Congress: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल और सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने के रिकॉर्ड पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस ने इसे केवल एक ‘स्वघोषित उपलब्धि’ बताते हुए सरकार को महंगाई, बेरोजगारी और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने के आरोपों से घेरा है। कांग्रेस का तर्क है कि किसी प्रधानमंत्री का मूल्यांकन उनके कार्यकाल की अवधि से नहीं, बल्कि उनके द्वारा किए गए जनहित के कार्यों से किया जाना चाहिए।
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‘महंगाई की दोहरी मार’ और आम आदमी का दर्द
कांग्रेस सांसद रणदीप सुरजेवाला ने महंगाई को सरकार की सबसे बड़ी विफलता बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार भले ही विकास के दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि दाल, तेल, चावल और आटे जैसी बुनियादी जरूरतों की कीमतें आम आदमी की पहुंच से बाहर हो गई हैं। उन्होंने दावा किया कि पेट्रोल और रसोई गैस की कीमतों में हुई बेतहाशा वृद्धि ने घरेलू बजट को पूरी तरह बिगाड़ दिया है। सुरजेवाला के अनुसार, ‘डबल इंजन’ सरकार की नीतियों का असर यह हुआ है कि परिवहन महंगा होने से हर वस्तु की लागत बढ़ गई है, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग पर दोहरी मार पड़ रही है।
नेहरू बनाम मोदी
प्रधानमंत्री मोदी की तुलना प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से किए जाने पर कांग्रेस विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि नेहरू का योगदान आधुनिक भारत की नींव रखने, पंचवर्षीय योजनाओं के क्रियान्वयन और बड़े शिक्षण संस्थानों के निर्माण में था। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने नेहरू के कार्यकाल का स्मरण दिलाते हुए कहा कि 1947 से 1952 के बीच देश ने संविधान निर्माण, रियासतों का विलय और बड़े सिंचाई परियोजनाओं जैसी ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल कीं। कांग्रेस का कहना है कि मोदी सरकार ने उन लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया है, जिन्हें आजादी के बाद दशकों की मेहनत से मजबूत बनाया गया था।
लोकतंत्र और संस्थागत संकट का आरोप
जयराम रमेश ने मोदी सरकार पर सीधे तौर पर ‘लोकतंत्र की हत्या’ का आरोप लगाया। उन्होंने चुनाव आयोग और स्वतंत्र संस्थाओं पर बढ़ते दबाव की चर्चा करते हुए कहा कि विपक्ष की आवाज को दबाया जा रहा है। शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी कांग्रेस ने तल्ख रुख अपनाते हुए NEET और CBSE जैसे विवादों का उल्लेख किया, जो युवाओं के भविष्य और परीक्षा प्रणाली पर जनता के भरोसे को कम करते हैं। इसके अलावा, आरक्षण नीति को निजीकरण के माध्यम से कमजोर करने के दावे भी कांग्रेस द्वारा किए गए हैं।
2024 का जनादेश और राजनीतिक भविष्य
कांग्रेस ने यह भी स्पष्ट किया कि 2024 का जनादेश पूरी तरह से पीएम मोदी के व्यक्तिगत पक्ष में नहीं था, क्योंकि भाजपा को अकेले बहुमत नहीं मिला और उन्हें एनडीए सहयोगियों पर निर्भर रहना पड़ा। दूसरी ओर, भाजपा देशभर में अपने 12 वर्षों के शासन का जश्न मना रही है और अपनी उपलब्धियों को जनता के बीच ले जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में महंगाई और बेरोजगारी जैसे आर्थिक मुद्दे विपक्ष के मुख्य चुनावी हथियार रहेंगे, जबकि भाजपा बुनियादी ढांचे के विकास पर अपना फोकस बनाए रखेगी।
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