राष्ट्रपति भवन में छत्तीसगढ़ की झांकी कलाकारों का सम्मान

रायपुर. गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर छत्तीसगढ़ की झांकी में शामिल कलाकारों को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात का गौरव प्राप्त हुआ। राष्ट्रपति से स्नेहपूर्ण मुलाकात के दौरान कलाकार भावविभोर और अभिभूत नजर आए। राष्ट्रपति   द्रौपदी मुर्मु ने छत्तीसगढ़ की झांकी की प्रशंसा करते हुए कहा कि झांकी के माध्यम से देश की समृद्ध जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का प्रभावशाली प्रदर्शन हुआ है। उन्होंने कलाकारों के समर्पण, मेहनत और जीवंत प्रस्तुति की सराहना करते हुए छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया भी कहा। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले से आए जनजातीय कलाकारों ने गणतंत्र दिवस परेड के

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Published On :

जनवरी 27, 2026

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रायपुर.

गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर छत्तीसगढ़ की झांकी में शामिल कलाकारों को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात का गौरव प्राप्त हुआ। राष्ट्रपति से स्नेहपूर्ण मुलाकात के दौरान कलाकार भावविभोर और अभिभूत नजर आए।

राष्ट्रपति   द्रौपदी मुर्मु ने छत्तीसगढ़ की झांकी की प्रशंसा करते हुए कहा कि झांकी के माध्यम से देश की समृद्ध जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का प्रभावशाली प्रदर्शन हुआ है। उन्होंने कलाकारों के समर्पण, मेहनत और जीवंत प्रस्तुति की सराहना करते हुए छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया भी कहा।

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले से आए जनजातीय कलाकारों ने गणतंत्र दिवस परेड के दौरान छत्तीसगढ़ की झांकी के साथ पारंपरिक मंदार नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति दी थी, जिसने कर्तव्य पथ पर मौजूद दर्शकों के साथ-साथ देश-दुनिया का ध्यान आकर्षित किया।

कलाकारों ने राष्ट्रपति से मुलाकात को अपने जीवन का अविस्मरणीय क्षण बताते हुए कहा कि यह सम्मान उन्हें अपनी कला, संस्कृति और परंपराओं को और अधिक निष्ठा के साथ आगे बढ़ाने की नई प्रेरणा देगा।

राष्ट्रपति से मुलाकात करने वालों में टीम लीडर तेज बहादुर भुवाल के नेतृत्व में नारायणपुर जिले के ग्राम नयनार से आए 13 सदस्यीय दल में जेनू राम सलाम, लच्छू राम, जैतू राम सलाम, राजीम सलाम, दिनेश करंगा, जयनाथ सलाम, मानसिंग करंगा, चन्द्रशेखर पोटाई, धनश्याम सलाम, जगनाथ सलाम, सुरेश सलाम तथा घोड़लापारा, ग्राम नयनार निवासी दिलीप गोटा शामिल रहे।

उल्लेखनीय है कि बस्तर अंचल की इस पारंपरिक कला टोली ने अपनी लोक-संस्कृति और नृत्य शैली से राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचान को सशक्त रूप से प्रस्तुत किया।

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