ईरान के साथ संघर्ष: अमेरिका पूरी ताकत लगा रहा, हर हमला रोक पाना संभव नहीं—बड़ा बयान

वाशिंगटन ईरान के साथ जारी युद्ध के पांचवें दिन अमेरिका ने साफ किया है कि उसने मध्य पूर्व में तैनात अपने सैनिकों और सहयोगी देशों की सुरक्षा के लिए कोई कमी नहीं छोड़ी है। अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ (Pete Hegseth) ने पेंटागन में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूत करने के लिए हर संसाधन और हर क्षमता का इस्तेमाल किया गया है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि हर ड्रोन या मिसाइल हमले को पूरी तरह रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि हमला शुरू

Wrriten By :

Editor

Published On :

मार्च 6, 2026

Advertisements
728x90 Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital.jpg

वाशिंगटन

ईरान के साथ जारी युद्ध के पांचवें दिन अमेरिका ने साफ किया है कि उसने मध्य पूर्व में तैनात अपने सैनिकों और सहयोगी देशों की सुरक्षा के लिए कोई कमी नहीं छोड़ी है। अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ (Pete Hegseth) ने पेंटागन में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूत करने के लिए हर संसाधन और हर क्षमता का इस्तेमाल किया गया है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि हर ड्रोन या मिसाइल हमले को पूरी तरह रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि हमला शुरू करने से पहले अधिकतम सुरक्षा व्यवस्था की गई थी, लेकिन 100 प्रतिशत सुरक्षा की गारंटी नहीं दी जा सकती।

इसी बीच पेंटागन ने जानकारी दी कि अब तक इस संघर्ष में छह अमेरिकी सैनिकों की जान जा चुकी है। यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान में मरने वालों की संख्या 1,000 के पार पहुंच गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रक्षा विभाग के शीर्ष अधिकारियों ने पहले ही संकेत दिया था कि यह जंग लंबी चल सकती है और आगे भी अमेरिकी सैनिक हताहत हो सकते हैं।
अमेरिका बोला- ईरान उसे थका नहीं सकता है

हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका इस सैन्य अभियान में निर्णायक बढ़त बनाए हुए है और ईरान के हवाई क्षेत्र पर तेजी से नियंत्रण स्थापित कर रहा है। उनका कहना था कि अमेरिका जितना समय जरूरी होगा, उतना समय लेगा और ईरान उसे थका नहीं सकता। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका “निर्णायक, तबाही मचाने वाले और बिना किसी रियायत के” आगे बढ़ रहा है। साथ ही उन्होंने बताया कि और लड़ाकू विमान और बमवर्षक जल्द ही इस क्षेत्र में पहुंचेंगे।

जंग के पांचवें दिन एक अहम सैन्य कार्रवाई भी हुई। मंगलवार रात एक अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो दागकर ईरान के युद्धपोत IRIS Dena को डुबो दिया। हेगसेथ ने कहा कि यह जहाज अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में खुद को सुरक्षित समझ रहा था, लेकिन उसे निशाना बना लिया गया। यह जहाज ईरान के नए युद्धपोतों में से एक था। श्रीलंका ने बताया कि उसके दक्षिणी तट के पास जहाज से संकट संदेश मिलने के बाद उसकी नौसेना और वायुसेना ने 180 में से 32 लोगों को बचा लिया। हेगसेथ के मुताबिक, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहला मौका है जब किसी दुश्मन के जहाज को इस तरह अमेरिकी पनडुब्बी ने डुबोया है।

उसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने कहा कि जंग की शुरुआत के मुकाबले अब ईरान कम मिसाइलें दाग रहा है। उन्होंने बताया कि अमेरिका के लगातार हमलों से ईरान की सैन्य क्षमता काफी कमजोर हो गई है।

जंग कितने समय तक चलेगी, इस पर हेगसेथ ने कोई निश्चित समयसीमा नहीं दी। उन्होंने कहा कि यह चार हफ्ते भी चल सकती है, छह या आठ हफ्ते भी, और हालात के मुताबिक इससे कम या ज्यादा समय भी लग सकता है। उनके मुताबिक, युद्ध की रफ्तार और दिशा अमेरिका तय कर रहा है और दुश्मन असंतुलित स्थिति में है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में अमेरिका ने उन्नत हथियारों का इस्तेमाल किया और अब ईरानी आसमान पर नियंत्रण स्थापित करने के बाद ग्रैविटी बम का इस्तेमाल करने की योजना है। साथ ही उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास पर्याप्त गोला-बारूद और संसाधन मौजूद हैं।

एक इजरायली सैन्य अधिकारी के अनुसार, अमेरिका और इजरायल के शीर्ष अधिकारियों ने करीब तीन हफ्ते पहले हमलों की योजना बनानी शुरू कर दी थी। इस संघर्ष में अब तक ईरान में 1,000 से ज्यादा और लेबनान में दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा पश्चिम एशिया में तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है और हजारों यात्री अलग-अलग देशों में फंसे हुए हैं।

सितंबर तक चल सकता है युद्ध

'पॉलिटिको' की रिपोर्ट में आंतरिक दस्तावेजों के हवाले से लिखा है कि यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने अमेरिकी रक्षा विभाग से फ्लोरिडा स्थित अपने मुख्यालय में और अधिक सैन्य खुफिया कर्मचारियों को भेजने का आग्रह किया है। इसका उद्देश्य आने वाले महीनों में ईरान के खिलाफ अभियानों को सुचारू रूप से चलाना है। इस अतिरिक्त कर्मचारियों की मांग से पता चलता है कि अमेरिका एक लंबे अभियान की योजना बना रहा है, जो सितंबर तक खिंच सकता है।

यह स्थिति राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उन पिछली टिप्पणियों के बिल्कुल उलट है, जिनमें उन्होंने युद्ध शुरू होने के तुरंत बाद कहा था कि यह अभियान लगभग चार सप्ताह या उससे भी कम समय में पूरा हो सकता है। एक अमेरिकी अधिकारी ने पॉलिटिको को बताया कि रक्षा अधिकारी इस क्षेत्र में अतिरिक्त वायु रक्षा प्रणालियां तैनात करने की तैयारी कर रहे हैं। इनमें विशेष रूप से छोटी और कम खर्चीली 'एंटी-ड्रोन तकनीक' शामिल हैं, जिन्हें पेंटागन ने हाल के वर्षों में विकसित किया है।

'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी'

अमेरिका और इजरायल द्वारा संयुक्त रूप से शुरू किया गया यह युद्ध 28 फरवरी को 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के नाम से शुरू हुआ था। इस अभियान के पहले ही दिन ईरान की राजधानी तेहरान में एक बड़े हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई उनके आवास पर मारे गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने इस युद्ध के व्यापक परिणामों का पूरी तरह से अनुमान नहीं लगाया था। नतीजतन, अमेरिकी विदेश विभाग ने पूरे मध्य पूर्व से अपने राजनयिक कर्मचारियों को सुरक्षित निकालने के लिए अतिरिक्त संसाधन लगाने शुरू कर दिए हैं। निकासी प्रक्रिया का सीधा नियंत्रण अब विदेश विभाग के वरिष्ठ नेतृत्व के हाथों में है। इस अभियान के दौरान अब तक छह अमेरिकी सैनिक अपनी जान गंवा चुके हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी दी है कि आने वाले समय में और भी अमेरिकी सैनिक हताहत हो सकते हैं।

पड़ोसी देशों पर खतरा

इस संघर्ष का असर अब फारस की खाड़ी के अन्य देशों पर भी पड़ने लगा है। ईरानी ड्रोन और मिसाइलें संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन, कुवैत और अन्य पड़ोसी देशों के हवाई क्षेत्र की ओर उड़ती देखी गई हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया भर में तेल निर्यात के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, वहां से जहाजों की आवाजाही काफी हद तक रुक गई है। ड्रोन हमलों के बढ़ते खतरे के कारण व्यापारिक और तेल के जहाज इस रास्ते से गुजरने से बच रहे हैं।

इन युद्धों में लंबा फंसा अमेरिका

    वियतनाम युद्ध

लगभग 20 साल (अमेरिकी सैनिकों की प्रमुख मौजूदगी करीब 8 साल)।

परिणाम: अमेरिका को भारी नुकसान (58,000+ अमेरिकी मौतें।
2. अफगानिस्तान युद्ध

20 साल – अमेरिका की सबसे लंबी जंग।

परिणाम: ट्रिलियंस डॉलर खर्च, हजारों अमेरिकी मौतें, लेकिन 2021 में वापसी के साथ तालिबान फिर सत्ता में आ गया।
3. इराक युद्ध

मुख्य ऑपरेशन करीब 8 साल, लेकिन ISIS के खिलाफ 2014 से आगे भी जारी (कुल 20+ साल का प्रभाव)।

परिणाम: लाखों मौतें, क्षेत्र में अस्थिरता, और ISIS जैसी नई समस्याओं का जन्म।

Leave a Comment

2