Congress Minority Meeting: देश की राजधानी दिल्ली में कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग द्वारा राष्ट्रीय अल्पसंख्यक एडवाइजरी काउंसिल की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया। इस विशेष बैठक में लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी मुख्य रूप से शामिल हुए। उनके साथ देश के कोने-कोने से आए विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों के लगभग 52 प्रमुख और कद्दावर नेताओं ने इस विचार-विमर्श में हिस्सा लिया। आगामी चुनावों और देश के वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए कांग्रेस की इस रणनीतिक बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पार्टी इस बैठक के जरिए आने वाले समय में देश के भीतर एक नए सामाजिक आंदोलन और राजनीतिक एजेंडे को धार देने की तैयारी कर रही है।
विभिन्न समुदायों के दिग्गज सांसदों और नेताओं ने बैठक में दर्ज कराई उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण बैठक में कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने मेजबान की भूमिका निभाई। उनके साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कद्दावर नेता और सांसद इमरान मसूद, जैन समाज का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता व सांसद डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी, क्रिश्चियन समाज के प्रख्यात प्रतिनिधि सांसद क्रिस्टोफर और सिख समाज के वरिष्ठ रणनीतिकार गुरदीप सप्पल समेत कई समुदायों के शीर्ष चेहरे एक मंच पर नजर आए। आंतरिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, बैठक को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत का पवित्र संविधान देश के सभी नागरिकों और धर्मों को पूरी तरह से समान अधिकार देता है। उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस की बुनियादी राजनीति हमेशा से इसी संवैधानिक और धर्मनिरपेक्ष सोच पर टिकी रही है और आगे भी रहेगी।
अमीरी बनाम गरीबी की होगी असली लड़ाई, खत्म होगी हिंदू-मुस्लिम राजनीति
सूत्रों के अनुसार, बैठक में राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वैचारिक एजेंडे पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में देश से भाजपा और आरएसएस की पारंपरिक “हिंदू-मुस्लिम राजनीति” का पूरी तरह से खात्मा होने वाला है। इसके पीछे का कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि आज के दौर में देश की आम जनता के लिए कमरतोड़ महंगाई, बेरोजगारी और बढ़ती आर्थिक असमानता सबसे बड़े और ज्वलंत मुद्दे बन चुके हैं। राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि अब देश की असली राजनीतिक और सामाजिक लड़ाई मुट्ठी भर अमीरों और करोड़ों गरीबों के बीच सिमट चुकी है, जबकि केंद्र की वर्तमान सरकार केवल मुख्य आर्थिक संकटों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए विभाजनकारी राजनीति का सहारा ले रही है।
देशभर में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और कथित अत्याचार पर जताई गई गहरी चिंता
इस मैराथन बैठक के दौरान देश के अलग-अलग राज्यों में अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हो रहे कथित अत्याचारों, मॉब लिंचिंग और सामाजिक असुरक्षा के बढ़ते मामलों पर भी बेहद गंभीर और गहन चर्चा की गई। अल्पसंख्यक एडवाइजरी काउंसिल के सदस्य नेताओं ने अपने-अपने राज्यों की जमीनी रिपोर्ट नेतृत्व के सामने पेश की। उन्होंने विभिन्न संवेदनशील मामलों को उठाते हुए इस बात पर कड़ा जोर दिया कि अब समय आ गया है जब कांग्रेस को इन मुद्दों पर केवल बयानों तक सीमित न रहकर, जमीन पर एक मजबूत और संगठित सामाजिक व राजनीतिक हस्तक्षेप करने की सख्त जरूरत है, ताकि पीड़ित वर्गों में सुरक्षा और न्याय का भरोसा बहाल किया जा सके।
संगठन को जमीनी स्तर पर करेंगे मजबूत, इमरान प्रतापगढ़ी ने बताया मुख्य लक्ष्य
बैठक के समापन के बाद कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष इमरान प्रतापगढ़ी ने मीडिया से विशेष बातचीत में बैठक के मुख्य एजेंडे को साझा किया। उन्होंने बताया कि आज की इस काउंसिल बैठक में देश भर के 52 सबसे प्रभावशाली अल्पसंख्यक विचारकों और नेताओं को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। बैठक का मुख्य उद्देश्य देश की एकता को बचाना और संगठन के ढांचे को ब्लॉक व जिला स्तर पर मजबूत करना है। इमरान प्रतापगढ़ी ने आगे कहा, “हमारा मुख्य प्रयास यह है कि देश का संपूर्ण अल्पसंख्यक समुदाय पूरी तरह एकजुट होकर कांग्रेस के हाथ को मजबूत करे। जब देश का यह शोषित वर्ग एक साथ खड़ा होगा, तभी संविधान की रक्षा, लोकतंत्र की बहाली और वास्तविक सामाजिक न्याय की इस लंबी लड़ाई को वैचारिक रूप से जीता जा सकेगा।”
6 जून को होगा बड़ा जॉइंट कन्वेंशन, दलित और अल्पसंख्यक मिलकर भरेंगे हुंकार
कांग्रेस के शीर्ष सूत्रों से मिली ताजा जानकारी के अनुसार, इस सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए पार्टी आगामी 6 जून को राष्ट्रीय स्तर पर एक बेहद विशाल ‘जॉइंट कन्वेंशन’ (संयुक्त सम्मेलन) आयोजित करने जा रही है। यह भव्य महाधिवेशन कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग और अनुसूचित जाति (शेड्यूल कास्ट) विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जाएगा। इस बड़े कार्यक्रम में भी नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होने की पूरी संभावना है। कांग्रेस पार्टी इस आगामी साझा कन्वेंशन को देश के भीतर सामाजिक न्याय की अलख जगाने, दबे-कुचले वर्गों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने और आम जनता के आर्थिक मुद्दों को केंद्र में रखकर एक बहुत बड़ा और प्रभावी राजनीतिक संदेश देने के मास्टरस्ट्रोक के रूप में देख रही है।
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