Chaitra Navratri 2026: सनातन धर्म में वैसे तो कई सारे व्रत त्योहार पड़ते हैं, लेकिन नवरात्रि को बेहद ही खास माना गया है। माघ मास में पड़ने वाली गुप्त नवरात्रि को दस महाविद्याओं की साधना से जुड़ा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस समय देवी दुर्गा के प्रकट स्वरूपों के साथ साथ उनके गूढ़ और रहस्यमय रूपों की पूजा उपासना का महत्व बढ़ जाता है। भक्तजन इस अवधि में मां दुर्गा की साधना कर आध्यात्मिक उन्नति और मानसिक शकित प्राप्त करते हैं।
धार्मिक कैलेंडर के अनुसार इस साल दो अनोखे संयोग बन रहे हैं। इस साल माघ और चैत्र नवरात्रि दोनों ही 19 तारीख से आरंभ होंगे। माघ मास के गुप्त नवरात्र 19 जनवरी से शुरू होकर 27 जनवरी तक चलेंगे, जबकि चैत्र नवरात्र 19 मार्च से आरंभ होंगे। पिछले वर्ष माघ नवरात्र 30 जनवरी से और चैत्र नवरात्र 30 मार्च से शुरू हुए थे। इसके अलावा आषाढ़ माह के गुप्त नवरात्र 15 जुलाई से होंगे और शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से आरंभ होंगे। यह संयोग विशेष रूप से दुर्लभ है क्योंकि माघ और चैत्र दोनों नवरात्र एक ही तारीख से शुरू हो रहे हैं।
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तिथि और घटस्थापना मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार गुप्त नवरात्रि 19 जनवरी 2026 को आरंभ होकर 27 जनवरी तक चलेगी। प्रतिपदा तिथि 19 जनवरी को रात 1:21 बजे से शुरू होकर अगले दिन 2:14 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर नवरात्रि की शुरुआत 19 जनवरी को घटस्थापना के साथ होगी।
घटस्थापना का शुभ समय: सुबह 7:14 से 10:46 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:11 से 12:53 बजे तक
साधक अपनी सुविधा के अनुसार इन समयों में कलश स्थापना कर नवरात्रि की शुरुआत कर सकते हैं।
पूजन विधि और सामग्री
गुप्त नवरात्रि में पूजा के लिए भक्तजन को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और लाल वस्त्र धारण करने चाहिए। पूजन स्थान को शुद्ध कर लाल कपड़ा बिछाकर मां त्रिपुर भैरवी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं।
लाल फूल (गुलाब या गुड़हल), लाल चंदन, रोली, अक्षत और पंचमेवा अर्पित करें।
सुगंधित धूप और दीपक रखें।
नैवेद्य में गुड़, चना या खीर का प्रसाद अर्पित करें।
पूजा के दौरान मां त्रिपुर भैरवी का ध्यान करें और “ॐ त्रिपुर भैरव्यै नमः” मंत्र से आरंभ करें। इसके बाद 108 बार “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” मंत्र का जाप करें और मां को लाल फूल अर्पित करें।
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Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां पौराणिक कथाओं,धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। खबर में दी जानकारी पर विश्वास व्यक्ति की अपनी सूझ-बूझ और विवेक पर निर्भर करता है। प्राइम टीवी इंडिया इस पर दावा नहीं करता है ना ही किसी बात पर सत्यता का प्रमाण देता है।










