CM योगी का क्रांतिकारी कृषि मॉडल: जानिए कैसे डबल फसल से दोगुनी कमाई होगी

लखनऊ यूपी में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ ने गन्ना आधारित तिलहनी और दलहनी अंतःफसली यानी इंटरक्रॉपिंग खेती को लागू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होने कहा है कि उत्तर प्रदेश को कृषि क्षेत्र में नई छलांग दिलाने का सबसे प्रभावी तरीका गन्ना के साथ तिलहनी एवं दलहनी अंतःफसली खेती को बड़े पैमाने पर लागू करना है। यह मॉडल गन्ना किसानों की आय को केवल दोगुना नहीं, बल्कि बहु-गुणित करने की क्षमता रखता है।   मुख्यमंत्री सोमवार को इस विषय पर आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे

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Published On :

फ़रवरी 2, 2026

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लखनऊ
यूपी में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ ने गन्ना आधारित तिलहनी और दलहनी अंतःफसली यानी इंटरक्रॉपिंग खेती को लागू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होने कहा है कि उत्तर प्रदेश को कृषि क्षेत्र में नई छलांग दिलाने का सबसे प्रभावी तरीका गन्ना के साथ तिलहनी एवं दलहनी अंतःफसली खेती को बड़े पैमाने पर लागू करना है। यह मॉडल गन्ना किसानों की आय को केवल दोगुना नहीं, बल्कि बहु-गुणित करने की क्षमता रखता है।
 
मुख्यमंत्री सोमवार को इस विषय पर आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। सीएम ने बताया कि गन्ने के साथ सरसों, मसूर, उर्द और मूंग जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की अंतःफसल (इंटरक्रॉपिंग) से किसानों को अतिरिक्त उत्पादन मिलेगा। इससे खेती की लागत कम होगी और पूरे वर्ष स्थिर आय सुनिश्चित हो सकेगी।उन्होंने कहा कि इस मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि गन्ने की पैदावार प्रभावित किए बिना किसानों को अतिरिक्त फसल, अतिरिक्त लाभ और जोखिम से सुरक्षा मिलती है। प्रदेश में कृषि योग्य भूमि का क्षैतिज विस्तार अब संभव नहीं है।

ऐसे में ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी के लक्ष्य को हासिल करने के लिए इकाई क्षेत्रफल से अधिक उत्पादन ही एकमात्र रास्ता है। उन्होंने गन्ना आधारित अंतःफसली खेती को यूपी के कृषि भविष्य का नया मॉडल बताते हुए कहा कि यह किसानों को अधिक उत्पादन, अधिक कमाई और जोखिम से सुरक्षा प्रदान करेगा।

मुख्यमंत्री ने इस योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक मिशन मोड में लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में 29.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती होती है, जिसमें 14.64 लाख हेक्टेयर नया बोया गया क्षेत्र और 14.86 लाख हेक्टेयर पेड़ी शामिल है। इतने बड़े क्षेत्र में तिलहन और दलहन की अंतःफसल जोड़ने से उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और प्रदेश तथा देश को तिलहन-दलहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता मिलेगी।

सीएम योगी ने निर्देश दिया कि कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से वैज्ञानिक आधार पर अंतःफसल का चयन किया जाए। उन्होंने आईआईएसआर की सिफारिशों के अनुसार रबी में सरसों-मसूर और जायद में उर्द-मूंग को प्राथमिकता देने की बात कही। साथ ही वर्षवार रोडमैप और सहायता-अनुदान की स्पष्ट व्यवस्था करने के निर्देश दिए।

 

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