में तेल की कीमतों की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि बातचीत किसी समझौते तक पहुंचती है या पश्चिम एशिया में संघर्ष और गहराता है।
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