लुधियाना में चुनावी अवकाश पर भी लगी कक्षाएं, आदेशों की अनदेखी पर सवाल

लुधियाना. शहर के कई निजी स्कूलों को लेकर प्रशासन और शिक्षा विभाग की पिक एंड चूज की नीति अक्सर देखने को मिलती है। जहां एक तरफ छोटी छोटी बातों को लेकर शहर के कई बड़े और नामी स्कूलों को प्रशासन और शिक्षा विभाग की नाराजगी का सामना करना पड़ता है। वहीं शहर में पंजाब स्कूल शिक्षा विभाग से एफिलिएटिड और एसोसिएट ऐसे स्कूल हैं जहां सरकारी आदेशों को सिरे से अनदेखा कर स्कूल लगातार अपनी मनमर्जी कर रहे हैं लेकिन प्रशासन और शिक्षा विभाग आंखें मूंद कर उनकी मनमानियों को सहन कर रहा है। शिक्षा विभाग के दावों पर खड़े

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Published On :

मई 27, 2026

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लुधियाना.

शहर के कई निजी स्कूलों को लेकर प्रशासन और शिक्षा विभाग की पिक एंड चूज की नीति अक्सर देखने को मिलती है। जहां एक तरफ छोटी छोटी बातों को लेकर शहर के कई बड़े और नामी स्कूलों को प्रशासन और शिक्षा विभाग की नाराजगी का सामना करना पड़ता है।

वहीं शहर में पंजाब स्कूल शिक्षा विभाग से एफिलिएटिड और एसोसिएट ऐसे स्कूल हैं जहां सरकारी आदेशों को सिरे से अनदेखा कर स्कूल लगातार अपनी मनमर्जी कर रहे हैं लेकिन प्रशासन और शिक्षा विभाग आंखें मूंद कर उनकी मनमानियों को सहन कर रहा है।

शिक्षा विभाग के दावों पर खड़े हुए सवाल
ऐसा ही एक नया मामा फिर से प्रकाश में आया है। पंजाब भर में  स्थानीय निकाय चुनावों (लोकल बॉडी इलैक्शंस) के मद्देनजर सरकार द्वारा आधिकारिक तौर पर छुट्टी घोषित की गई थी। इस अनिवार्य अवकाश के बावजूद महानगर के कई इलाकों में नियमों को ताक पर रखकर स्कूलों को खुला रखने का एक गंभीर मामला सामने आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्थानीय टिब्बा रोड और ताजपुर रोड पर स्थित कई स्कूल इस सरकारी आदेश की धज्जियां उड़ाते हुए आज आम दिनों की तरह खुले रहे, जिससे शिक्षा विभाग के प्रबंधकीय दावों पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। हैरानी की बात यह है कि यह सभी स्कूल पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (पी.एस.ई.बी.) से संबंधित हैं, जिन पर सरकारी गाइडलाइंस और नियमों को सख्ती से लागू करने की जिम्मेदारी होती है। नियमों के मुताबिक, चुनाव वाले दिन किसी भी अप्रिय घटना से बचने, सिक्योरिटी व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने और वोटिंग प्रतिशत बढ़ाने के उद्देश्य से सभी सरकारी व गैर-सरकारी शिक्षण संस्थानों में पूर्ण अवकाश रहता है। लेकिन इन निजी स्कूलों ने एडमिनिस्ट्रेशन के आदेशों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया।

छुट्टी के दिन भी स्टूडैंट्स स्कूल आते-जाते देखे गए
इस पूरे घटनाक्रम की सबसे चिंताजनक बात यह रही कि स्थानीय सचेत नागरिकों द्वारा इस उल्लंघन की लाइव सूचना तुरंत संबंधित उच्चाधिकारियों को भी दी गई। इसके बावजूद, मौके पर स्कूलों को बंद करवाने या उनके खिलाफ तुरंत एक्शन लेने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे इन स्कूलों के संचालकों के हौसले बुलंद दिखे।  छुट्टी के दिन भी स्टूडैंट्स आम दिनों की तरह बैग उठाकर स्कूल आते-जाते देखे गए, जिससे यह साफ जाहिर होता है कि स्कूलों ने नियमों को ताक पर रखकर अपनी मनमर्जी चलाई। इस लापरवाही को लेकर समाज सेवकों और अभिभावकों (पेरेंट्स) में भारी रोष पाया जा रहा है। लोगों का कहना है कि जब सरकार और इलैक्शन कमिशन द्वारा सुरक्षा कारणों से छुट्टी का ऐलान किया गया था, तो इन स्कूलों ने किस आधार पर क्लास लगाने का फैसला किया। अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारी नियमों का सरेआम उल्लंघन करने वाले इन पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूलों के खिलाफ क्या सख्त कार्रवाई (लीगल एक्शन) अमल में लाते हैं।

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