वीडियो वायरल होने के बाद बढ़ा विवाद, सामान्य शव वाहन में ले जाए गए मोर पर सवाल

रतलाम  सैलाना नगर के कुमावतपुरा क्षेत्र में गुरुवार सुबह राष्ट्रीय पक्षी मोर की करंट लगने से मौत हो गई। मामले में वन विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। वन्यजीव नियमों के अनुसार मोर की मृत्यु होने पर पोस्टमार्टम कराना अनिवार्य होता है, लेकिन विभाग ने बगैर पोस्टमार्टम कराए ही मोर का अंतिम संस्कार कर दिया। विभाग की ओर से मोर के शव का क्षत–विक्षत होने का हवाला दिया जा रहा है, लेकिन घटना के बाद जो वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए उनमें मोर का शव सामान्य देखा जा सकता है। जानकारी के अनुसार कुमावतपुरा के मुख्य मार्ग पर

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Published On :

मई 7, 2026

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रतलाम 

सैलाना नगर के कुमावतपुरा क्षेत्र में गुरुवार सुबह राष्ट्रीय पक्षी मोर की करंट लगने से मौत हो गई। मामले में वन विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। वन्यजीव नियमों के अनुसार मोर की मृत्यु होने पर पोस्टमार्टम कराना अनिवार्य होता है, लेकिन विभाग ने बगैर पोस्टमार्टम कराए ही मोर का अंतिम संस्कार कर दिया। विभाग की ओर से मोर के शव का क्षत–विक्षत होने का हवाला दिया जा रहा है, लेकिन घटना के बाद जो वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए उनमें मोर का शव सामान्य देखा जा सकता है।

जानकारी के अनुसार कुमावतपुरा के मुख्य मार्ग पर एक मोर उड़कर एक स्थान से दूसरे स्थान जा रहा था। इसी दौरान वह विद्युत तारों में उलझ गया और करंट लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। स्थानीय नागरिकों ने सड़क पर मृत अवस्था में पड़े मोर को देखा तो वन विभाग को सूचना दी।

करीब एक घंटे बाद वन विभाग का कर्मचारी मौके पर पहुंचा और मोर को वहां से उठाकर ले गया। बाद में अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी में उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

अंतिम संस्कार के दौरान वन परिक्षेत्र अधिकारी राधेश्याम जोशी, वनपाल नारायण कटारा, कार्यवाहक वनपाल रघुवीर सिंह चुंडावत एवं सुरक्षा चौकीदार कालू मौजूद रहे।

दरअसल वन्यजीव कानून के तहत राष्ट्रीय पक्षी की मौत होने पर अंतिम संस्कार से पहले पोस्टमार्टम कराना आवश्यक होता है, ताकि मृत्यु के कारणों की आधिकारिक पुष्टि हो सके।

इसके बावजूद विभाग ने नियमों का पालन नहीं किया। वन परिक्षेत्र अधिकारी राधेश्याम जोशी ने बताया कि मोर का शव क्षत–विक्षत हो चुका था, इसलिए पोस्टमार्टम नहीं कराया गया।

वहीं पशु चिकित्सक बीएल पाटीदार ने कहा कि मोर की मौत के 24 घंटे के भीतर किसी भी स्थिति में पोस्टमार्टम किया जा सकता है। वन विभाग की ओर से पोस्टमार्टम कराने संबंधी कोई पत्र उन्हें प्राप्त नहीं हुआ।

 

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