Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन मां कालरात्रि को समर्पित होता है, जो मां दुर्गा का सबसे उग्र और शक्तिशाली स्वरूप मानी जाती हैं। उनका स्वरूप अत्यंत प्रभावशाली और रहस्यमय है। उनका रंग घने अंधकार की तरह काला होता है और उनके तीन विशाल नेत्र पूरे ब्रह्मांड का प्रतीक माने जाते हैं। मां कालरात्रि को काल का नाश करने वाली देवी कहा जाता है, जो अपने भक्तों को हर प्रकार के भय और संकट से मुक्ति दिलाती हैं।
हालांकि उनका रूप भयावह प्रतीत होता है, लेकिन वे अपने भक्तों के लिए अत्यंत शुभ फल देने वाली होती हैं। यही कारण है कि उन्हें ‘शुभंकरी’ भी कहा जाता है। वे अपने भक्तों के जीवन से नकारात्मकता और डर को दूर कर सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करती हैं।
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पूजा का शुभ मुहूर्त

मां कालरात्रि की पूजा के लिए सुबह का समय विशेष रूप से शुभ माना गया है। प्रातः 6:20 बजे से 8:45 बजे तक पूजा करना उत्तम रहता है। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त, जो दोपहर 12:03 बजे से 12:51 बजे तक रहता है, भी पूजा के लिए अनुकूल माना जाता है। इस समय की गई आराधना विशेष फलदायी होती है।
पूजा विधि और आवश्यक नियम
मां कालरात्रि की पूजा में सात्विकता और अनुशासन का विशेष महत्व होता है। इस दिन भक्तों को गहरे नीले या लाल रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए, जो शुभ माने जाते हैं। पूजा की शुरुआत मां की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाकर की जाती है।
इसके बाद मां को लाल रंग के फूल अर्पित किए जाते हैं, खासकर गुड़हल का फूल उन्हें अत्यंत प्रिय होता है। इसके साथ ही गुड़ या गुड़ से बनी मिठाइयों का भोग लगाना भी बेहद शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान पूरे मन से मां की आरती करनी चाहिए और कपूर जलाकर घर की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करना चाहिए। यह पूजा न केवल आध्यात्मिक शांति देती है, बल्कि मानसिक मजबूती और जीवन में सही दिशा भी प्रदान करती है।
मंत्र जाप और उसका महत्व
मां कालरात्रि की पूजा करते समय “ॐ देवी कालरात्र्यै नमः” मंत्र का जाप करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। इस मंत्र के नियमित जाप से व्यक्ति के मन की इच्छाएं पूर्ण होती हैं और उसे शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने की शक्ति मिलती है। पूजा के अंत में भगवान का आभार व्यक्त करना भी जरूरी है, जिससे सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और जीवन में संतुलन आता है।
भय से मुक्ति और समृद्धि का आशीर्वाद
मां कालरात्रि की कृपा से व्यक्ति के जीवन से भय, तनाव और नकारात्मकता समाप्त हो जाती है। उनके आशीर्वाद से घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है। साथ ही अकाल मृत्यु का भय भी दूर होता है और परिवार सुरक्षित रहता है। जब कोई भक्त सच्चे मन से मां की आराधना करता है, तो उसके जीवन के सभी कष्ट धीरे-धीरे समाप्त हो जाते हैं और खुशियों का आगमन होता है।
गुड़ के भोग का विशेष महत्व
मां कालरात्रि को गुड़ का भोग लगाना विशेष फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सप्तमी के दिन गुड़ या उससे बनी मिठाइयों का नैवेद्य अर्पित करने से जीवन के अचानक आने वाले संकट टल जाते हैं। ज्योतिषीय दृष्टि से भी गुड़ सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है, जो जीवन में आ रही बाधाओं को दूर करने में सहायक होता है। जब भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ यह भोग लगाते हैं और प्रसाद का वितरण करते हैं, तो उनके जीवन में सफलता और खुशहाली के नए रास्ते खुलते हैं।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां पौराणिक कथाओं,धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। खबर में दी जानकारी पर विश्वास व्यक्ति की अपनी सूझ-बूझ और विवेक पर निर्भर करता है। प्राइम टीवी इंडिया इस पर दावा नहीं करता है ना ही किसी बात पर सत्यता का प्रमाण देता है।









