Chaiti Chhath Puja 2026: नहाय-खाय से शुरू हुआ चार दिवसीय लोक आस्था का महापर्व चैती छठ आज अपने सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुँच गया है। आज यानी मंगलवार, 24 मार्च 2026 को चैत्र शुक्ल षष्ठी के अवसर पर व्रती महिलाएं अस्ताचलगामी (डूबते) सूर्य को पहला अर्घ्य अर्पित करेंगी। श्रद्धा, भक्ति और कठोर तप के इस पर्व में आज शाम को नदियों और तालाबों के घाट ‘कांच ही बांस के बहंगिया’ जैसे पारंपरिक गीतों से गूंज उठेंगे।
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खरना के साथ शुरू हुआ 36 घंटे का निर्जला उपवास

सोमवार को महापर्व के दूसरे दिन ‘खरना’ का अनुष्ठान विधि-विधान से संपन्न हुआ। व्रतियों ने मिट्टी के चूल्हे पर बनी गुड़ की विशेष खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण किया, जिसके बाद से उनका 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत प्रारंभ हो चुका है। यह उपवास बुधवार की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने और पारण करने के बाद ही संपन्न होगा।
आज का विशेष संयोग
ज्योतिष शास्त्र के नजरिए से इस साल की चैती छठ बेहद खास है। आज संध्या अर्घ्य के समय रोहिणी नक्षत्र और प्रीति योग का एक अद्भुत और कल्याणकारी संयोग बन रहा है। मान्यताओं के अनुसार, इस शुभ योग में की गई पूजा और सूर्य देव को दिया गया अर्घ्य परिवार में सुख-समृद्धि, आरोग्य और संतान की लंबी आयु सुनिश्चित करता है।
संध्या अर्घ्य की विधि और पूजन सामग्री
आज शाम को व्रती जल में खड़े होकर डूबते हुए सूर्य देव की उपासना करेंगे। पूजन के लिए सूप और दउरा (बांस की टोकरी) को विशेष सामग्रियों से सजाया जाता है:
मुख्य प्रसाद: शुद्ध घी, गेहूं के आटे और गुड़ से बना पारंपरिक ठेकुआ, चावल के लड्डू (लडुवा) और विशेष पूरी।
फल और सब्जियां: सूप में डाभ नींबू, केला, सिंघाड़ा, गन्ना, सुथनी, शकरकंद और मौसमी फलों का होना अनिवार्य है।
अन्य सामग्री: नारियल, अगरबत्ती, मिट्टी का दीपक, सिंदूर, अक्षत और कच्चा दूध।
महापर्व के कठोर नियम
छठ पूजा दुनिया के सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है, जिसमें पवित्रता का सर्वोच्च स्थान है:
पूर्ण सात्विकता: व्रत के दौरान पूरे घर में लहसुन और प्याज का प्रयोग वर्जित रहता है।
बिस्तर का त्याग: व्रती जमीन पर कंबल या चटाई बिछाकर सोते हैं और विलासिता का त्याग करते हैं।
स्वच्छता ही सेवा: प्रसाद बनाने के लिए उपयोग होने वाले अनाज को धोकर सुखाया जाता है और पूरी प्रक्रिया में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है।
वाणी पर संयम: इस दौरान व्रती मौन रहकर या केवल छठी मैया के गीतों के माध्यम से अपनी भक्ति प्रकट करते हैं।
कल होगा महापर्व का समापन
चार दिवसीय इस महाअनुष्ठान का समापन कल, 25 मार्च (बुधवार) को होगा। चैत्र शुक्ल सप्तमी के दिन तड़के सुबह उगते हुए सूर्य (उदीयमान सूर्य) को दूसरा अर्घ्य दिया जाएगा। इसके बाद व्रती कच्चे दूध और प्रसाद के साथ अपना व्रत खोलेंगे (पारण करेंगे), जिसके साथ ही इस पावन पर्व का समापन होगा।
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Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां पौराणिक कथाओं,धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। खबर में दी जानकारी पर विश्वास व्यक्ति की अपनी सूझ-बूझ और विवेक पर निर्भर करता है। प्राइम टीवी इंडिया इस पर दावा नहीं करता है ना ही किसी बात पर सत्यता का प्रमाण देता है।









