खेतों पर संकट के बादल: मौसम विभाग की चेतावनी, गेहूं की फसल को बड़ा नुकसान संभव

चंडीगढ़. पंजाब समेत उत्तर भारत के कई इलाकों में इन दिनों मौसम ने अचानक करवट ली है। एक तरफ गेहूं की फसल पूरी तरह पक कर कटाई के लिए तैयार है, तो दूसरी तरफ भारी वर्षा और आंधी-तूफान ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में खड़ी सुनहरी फसल अब भीगने लगी है, जिससे बड़े नुकसान की आशंका बन गई है। खेतीबाड़ी माहिर डॉ. राकेश कुमार ने कहा कि इस समय बारिश किसानों के लिए अच्छा संकेत नहीं है। उन्होंने कहा कि गेहूं का दाना अब पूरी तरह पक चुका होता है और कटाई का समय भी आ गया

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Published On :

अप्रैल 11, 2026

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चंडीगढ़.

पंजाब समेत उत्तर भारत के कई इलाकों में इन दिनों मौसम ने अचानक करवट ली है। एक तरफ गेहूं की फसल पूरी तरह पक कर कटाई के लिए तैयार है, तो दूसरी तरफ भारी वर्षा और आंधी-तूफान ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में खड़ी सुनहरी फसल अब भीगने लगी है, जिससे बड़े नुकसान की आशंका बन गई है।

खेतीबाड़ी माहिर डॉ. राकेश कुमार ने कहा कि इस समय बारिश किसानों के लिए अच्छा संकेत नहीं है। उन्होंने कहा कि गेहूं का दाना अब पूरी तरह पक चुका होता है और कटाई का समय भी आ गया है। ऐसे में बारिश से दाने की क्वालिटी और पैदावार दोनों पर असर पड़ता है।

गेहूं की फसल को नुकसान
खेतों में पानी भरने और अंकुरण की समस्या वर्षा के कारण खेतों में पानी भरने की समस्या भी सामने आती है। जहां पानी निकलने की सही सुविधा नहीं होती, वहां फसल लंबे समय तक भीगी रहती है। इससे गेहूं के दानों में अंकुरण हो सकता है, जिससे बाजार में कीमत काफी कम हो जाती है। डॉ. राकेश ने कहा कि लगातार नमी की वजह से अनाज का रंग फीका पड़ जाता है आर वजन भी कम हो जाता है।

इससे किसानों को प्रति क्विंटल कम दाम मिलते हैं, जिसका सीधा असर उनकी इनकम पर पड़ता है। उन्होंने सलाह दी कि मौसम साफ होने पर तुरंत कटाई शुरू कर देनी चाहिए। किसान मदन लाल व धर्म चन्द ने कहा कि उनकी गेहूं की फसल पूरी तरह तैयार है, लेकिन लगातार बारिश की वजह से फसल गिरने का खतरा बन गया है।

बारिश की वजह से खेतों में बढ़ी नमी
उनके मुताबिक, अगर फसल गिर गई तो कटाई मुश्किल होगी और अनाज भी खराब हो जाएगा, जिससे भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है। इसी तरह, किसान संगठन ने भी कहा कि बारिश की वजह से खेतों में नमी बढ़ रही है, जिससे बीज अंकुरित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर बीज अंकुरित हुए तो उन्हें बाजार में सही दाम नहीं मिलेगा और सारी मेहनत बेकार हो सकती है।

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