Chandranath Rath Murder Case : शुभेंदु अधिकारी के PA चंद्रनाथ रथ हत्याकांड की जांच करेगी CBI, बंगाल सरकार की सिफारिश

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 के बाद मध्यमग्राम में हुई शुभेंदु अधिकारी के करीबी चंद्रनाथ रथ की हत्या ने राजनीतिक माहौल गर्मा दिया है। SIT द्वारा बक्सर और बलिया से तीन शूटरों की गिरफ्तारी के बाद, अब इस मामले में CBI जांच की मांग तेज हो गई है। क्या इसके पीछे कोई बड़ा मास्टरमाइंड छिपा है?

Chandranath Rath Murder Case

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मई 12, 2026

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Chandranath Rath Murder Case : पश्चिम बंगाल की राजनीति को दहला देने वाले चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में एक बड़ा मोड़ आया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक (PA) चंद्रनाथ रथ की सरेआम हुई हत्या के मामले की जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) अपने हाथों में लेगी। उल्लेखनीय है कि इस मामले की संवेदनशीलता और अंतरराष्ट्रीय व अंतरराज्यीय कड़ियों को देखते हुए खुद पश्चिम बंगाल पुलिस ने ही सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। आज से सीबीआई की विशेष टीम बंगाल पुलिस से केस की फाइलें और अब तक के साक्ष्य अपने कब्जे में ले लेगी। इस कदम से उम्मीद जताई जा रही है कि हत्या के पीछे छिपी बड़ी राजनीतिक साजिश और मास्टरमाइंड का जल्द खुलासा हो सकेगा।

मध्यमग्राम में हुई थी सरेआम हत्या

वारदात की जड़ें 6 मई की रात से जुड़ी हैं, जब उत्तर 24 परगना जिले के मध्यमग्राम इलाके में चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। शुभेंदु अधिकारी के बेहद करीबी माने जाने वाले रथ पर हमलावरों ने उस समय हमला किया जब वह सार्वजनिक स्थान पर थे। इस घटना ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। हत्या के तुरंत बाद राज्य सरकार ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था, जिसमें तकनीकी विशेषज्ञों और अनुभवी पुलिस अधिकारियों को शामिल किया गया था। एसआईटी ने शुरुआती जांच में पाया कि यह पेशेवर अपराधियों का काम है और इसके तार राज्य की सीमाओं के बाहर जुड़े हुए हैं।

उत्तर प्रदेश और बिहार में पुलिस की छापेमारी

बंगाल पुलिस की एसआईटी ने जांच के दौरान डिजिटल फुटप्रिंट्स और तकनीकी निगरानी का सहारा लिया। जांच में यह सुराग मिला कि हमलावर हत्या के बाद पश्चिम बंगाल से फरार होकर पड़ोसी राज्यों में शरण लिए हुए हैं। इसी आधार पर पुलिस की अलग-अलग टीमें उत्तर प्रदेश और बिहार भेजी गईं। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह एक अंतरराज्यीय नेटवर्क का हिस्सा था। कड़ी मशक्कत और तकनीकी ट्रैकिंग के बाद रविवार को उत्तर प्रदेश से तीन प्रमुख आरोपियों को हिरासत में लिया गया, जिनसे पूछताछ के बाद सोमवार को उनकी गिरफ्तारी की पुष्टि की गई।

शार्पशूटर समेत तीन आरोपी गिरफ्तार

गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से एक की पहचान विशाल श्रीवास्तव के रूप में हुई है, जो बिहार के बक्सर जिले के पंडियापट्टी का रहने वाला है। वहीं, दो अन्य आरोपी उत्तर प्रदेश के निवासी बताए जा रहे हैं। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से एक पेशेवर शार्पशूटर है, जिसे विशेष रूप से इस काम के लिए सुपारी दी गई थी। इन तीनों को ट्रांजिट रिमांड पर पश्चिम बंगाल लाया जा रहा है, जहां उन्हें अदालत में पेश किया जाएगा। सीबीआई इन आरोपियों से आमने-सामने पूछताछ कर यह जानने की कोशिश करेगी कि हत्या के लिए पैसा किसने दिया और इसके पीछे किसका राजनीतिक हित था।

डिजिटल सबूत और आगे की राह

पुलिस ने बताया कि जांच में डिजिटल साक्ष्य सबसे महत्वपूर्ण साबित हुए हैं। मोबाइल टावर लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल्स के जरिए ही पुलिस कातिलों के ठिकाने तक पहुँच पाई। अब जब मामला सीबीआई के पास जा रहा है, तो जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना है। एजेंसी उन सभी लोगों पर शिकंजा कसेगी जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस साजिश में शामिल थे। मुख्यमंत्री के सहयोगी की हत्या के इस मामले ने बंगाल की राजनीति में पहले ही उबाल पैदा कर दिया है, और सीबीआई की एंट्री के बाद आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।

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