Cockroach Janta Party : अभिजीत दिपके का विवादित बयान, कहा- अगर मैं मुस्लिम होता तो मुझे जेल में डाल देते

Cockroach Janta Party: अभिजीत दिपके के एक विवादित बयान ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। उन्होंने कहा, "अगर मैं मुस्लिम होता तो मुझे जेल में डाल देते।" इस टिप्पणी के बाद विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। आखिर यह बयान किस संदर्भ में दिया गया और विवाद क्यों बढ़ा, जानिए पूरी रिपोर्ट।

Cockroach Janta Party

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जून 30, 2026

Cockroach Janta Party : दिल्ली के जंतर-मंतर पर इन दिनों ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का विरोध प्रदर्शन चर्चा का केंद्र बना हुआ है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़क पर उतर आए हैं। इस आंदोलन को तब एक नई ऊर्जा मिली, जब प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक ने प्रदर्शन स्थल पर पहुँचकर इसे अपना समर्थन दिया। युवाओं और छात्रों के भविष्य से जुड़े विभिन्न गंभीर मुद्दों को लेकर सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर ही भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। यह प्रदर्शन नीट पेपर लीक, एनटीए की कार्यप्रणाली में धांधली और एसएससी पेपर लीक जैसे बड़े घोटालों के खिलाफ है, जिसने देशभर के लाखों मेधावी छात्रों के सपनों को झकझोर कर रख दिया है।

अभिजीत दिपके का विवादास्पद बयान

प्रदर्शन के दौरान अभिजीत दिपके द्वारा दिया गया एक बयान सोशल मीडिया पर नई बहस का कारण बन गया है। इंटरव्यू के दौरान दिपके ने कहा, ‘अगर मैं खालिद होता या मुसलमान होता, तो अब तक मैं जेल में होता। मुझे इस बात की पूरी अवेयरनेस है।’ उनके इस बयान ने तुरंत उमर खालिद का मुद्दा छेड़ दिया, जो दिल्ली दंगों के मामले में पिछले करीब पांच वर्षों से जेल में बंद हैं। दिपके का यह बयान एक ओर जहाँ उनकी गिरफ्तारी के डर को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर यह देश में कानून व्यवस्था और अल्पसंख्यकों के प्रति दृष्टिकोण पर एक बड़ी बहस को आमंत्रित कर रहा है।

पीड़ित परिवारों का दर्द और सरकार की उदासीनता पर सवाल

नीट पेपर लीक और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई धांधली के कारण जिन छात्रों ने आत्महत्या जैसा कठोर कदम उठाया, उनके परिवारों का दर्द प्रदर्शन के दौरान मुख्य मुद्दा बना रहा। अभिजीत दिपके ने दीप मेघवाल, आकांक्षा चतुर्वेदी, अमायरा कुमार और कहान पटेल जैसे छात्रों के परिवारों का जिक्र करते हुए सरकार पर बेहद तीखे हमले किए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इतनी उदासीन और अहंकारी हो चुकी है कि उसे उन परिवारों से संपर्क करने की भी आवश्यकता महसूस नहीं हुई, जिन्होंने अपने बच्चों को खो दिया है। दिपके ने कहा कि सरकार की यह बेरुखी न केवल शर्मनाक है, बल्कि पीड़ित परिवारों को न्याय के लिए भीख मांगने जैसी स्थिति में धकेलने वाली है।

सत्ता से न्याय की मांग

अभिजीत दिपके ने सरकार से मांग की है कि कम से कम पीड़ित परिवारों से मिलकर खेद व्यक्त किया जाए। उन्होंने सरकार से सवाल करते हुए पूछा कि क्या उन परिवारों के प्रति संवेदना जताना भी सरकार के लिए बहुत बड़ी बात है? उन्होंने कहा कि बच्चों को वापस नहीं लाया जा सकता, लेकिन सरकार का एक छोटा सा कदम उनके दुखी परिवारों को संबल दे सकता है। छात्रों और विपक्ष के समर्थन के साथ चल रहे इस आंदोलन में अब मृत छात्रों के परिजन भी अपनी आवाज उठाने के लिए जंतर-मंतर पहुँच रहे हैं। यह आंदोलन अब केवल पेपर लीक तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह देश के युवाओं के भविष्य और सत्ता की जवाबदेही पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह बनकर खड़ा हो गया है।

Read More :  रामगढ़ महोत्सव में सजी रामभक्ति की शाम, रामलीला, कवि सम्मेलन और ‘जटायु मोक्ष’ ने जीता दिल