Chaitra Navratri 2026 Day 5: चैत्र नवरात्रि 2026 के पांचवें दिन यानी 23 मार्च को मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। मां स्कंदमाता दुर्गा की पांचवीं शक्ति हैं और भगवान स्कंद (कार्तिकेय) की माता के रूप में जानी जाती हैं। इनके गोद में भगवान कार्तिकेय का बाल रूप विराजमान रहता है, इसलिए इन्हें मातृत्व, करुणा और दया का प्रतीक माना जाता है।
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स्कंदमाता का स्वरूप

मां स्कंदमाता का स्वरूप अत्यंत करुणामयी और कल्याणकारी है। उनका वर्णन इस प्रकार है:
चार भुजाएं हैं।
दो हाथों में कमल पुष्प।
एक हाथ में बाल रूप में भगवान स्कंद।
एक हाथ वरमुद्रा में।
वाहन – सिंह।
कमल के आसन पर विराजमान, इस कारण उन्हें पद्मासना भी कहा जाता है।
स्कंदमाता की पूजा के लाभ
मां स्कंदमाता की पूजा करने से भक्तों को अनेक लाभ मिलते हैं:
संतान प्राप्ति में बाधाओं का नाश होता है। माता की कृपा से परिवार में खुशहाली आती है।
जीवन में उन्नति और सकारात्मक अवसरों के मार्ग खुलते हैं।
भय, कष्ट और नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा मिलती है।
बच्चों और युवाओं में एकाग्रता और बुद्धि बढ़ती है।
साधक को मानसिक शांति और सुख का अनुभव होता है।
जीवन में अच्छे और बुरे के बीच संतुलन बनाए रखना सिखाती हैं।
मां स्कंदमाता की पूजा विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और सिल्वर रंग के वस्त्र पहनें। माता को कुमकुम, रोली और अक्षत (चावल) का तिलक लगाएं। पूजा के दौरान मंत्र “ॐ देवी स्कंदमातायै नमः” का 108 बार जाप करें। कपूर या घी के दीपक से आरती उतारें और स्तुति करें, जैसे: “या देवी सर्वभूतेषु मा स्कंद माता रूपेण संस्थिता”। दिन में पुनः गोधुलि बेला में पूजा करें।
मां स्कंदमाता का भोग
इस दिन मां को केला या केले से बनी चीजों का भोग लगाया जाता है। यह भोग उनकी कृपा और आशीर्वाद पाने का पारंपरिक तरीका है।
स्कंदमाता मंत्र और आरती
पूजा मंत्र: ॐ देवी स्कंदमातायै नमः
ध्यान मंत्र:
सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चित करद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी।।
आरती:
जय तेरी हो स्कंदमाता,
पांचवां नाम तुम्हारा आता।
सब के मन की जानन हारी,
जग जननी सब की महतारी। जय तेरी हो स्कंदमाता।
आरती में माता की महिमा, भक्तों के प्रति उनके करुणामयी स्वभाव और दुष्टों पर विजय पाने की शक्ति का वर्णन किया गया है।
स्कंदमाता से मिलने वाली सीख
मां स्कंदमाता का स्वरूप यह सिखाता है कि मोह-माया और सांसारिक उलझनों में रहते हुए भी बुद्धि, विवेक और सही निर्णय से जीवन के असुरों का नाश किया जा सकता है। माता का अपने पुत्र के प्रति असीम प्रेम दर्शाता है कि पूजा में उन्हें पुत्र के नाम के साथ संबोधित करना शुभ माना जाता है।
मां स्कंदमाता की पूजा से न केवल बच्चों और युवाओं में एकाग्रता बढ़ती है, बल्कि जीवन में सकारात्मक उन्नति और मानसिक शांति का अनुभव भी मिलता है। यह नवरात्रि का दिन आध्यात्मिक और पारिवारिक दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
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