झारखंड में JSSC-CGL नियुक्तियों पर संकट, TDPL से जुड़ी 9 परीक्षाएं भी हो सकती हैं रद्द

रांची  झारखंड में जेएसएससी-सीजीएल के जरिए हुई लगभग 1,932 नियुक्तियों को रद्द करने की प्रशासनिक तैयारी और टीडीपीएल से जुड़ी करीब एक दर्जन परीक्षाएं रद्द होने से राज्य के लाखों युवाओं के भविष्य पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इस फैसले के बाद प्रदेश में बड़े पैमाने पर कानूनी विवाद और विरोध प्रदर्शनों के आसार बन गए हैं। कल सीएम हेमंत सोरेन की घोषणा के बाद अब कार्मिक विभाग सीजीएल से हुई नियुक्ति को रद करने का अधिसूचना जारी करेगा। इसी के साथ संबंधित विभागों को नियुक्ति रद करने का आदेश जारी करेगा। हालांकि इससे पहले सरकार विधिक राय

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Published On :

अगस्त 18, 2026

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रांची
 झारखंड में जेएसएससी-सीजीएल के जरिए हुई लगभग 1,932 नियुक्तियों को रद्द करने की प्रशासनिक तैयारी और टीडीपीएल से जुड़ी करीब एक दर्जन परीक्षाएं रद्द होने से राज्य के लाखों युवाओं के भविष्य पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इस फैसले के बाद प्रदेश में बड़े पैमाने पर कानूनी विवाद और विरोध प्रदर्शनों के आसार बन गए हैं।

कल सीएम हेमंत सोरेन की घोषणा के बाद अब कार्मिक विभाग सीजीएल से हुई नियुक्ति को रद करने का अधिसूचना जारी करेगा। इसी के साथ संबंधित विभागों को नियुक्ति रद करने का आदेश जारी करेगा। हालांकि इससे पहले सरकार विधिक राय भी ले सकती है

नियुक्त एवं कार्यरत कर्मी इसके विरोध में आंदोलन कर सकते हैं। सरकार के विरुद्ध उनका उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करना तय है। सीजीएल के माध्यम से 1932 लगभग पदों पर नियुक्ति हुई है, जिनकी नौकरी खत्म हो सकती है।

टीडीपीएल से जुड़ी लगभग एक दर्जन परीक्षाएं रद होने से लगभग सात लाख अभ्यर्थी प्रभावित होंगे। इनमें लगभग एक हजार अभ्यर्थी ऐसे भी होंगे जो विभिन्न पदों पर नियुक्त हो चुके हैं।

ये नौ परीक्षाएं भी हो सकती हैं रद, फिलहाल हैं स्थगित
– सिविल जज जूनियर डिविजन (लिखित) परीक्षा : पद 138
– सहायक लोक अभियोजक (बैकलाग) लिखित परीक्षा : पद 26
– कारखाना निरीक्षक लिखित परीक्षा : पद 14
– प्रोजेक्ट मैनेजर लिखित परीक्षा : पद 30
– सहायक लोक अभियोजक (नियमित) लिखित परीक्षा : 134
– वाष्पित्र निरीक्षक : 05

प्रभाव और आंकड़े

  • बेरोजगारी और अनिश्चितता: सीजीएल नियुक्तियों के रद्द होने से लगभग 1,932 परिवारों पर सीधा संकट आएगा, वहीं टीडीपीएल (TDPL) से जुड़ी परीक्षाएं रद्द होने से लगभग 7 लाख अभ्यर्थी प्रभावित होंगे।
  • भविष्य की कानूनी लड़ाई: यदि सरकार नियुक्तियां रद्द करती है, तो प्रभावित कर्मियों द्वारा उच्च न्यायालय में याचिकाएं दायर करना तय है। इसके साथ ही कर्मचारी संघों द्वारा बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और आंदोलन की पूरी संभावना है।

संभावित चुनौतियां और सरकार के विकल्प
विधिक राय: सरकार द्वारा कोई भी बड़ा कदम उठाने से पहले महाधिवक्ता या विधि विभाग से राय लेना अनिवार्य है, ताकि अदालत में सरकार का पक्ष मजबूत रहे।

भविष्य की कार्ययोजना: बार-बार परीक्षाएं रद्द होने से राज्य की छवि और आयोग (JSSC/JPSC) की साख पर असर पड़ता है। सरकार को चाहिए कि वह भविष्य की परीक्षाओं के लिए एक पारदर्शी और फूल-प्रूफ नीति बनाए ताकि बार-बार कानूनी अड़चनें न आएं।

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